Tuesday, August 19, 2014

शादी करूंगी यमराज से - केशव पंडित

रेटिंग: 2.5/5
पृष्ठ संख्या - ३५२ 
फॉर्मेट - पेपरबैक 
प्रकाशक - धीरज पॉकेट बुक्स 
सीरीज - केशव पंडित 
उपन्यास संख्या - #११७ 

अभी धीरज पॉकेट्स बुक द्वारा प्रकाशित उपन्यास ' शादी करूंगी यमराज से ' पढ़ा। यह उपन्यास केशव पंडित सीरीज का 117 उपन्यास है। केशव पंडित पेशे से तो वकील है लेकिन वो एक पूरी तरह त्रैमेद सोल्जर भी है जो वक़्त पड़ने पर किसी भी दुश्मन के दांत खट्टे करने का हौसला रखता है । केशव पंडित ने अपने कार्य में कई लोगों को जेल की चक्की पिस्वाई है और कई लोगों को अपना दुश्मन भी बनाया है । इन्हीं दुश्मनों में से एक है नागराज सिंघ उर्फ़ यमराज। यमराज अब माफिया किंग है और बहुत ज्यादा अमीर और ताक़तवर बन चूका है । वो एक साक्षात्कार के दौरान ये बताता है कि अगर कोई भी लड़की केशव पंडित को कानून के सामने मुजरिम करार कर पाएगी तो वो उसको अपनी बीवी बना देगा। ये खबर सुनकर जेल में बैठी क्रांति जो कि केशव की जानी दुश्मन है और जिसको केशव से लड़ने पर अपने हाथ पैर गवाने पड़े थे और उसका  शरीर भी एसिड से झुलस गया था।क्या ये सब कामयाब हो पायेंगे? क्या केशव को मुजरिम करार दिया जाएगा ??क्या दिमाग का जादूगर इनसे हार जाएगा ?? जानने के लिए पढ़िए 'शादी करूंगी यमराज से '।

अब कुछ बातें उपन्यास के विषय में। अगर आप उपन्यास के नाम (जो कि काफी मजाकिया लगता है मुझे ) ज्यादा तवज्जो न दें तो आप इसे एन्जॉय कर पायेंगे। ये एक एवरेज उपन्यास है जिसे एक बार तो पढ़ा जा सकता है। उपन्यास रोचक था लेकिन एक दो बातें थी जो मुझे खली। पहले तो कई जगह नामों की हेर फेर है जैसे कभी कमिश्नर को देशपांडे बोला गया है जबकि उनका नाम है। ये तो एडिटिंग की गलतियों में आता है लेकिन इसमें कई बार ऐसा दिखाया है की केशव जो 5'11" का आदमी है 5'2" के व्यक्ति का भी भेष रच लेता है। वो चेहरा बदलने में तो माहिर है इस बात को पचाया जा सकता है लेकिन कोई भी उसकी हाइट डिफरेंस को नोटिस न करे इसे पचाना मुश्किल है। बहरहाल ऊपर की बातों को छोड़ दिया जाए तो उपन्यास पढने मुझे मज़ा आया । और केशव पंडित के बाकी उपन्यासों को भी शायद मैं पढूँ।  बस अगर उपन्यास जिस कागज पर  छपा है वो अच्छी क्वालिटी का होता तो पढ़ने का मज़ा भी ज्यादा आता। 
हाँ ,इसका लेखक कौन है इसके विषय में कोई जानकारी मुझे नहीं है क्यूंकि कवर पर लेखक का नाम केशव पंडित है ,तो जाहिर है कोई घोस्ट राइटर लगा। लेकिन जिसने भी लिखा है अच्छा लिखा है। 
अगर आपने इस उपन्यास को पढ़ा  है तो आप अपनी राय इस पर बयां कर सकते हैं। और अगर कोई ऐसा उपन्यास का नाम साझा करना चाहे तो ज़रूर करियेगा। 

41 comments:

  1. मेरी प्रथम टिप्पणी
    .
    काफी रोचक समीक्षा करते हैँ आप,धन्यवाद।

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  2. शुक्रिया, गुरप्रीत सिंह जी।

