द ब्लू सेक्विन - आर ऑस्टिन फ्रीमैन | अनुवाद: सबा खान

संस्करण:
फॉर्मेट: ई बुक | पृष्ठ संख्या: 38 |  अनुवादिका: सबा खान
किताब लिंक: किंडल

द ब्लू सेक्विन - आर ऑस्टिन फ्रीमैन | सबा खान

कहानी:
वोल्डहर्स्ट स्टेशन पर जब एक खलासी ने साफ सफाई के उद्देश्य से प्रथम श्रेणी का कम्पार्टमेंट खोला तो उसे वहाँ एक औरत की लाश मिली। यह महिला एडिथ ग्रांट थी जिसकी लाश का मुआयना करके डॉक्टर ने बताया कि स्टेशन पर आने से कुछ ही मिनट पहले महिला की हत्या हुई थी और हत्या के लिए एक नुकीले एवं धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया था।

पुलिस ने हत्या के इल्जाम में हेरोल्ड स्टॉपफोर्ड को गिरफ्तार किया गया था। चश्मदीद गवाहों ने हेरोल्ड स्टॉपफोर्ड और मिस एडिथ ग्रांट को ट्रेन में झगड़ा करते देखा था। हेरोल्ड और एडिथ कभी प्रेमी हुआ करते थे लेकिन अब उनके बीच सम्बन्ध ठीक नहीं थे। वहीं हेरोल्ड ही ऐसा व्यक्ति था जिसने मिस एडिथ ग्रांट को आखिरी बार जिंदा देखा था। 

जब हेरोल्ड के भाई एडवर्ड स्टॉपफोर्ड, जो कि स्टॉपफोर्ड एंड मायर्स फर्म के पार्टनर थे और खुद के वकील थे, को हेरोल्ड के पक्ष में पेश करने के लिए दलील नहीं मिली तो उन्होंने थार्नडाईक से मिलने की इच्छा जताई। 

वह इस मामले को थार्नडाईक को सौंपना चाहते थे ताकि वह इस मामले की जाँच करें और सच्चाई का पता लगायें।

क्या हेरोल्ड स्टॉपफोर्ड बेगुनाह था?

क्या थार्नडाईक अपने साथी डॉक्टर जार्विस के साथ मिलकर इस मामले को सुलझा पाया?

मुख्य किरदार:
थार्नडाइक - एक फोरेंसिक साइंटिस्ट 
क्राइस्टोफर जेर्विस - थोर्नडाइक का साथी
मि एडवर्ड स्टॉपफोर्ड - एडवर्ड एंड मायर्स फर्म का पार्टनर और एक वकील 
हेरोल्ड स्टॉपफोर्ड - एडवर्ड का भाई और चित्रकार। उसे कत्ल के इल्जाम में पकड़ा था
मिस एडिथ ग्रांट - मक्तूला जो कि हेरोल्ड की पूर्वपत्नी थी 
फेल्टन - एक कसाई

मेरे विचार:
द ब्लू सेक्विन आर ऑस्टिन फ्रीमैन की इसी नाम की उपन्यासिका का हिन्दी अनुवाद है।  आर ऑस्टिन फ्रीमैन एक ब्रिटिश चिकित्सक एवं लेखक थे जो कि अपने काल्पनिक जासूस जॉन थोर्नडाइक के लिए जाने जाते हैं। जॉन थोर्नडाइक को लेकर आर ऑस्टिन फ्रीमैन ने 21 उपन्यास और चालीस कहानियाँ लिखी थीं। यह उपन्यासिका भी जॉन थोर्नडाइक को लेकर लिखी है। यह पहली बार 1906 में जॉन थोर्नडाइक्स केसेस (अमेरिका में डॉ थोर्नडाइक्स केसेस) नाम से प्रकाशित कहानी संग्रह में प्रकाशित हुई थी। 


जॉन थोर्नडाइक एक चिकित्सक है जो कि बाद में वकील बना और आखिर में दुनिया का पहला फोरेंसिक साइंटिस्ट बना।  वह अपने चिकित्सीय और कानूनी ज्ञान के लिए जाना जाता है जिसका इस्तेमाल करके कई जटिल मामलों को सुलझा लेता  है। इन मामलो में अक्सर उसका साथ क्रिस्टोफर जेर्विस देता है जो कि उसका दोस्त है। वही इन  मामलो का कथावाचक भी होता है। 


प्रस्तुत उपन्यासिका की बात करूँ तो यह दो दिन में घटित हुए घटनाओं की कहानी है। पहले दिन क़त्ल होता है और दूसरे दिन थोर्नडाइक कत्ल की तहकीकात कर मामले को निपटा देता है।  इस पूरी तहकीकात में उसका साथ डॉक्टर जेर्विस देता है। इन दोनों का समीकरण पढ़ते हुए बरबस ही शर्लाक वाटसन का चित्र आपके मन में उठ जाता है। बस फर्क यह है कि थोर्नडाइक इस कहानी में कहीं अधिक संवेदनशील और दार्शनिक नजर आता है जबकि शर्लाक को आम शिष्टाचार समझने में भी दिक्कत होती है जिस कारण वह बदतमीज लग सकता है।

