Monday, November 18, 2019

एक हसीन कत्ल - मोहन मौर्य

उपन्यास 15 नवम्बर 2019 को पढ़ा गया

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट: पेपरबैक
पृष्ठ संख्या: 160
प्रकाशक: सूरज पॉकेट बुक्स
आई एस बी एन: 9781943438136


एक हसीन कत्ल - मोहन मौर्य
एक हसीन कत्ल - मोहन मौर्य

पहला वाक्य:
"राज...राज कहाँ हो तुम?"

कहानी:
रिया, राज और सीमा शहर के एक अति प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र हैं। १२ वी के ये छात्र अपना जीवन जी रहे हैं। यह उम्र ही ऐसी होती है कि व्यक्ति इश्क और मोहब्बत के फेर में पड़ता है और इश्क में ही जीना मरना चाहता है। कहा गया है इश्क और जंग में सब कुछ जायज है। और कई बार इश्क ही जंग की वजह बन जाता है।

यही इन तीनों की भी कहानी है।

जहाँ राज और सीमा एक दूसरे को चाहते हैं वहीं रिया राज को चाहती है। सीमा के राज की जिंदगी में आने से पहले रिया और राज ही एक दूसरे के जीवन थे। वो एक दूसरे के सबसे अच्छे मित्र थे और राज का ज्यादातर वक्त रिया के इर्द गिर्द ही घूमता था। रिया भी बहुत खुश थी कि राज केवल उसको ही महत्व देता है  लेकिन फिर सीमा आई और सब कुछ बदल गया।

पर रिया ने हार नहीं मानी है। वह कुछ भी करके राज को पाने की चाहत रखती है।

क्या रिया अपने इरादों में कामयाब हो पाई? 
रिया ने अपने इरादों में कामयाब होने के लिए क्या हथकंडे अपनाए? 
इस प्रेम त्रिकोण का अंत कैसे हुआ?

ऐसे ही कई प्रश्नों का उत्तर इस उपन्यास को पढ़ने के पश्चात आपको मिलेंगे।

Sunday, November 17, 2019

कुछ नहीं - मनमोहन भाटिया

किताब 11 नवम्बर 2019 को पढ़ी गयी

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट: पेपरबैक
पृष्ठ संख्या: 68
प्रकाशक : फ्लाई ड्रीम्स पब्लिकेशन
आईएसबीएन: 9788194113102



कुछ नहीं - मनमोहन भाटिया
कुछ नहीं - मनमोहन भाटिया

पहला वाक्य:
महेश शाम सात बजे एअरपोर्ट पहुँच गया।

कहानी:
हेश की फ्लाइट को जाने में अभी वक्त था तो उसने सोचा क्यों न फ़ूड कोर्ट में बैठ कर पेट पूजा ही कर ली जाए। इसी इरादे से वह फ़ूड कोर्ट में जाकर बैठकर कुछ खा ही रहा था कि एक स्त्री की आवाज़ ने उसे चौंका दिया। महिला उसके टेबल पर मौजूद खाली कुर्सी में बैठने चाहती थी। जब महेश ने शिष्टाचारवश सहमति दी तो उस वक्त महेश को इल्म भी न था कि यह महिला उसकी कॉलेज की दोस्त माया है।  वो माया जिसे महेश बेहद मोहब्बत करता था। वो माया जो अमीर घर की लड़की थी लेकिन महेश को उम्मीद थी कि वह और माया इस दूरी को अपने प्रेम के पुल से पाट देंगे।

लेकिन फिर ऐसा कुछ नहीं हुआ। माया और महेश अलग हो गये। महेश की ममता से शादी हुई और वो माया को भूल गया।

पर इतने सालों बाद महेश का माया से टकराना दोनों के लिए ही सुखद आश्चर्य था।  इस संयोग ने दोनों को ही तेईस वर्षों पुरानी यादों में धकेल दिया।

क्या दोनों का वह पुराना प्यार जागृत फिर होगा? 
माया, जो अब भी बला की खूबसूरत थी, क्या वह दोबरा महेश पर आसक्त होगी ? 
क्या महेश इस आसक्ति का जवाब देगा? 
इन दोनों के इतने वर्षों बाद मिलने से महेश और माया के परिवार पर क्या असर होगा?

ऐसे ही प्रश्नों का उत्तर यह लघु-उपन्यास आपको देगा।

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