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  3. आपको नहीं लगता की इस 'केशव पंडित' के नाम से बिकने वाले उपन्यास नकली हैं. मैंने एक बार गलती से इसका नावेल पढ़ लिया था, वेड प्रकाश शर्मा के केशव पंडित के धोके में. क्या वाहियात उपन्यास है! सिर्फ ज़बानदराज़ी होती है इसमें, कोई कहानी नहीं कोई सस्पेंस नहीं.
    असली केशव पंडित वेड प्रकाश शर्मा जी का किरदार है जिसे इसने चुराया है वो भी भद्दे तरीके से. आपकी राय का इच्छुक.

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    1. जी केशव पंडित भले ही शुरआत में किरदार वेद प्रकाश शर्मा जी का था लेकिन बाद में इस किरदार को लेखक के रूप में प्रस्तुत ही इसलिए किया गया था ताकि इसकी मकबूलियत को भुनाया जा सके। इसे कई भूत लेखक (घोस्ट राइटर्स ) लिखते हैं।मैंने ये उपन्यास २०१४ में पढ़ा था और इसके बाद आजतक केशव पंडित का कोई दूसरा उपन्यास नहीं पढ़ा।
      लेकिन ऐसा नहीं है कि सारे उपन्यास बेकार ही होंगे। क्योंकि इन्हें भूत लेखक लिखते हैं तो वो इनपर ज्यादा मेहनत नहीं करते हैं। कुछ सही निकलते हैं और कुछ खराब। हाल ही मैं मैंने एक केशव पंडित का उपन्यास खरीदा था। अब देखना है वो कैसा निकलेगा।

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    2. आपके त्वरित उत्तर के लिए शुक्रिया!
      क्या आपको लगता है की वेद जी को अलग से उपन्यास निकालने की ज़रुरत होगी जबकि वो खुद एक बेस्टसेलर लेखक हैं!
      जैसा की आपने लिखा है की ये घोस्ट राईटर्स का काम हो सकता है, तो आपके विचार से क्यूँ नहीं इसपर कोई केस दर्ज़ हुआ या आपत्ति दर्ज़ कराई गयी वेद जी के तरफ से.
      मैं ये सवाल वेद जी से भी पूछना चाहता था पर अफ़सोस वो अब इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन मुझे घिन है उन प्रकशकों से जो बाज़ार में पायरेसी को जगह दे रहे हैं.

      यकीन मानिए, वेद जी के असली केशव पंडित को पढ़िए, और फिर इस नकली केशव पंडित को....ज़मीन आसमान का फर्क नज़र आएगा. असली केशव पंडित जो वेद जी का है, वो ऐसे ऐसे कारनामे करता है की आपका दिमाग चकरघिन्नी की तरह घूम जाएगा और आप 'वाह'! किये बिना रह न पायेंगे.

      आपके विचारों की प्रतीक्षा में!
      चन्दन कुमार.

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    3. जी जहाँ तक मुझे लगता है दो बातें हो सकती हैं :

      एक तो ये कि वेद जी को उनके किरदार के नाम पर नावेल बेचने के पैसे मिलते थे।ये तब मुमकिन है जब केशव पंडित किरदार के कॉपीराइट वेद जी के पास रहे हों।

      या दूसरा ये कि किरदार के ऊपर प्रकाशक का कॉपीराइट था और इसलिए वो इसका कैसे भी इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र थे।

      इसके इलावा कोई दूसरी संभावना नहीं दिखती।

      बाकी जवाब शायद कोई दे सकता है तो वो या तो धीरज पॉकेट बुक्स वाले हैं या शगुन शर्मा जी(वेद जी के बेटे )।

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    4. Fake h ye keshav pandit .
      Keshav pandit ka jalal dekhna ho to ved prakash Sharma ji ko padho

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    5. ये बात तो जगविदित है कि जो भी उपन्यास केशव पंडित के नाम से आये हैं वो भूत लेखकों ने ही लिखें हैं।

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  4. Online books padh sakte h kya keshav ji ki