द ब्लू सेक्विन की बात आगे बढ़ाये तो कहानी शुरुआत से ही पाठक की रूचि जगाने में कामयाब होती है। अपराध कैसे हुआ और थोर्नडाइक इसे कैसे सुलझाएगा यह देखने के लिए पाठक पृष्ठ पलटते चले जायेंगे।  थोर्नडाइक कुशल जासूस की तरह मामले के हर पहलु को देखता है और फिर अपने निर्णय पर पहुँचता है। कहानी की अच्छी बात यह है कि असल में हुआ क्या है यह बात आपको अंत से पहले पता नहीं पता चल पाती है। थोर्नडाइक कुछ चीजें क्यों कर रहा है यह आपको भी उतना ही हैरान करता है जितना कि उसके साथी किरदारों को करता है और उसके समझाने पर ही सारा भेद खुलता है।

कहानी के अनुवाद की बात करूँ तो यह अनुवाद सबा खान द्वारा किया गया है। वह बेहतरीन अनुवादिका हैं और इस कहानी का भी बहुत अच्छा अनुवाद किया है।  उर्दू मिश्रित हिन्दी का इस्तेमाल कर वह कहानी को अपना एक अलग टच दे देती हैं जिसकी झलक यहाँ भी देखने को मिलती है।


हाँ, कहानी का पेजसेटिंग थोड़ी गड़बड़ हो रखी है। अध्याय अलग अलग पृष्ठ पर नहीं हैं। साथ में 2 को छोड़कर सभी रोमन में लिखे गये हैं। यह छोटी छोटी बातें हैं जो कि ध्यान रखी जानी चाहिए थी। किंडल क्रिएट से फॉर्मेट कर पेज सेटिंग बेहतर बनाई जा सकती है।

किताब की कमी के खाते में केवल एक दो चीज आती है।  इस उपन्यासिका में थोर्नडाइक के विषय में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है। चूँकि यह थोर्नडाइक का पहला मामला नहीं है तो लेखक भी इस विषय में  ज्यादा बताता नहीं है। बस पाठक यही अंदाजा लगा सकता है कि थोर्नडाइक को पेचीदा कानूनी मामले सुलझाने में महारत हासिल है और इसी वजह से उसकी ख्याति है। उसका नाम भी इधर नहीं दिया गया है। केवल उपनाम ही इस रचना में शामिल किया गया है। ऐसे में अगर अगर लेखिका  उपन्यासिका की शुरुआत में  थोर्नडाइक के ऊपर एक छोटा सा लेख लिख देतीं जहाँ थोर्नडाइक के विषय में अधिक जानकारी होती तो पाठकों से थोर्नडाइक की मुलाक़ात थोड़ा और सहज हो जाती। जिन पाठकों को किरदार के विषय में नहीं पता है उन्हें गूगल करने की जहमत नहीं उठानी पड़ती।

दूसरी चीज छोटी है। कहानी का शीर्षक ब्लू सेक्विन है। सेक्विन अक्सर एक सितारा जैसी चीज होती है जो कि कपड़ों को सजाने के काम आती है। यहाँ ये नीला रंग का सितारा ही एक प्रमुख सबूत होता है। कहानी में सितारे की बात तो होती है लेकिन वह नीला है यह एक बार केवल उस कपड़े की बातचीत करते हुए बताया जाता है। असल कहानी में जहाँ दोबारा ब्लू सेक्विन लिखा है उसका अनुवाद झिलमिल सितारा किया गया है। ऐसे में जब कहानी खत्म हुई तो मेरे दिमाग में केवल एक ही प्रश्न रह गया था कि इसका नाम ब्लू सेक्विन या नीला सितारा क्यों रखा गया है। नीला शब्द किंडल पर ढूँढा तो बात समझ आई। इसे आप नुक्ताचीनी कह सकते हैं कि लेकिन अगर *झिलमिल सितारे* की जगह नीला झिलमिल सितारा होता तो बेहतर रहता।

अंत में यही कहूँगा कि अगर आप एक अच्छी जासूसी कहानी पढ़ना चाहते हैं तो इसे एक बार पढ़ सकते हैं। अगर मेरी तरह आप थोर्नडाइक से परिचित नहीं हैं तो एक नये जासूस को आप जान पायेंगे। मैं तो यह कहानी पढ़ने के बाद थोर्नडाइक के दूसरे किस्से भी जरूर पढ़ना चाहूँगा। उम्मीद है सबा जी बाकी कृतियों को भी हिन्दी में अनूदित करेंगी।

किताब लिंक: किंडल

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2 Comments
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  1. बहुत सुन्दर और रोचक समीक्षा ।

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    1. किताब पर लिखा लेख आपको पसंद आया यह जानकर अच्छा लगा। आभार।

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