एक बुक जर्नल

Friday, July 31, 2020

साक्षात्कार: आलोक कुमार

परिचय:
आलोक कुमार
लोक जी मूलतः बिहार से हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा दिल्ली में हुई और इसके पश्चात इंजीनियरिंग करने के लिए वो झाँसी आ गये। झाँसी के बी.आई.ई.टी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के पश्चात अब वो बेंगलुरु में एक कम्पनी में कार्यरत हैं।

लिखने पढ़ने का शौक आलोक जी को हमेशा से रहा है। बाल पत्रिकाओं से होते हुए कॉमिक बुक्स और फिर प्रेमचंद से परिचय होने के पश्चात साहित्य के प्रति उनका अनुराग प्रगाढ़ ही हुआ है। तब से निरंतर पढ़ने का क्रम जारी है। 

अब बेंगलुरु में रहकर वह जॉब करते हुए पढ़ने, लिखने में ही अपना वक्त बिता रहे हैं। 

आलोक जी से आप निम्न माध्यमों के द्वारा सम्पर्क स्थापित कर सकते हैं:

आलोक जी की अब तक निम्न पुस्तकें आ चुकी हैं:
दौलत का खेल (अनुवाद)
(किताबों को आप नाम पर क्लिक करके खरीद सकते हैं।)

एक बुक जर्नल की साक्षात्कार श्रृंखला में आज हम आपके समक्ष आलोक कुमार जी से हुई बातचीत प्रस्तुत कर रहे हैं। पेशे से इंजीनियर आलोक जी लेखक और अनुवादक हैं। उनका अब तक एक उपन्यास, तीन अनुवाद और एक कहानी संग्रह आ चुका है। इस बातचीत में हमने उनके लेखन और उनके द्वारा किये गये अनुवादों  के ऊपर बातचीत की है। हम आशा करते हैं कि यह बातचीत आपको पसंद आएगी। 

Tuesday, July 28, 2020

कागज की नाव - सुरेन्द्र मोहन पाठक

जुलाई 23 जुलाई से जुलाई 25, 2020 के बीच पढ़ी गयी

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट: पेपरबैक 
पृष्ठ संख्या: 256 
प्रकाशक: वेस्टलैंड 
आईएसबीएन: 9789387578050

कागज की नाव - सुरेन्द्र मोहन पाठक
कागज की नाव - सुरेन्द्र मोहन पाठक


पहला वाक्य:
लालचन्द हजारे ने चोरी की एम्बैसडर कार को पंजाब बैंक की इमारत के ऐन सामने लाकर रोका।

कहानी: 
लल्लू उर्फ़ लालचंद हजारे एक इक्कीस वर्षीय युवक था जो कि धारावी की एक चाल में रहता था। लल्लू की दिली ख्वाहिश एक दिन रसूखदार व्यक्ति बनने की थी। उसका सपना खूब सारे पैसे क्माने का था। उसे लल्लू से लालचन्द बनना था।

ऐसे में जब उसे इलाके के रसूखदार मवालियों की शरण मिली तो उसे अपना सपना पूरा होता महसूस होने लगा। 

उसे वह सब कुछ मिलने की उम्मीद होने लगी जिसका कि उसने सपना देखा था। 

क्या लल्लू लालचंद बन पाया? 
क्या वह अपने सपनों को पूरा कर पाया?

इंस्पेक्टर अष्टेकर धारावी थाने का इंस्पेक्टर था। धारावी थाने के हर मवाली के विषय में वो जानता था। कुछ ही समय पहले हुई विलियम नाम के एक शख्स की हत्या के मामले ने उसे उलझा रखा था। वह इस मामले को सुलझाना चाहता था लेकिन सुलझा नहीं पा रहा था। 

आखिर किसने विलियम का खून किया था और क्यों अष्टेकर इस मामले को इतना महत्व दे रहा था? 
क्या वह कातिल का पता लगा पाया?

एन्थोनी फ्रान्कोजा धारावी का एक बड़ा दादा था जिसकी पूरी धारावी में धाक थी। विलियम उसका दोस्त हुआ करता था। विलियम की बेवा मोनिका अब उसकी प्रेमिका थी और उसने मोनिका को विलियम के कातिल को सजा देना का वादा किया था। वहीं एन्थोनी ने लल्लू को लल्लू से लालचंद हजारे बनाने का फैसला भी किया था।

क्या एन्थोनी अपने इरादों में कामयाब हो पाया?

Disclaimer:

Vikas' Book Journal is a participant in the Amazon Services LLC Associates Program, an affiliate advertising program designed to provide a means for sites to earn advertising fees by advertising and linking to Amazon.com or amazon.in.

हफ्ते की लोकप्रिय पोस्टस(Popular Posts)