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    1. जी नहीं मालती, जी। ऑनलाइन तो नहीं है। हाँ, केशव पंडित किरदार को लेकर वेद प्रकाश शर्मा जी ने जो उपन्यास लिखे थे उनमे से कुछ उपन्यास डेलीहंट नाम के एप्प पर हैं। केशव पंडित के उपन्यास अक्सर रेलवे स्टाल्स पर ही उपलब्ध रहते हैं। मैंने तो उधर से ही लिया था।

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  5. मैंने भी केशव पंडित के 50 उपन्यास पढ़े है जिसमे बहुत सारे अच्छे भी है जैसे कानून की दुकान बन जा बेटा भस्मासुर ।

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    1. वाह!!! अगर ये उपन्यास मुझे मिलते हैं तो जरूर इन्हें पढूँगा।

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  6. वेसे मैंने केशव पंडित जी के सभी नॉवेल पढ़े हैं। मुझे आपके उपन्यास बहुत अच्छे लगते हैं साथ में आशीर्वाद पंडित तथा रीमा भर्ती के भी काफी उपन्यास पढे हैं लकिन जो सस्पेन्स और थ्रिल केशव जी के नावेल से मिलता है उसकी तो बात ही कुछ और है।
    बहुत ही उम्दा लिखते हैं सर आप।

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    1. जी केशव पंडित के उपन्यास मैं नहीं लिखता। केशव पंडित वेद प्रकाश शर्मा जी का किरदार था जिसको लेकर बाद में कई लोगों ने उपन्यास लिखे हैं।

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  7. जी बिल्कुल केशव पंडित के उपन्यास मे अतिशयोक्ति के अलावा कुछ नही है जिसका आज के समयकाल परिस्थिति से कोई लेना देना नही है।

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  8. जी बिल्कुल केशव पंडित के उपन्यास मे अतिशयोक्ति के अलावा कुछ नही है जिसका आज के समयकाल परिस्थिति से कोई लेना देना नही है।

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    1. जी इन कहानियों की भी एक श्रेणी होती है।चाइना में wuxia कहा जाता है। इनमे अतिश्योक्ति ही होती है। उदाहरण के लिए कुंग फु हसल मूवी या शओलिन सॉकर या ऐसे ही चीनी मर्शिअल आर्ट की फ़िल्में। अधिकतर में अतिश्योक्ति है लेकिन देखने में मजा आता है। ऐसे ही कहानी में भी चल जाता है। मुझे व्यक्तिगत तौर पर अतिश्योक्ति से दिक्कत नहीं होती जब तक कहानी में लूपहोल न हो। कही पर ऐसा लगे कि लेखक ने बस इसलिए कोई चीज कर दी क्योंकि वो फंस गया था और उसे मेहनत नहीं करनी थी तो दिक्कत होती है।

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    2. Keshav pandit k novel kha milege
      Jaise sau sunaar ki El luhaar ki or dulhan ek rupay ki

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    3. स्नेह जी अगर यह उपन्यास रवि पॉकेट बुक्स से प्राकशित हुए थे तो आप इनके विषय में उनके फेसबुक पृष्ठ से मालूम कर सकते हैं। अगर उनके पास होंगे तो वो लोग इसे आपको डाक द्वारा भेज देंगे। यह रवि पॉकेट बुक्स का फेसबुक पृष्ठ है,आशा है आपको इस पर मदद मिलेगी।

      https://www.facebook.com/ravipocketbooks/

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    4. असली केशव पंडित के उपन्यास धीरज पॉकेट बुक तुलसी साहित्य पब्लिकेशन से प्रकाशित होते हैं पहले के उपन्यास गौरी पॉकेट बुक्स से प्रकाशित होते थे आप धीरज पॉकेट बुक और तुलसी साहित्य पब्लिकेशन से प्रकाशित होते हैं

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    5. असली केशव पंडित के उपन्यास धीरज पॉकेट बुक तुलसी साहित्य पब्लिकेशन से प्रकाशित होते हैं पहले के उपन्यास गौरी पॉकेट बुक्स से प्रकाशित होते थे आप धीरज पॉकेट बुक और तुलसी साहित्य पब्लिकेशन से प्रकाशित होते हैं

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    6. जी अब केशव पंडित तो वेद जी द्वारा रचा गया किरदार था। इस नाम से लिखता कोई और ही है। ऐसे में असली नकली का मतलब नहीं रह जाता। हो सकता है आप कहना चाह रहे हों कि इस नाम से उपन्यास लिखवाने का अधिकार केवल धीरज के पास रहा होगा। उन्होंने यह अधिकार लिए होंगे।

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  9. i read all books written by ved prakash sharma.
    my best reading is kaarigar and raambad

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    1. जी मैं इन उपन्यासों को पढ़ने की कोशिश करूँगा। रामबाण के विषय में मैंने जितना सुना है कि उसका कथानक किसी फिल्म के कथानक से प्रेरित था। बात को खैर पढ़कर ही साफ होगी। आपने यह नाम सुझाये उसके लिए शुक्रिया। ब्लॉग पर आते रहियेगा।

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  10. चाहे केशव पंडित वेद प्रकाश शर्मा का रचाया किरदार होगा पर जो मज़ा केशव पंडित के उपन्यास पड़ने में है वो मज़ा किसी ओर उपन्यास में नही जैसे बालम का चक्र्यू झटका 440 वाल्ट का बारात जाएगी पाकिस्तान (etc)

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    1. जी सही कहा आपने। मैंने एक ही उपन्यास पढ़ा है लेकिन किरदार वाकाई रोचक है।

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  11. बहुत ही शानदार

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  12. आज तक यह राज नहीं खुला कि यह नकली केशव पंडित असल में है कौन| असली नाम क्या है उसका| फोटो भी नहीं है|

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    1. जहाँ तक मुझे लगता है कई लेखकों ने इस नाम को लेकर लिखा है। ऐसा नहीं है कि एक ही व्यक्ति ने इस नाम से सारे उपन्यास लिखे हों। बाकी असलियत तो प्रकाशक ही जानते हैं और वो बताने से रहे।

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  13. Replies
    1. नहीं। मैंने तो खरीद कर पढ़ी थी। मुझे पीडीएफ के विषय में कोई जानकारी नहीं है।

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  14. ऑनलाइन उपन्यास पढ़ने का कोई तरीका बताएं या फिर डाउनलोड करने का

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    1. खरीद कर पढ़ें। मैं सारे उपन्यास खरीद कर पढ़ता हूँ।

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  15. मुझे वेद प्रकाश शर्मा शगुन शर्मा केशव पंडित आशीर्वाद पंडित के उपन्यास अच्छे लगते हैं

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    1. वेद जी के उपन्यास मुझे भी सही लगते हैं। बाकी के दो लेखको के नहीं पढ़े।

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  16. Surendra mohan pathak ko purani novels kahan milengi. Amazon pe bhi nahi hai

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    1. जी, उनके कुछ उपन्यास kindle स्टोर में ई बुक के तौर पर उपलब्ध हैं। आप उधर से उन्हें खरीद सकते हैं। बाकी कुछ के रीप्रिंट हुए थे।
      निम्न लिंक पर उनके उपन्यास मिल जायेंगे:
      https://amzn.to/2MqYjLO

      मेरी व्यक्तिगत राय यही रहेगी कि आप ई-बुक पढ़ें। अगर आपको हार्ड कॉपी ही चाहिए तो पाठक साहब के उपन्यासों के पुराने संस्करण आपको फेसबुक में मौजूद कई ग्रुप्स में ऊँचे दाम में मिल जायेंगे।

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  17. 1app बनाना चाहिए केशव पँडित जी क ऊपनियास का

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    1. जी ये तो प्रकाशक पर निर्भर करता है। वो चाहेंगे तो kindle में डाल सकते हैं।

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  18. kisi ne pawan putra abhimanyu and keshav puran,tu bandar main langoor abhimanyu ka chakra vyooh series padhi hai kya pata nahi ghost writer ne likha ya kisne but gajab ka plot hai kul 4 part hainb mujhe keshav puran nahi mil raha hai kahi bhi kisi ne padha hi to jarur reply karen

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