हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा अप्रैल 2021 में प्रकाशित सुरेन्द्र मोहन पाठक के उपन्यास

सुरेन्द्र मोहन पाठक हिन्दी अपराध साहित्य के अज के समय के सर्वोच्च लेखकों में से एक हैं। उनके उपन्यासों का उनके पाठकों को बेसब्री से इन्तजार रहता है। 

अप्रैल माह में  पेंगुइन के हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा सुरेन्द्र मोहन पाठक का एक नवीन उपन्यास और पाँच पुराने उपन्यास पुनः मुद्रित किये गये हैं। आपको बताते चलें कि लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के कई पुराने उपन्यास आउट ऑफ़ प्रिंट चल रहे थे जिसके कारण कई पाठक इनके पुराने संस्करणों को ऊँचे दामों में खरीदने पर मजबूर थे। अब हिन्द द्वारा इन उपन्यासों को नई साज सज्जा के साथ उपलब्ध करवाने के बाद काफी पाठकों को यह उपन्यास सहज और उचित दाम में मिल सकेंगे। 


हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा अप्रैल 2021 में प्रकाशित उपन्यास निम्न हैं:

हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा हाल ही में प्रकाशित सुरेन्द्र मोहन पाठक के उपन्यास


मैं अपराधी जन्म का (विमल सीरीज #44)
मैं अपराधी जन्म का विमल श्रृंखला का नवीनतम उपन्यास है।  विमल के पिछले दो उपन्यासों (कहर, जाके बैरी सन्मुख जीवै ) को पाठकों ने काफी सराहा था और अब उनकी उम्मीद से पहले ही एक बार फिर वह विमल से मिल रहे हैं। 

विमल श्रृंखला सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल की जीवन गाथा है जिसे हालातों के चलते एक इश्तिहारी मुजरिम बनना पड़ा था। आपको बताते चलें विमल श्रृंखला सुरेन्द्र मोहन पाठक की सबसे मकबूल श्रंखला है और पाठकों द्वारा इसे भूतो न भविष्यति की संज्ञा दी गयी है। 

किताब लिंक: पेपरबैक

पुनः मुद्रित उपन्यास
हिन्द पॉकेट बुक्स  द्वारा अप्रैल में जो पुराने उपन्यास पुनः प्रकाशित किये गये हैं वह सब थ्रिलर श्रृंखला के उपन्यास है। सुरेन्द्र मोहन पाठक अपने उन उपन्यासों को जो किसी श्रृंखला का हिस्सा नहीं होते हैं को थ्रिलर श्रृंखला में रखते हैं। यह उपन्यास निम्न हैं:


आठ दिन
विकास गुप्ता ठग था। उसका कारोबार ठगी करना था जिसे वो हमेशा पूरी कामयाबी से, निहायत खूबसूरती से अंजाम देता था। कत्ल से उसका क्या वास्ता? लेकिन वो वास्ता बना और खामखाह उसके गले पड़ा जब उसने अपनी आँखों के सामने एक कत्ल होते देखा।

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बीवी का हत्यारा 
रवि वर्मा आज जेल की कोठरी में बंद था। लेकिन कभी वो एक पुलिस इंस्पेक्टर हुआ करता था।  ऐसा इंस्पेक्टर जिसकी पुलिस महकमे में एक तेज तर्रार और कर्तव्यनिष्ठ अफसर के तौर पर साख थी। उसके पास सब कुछ तो था।  दौलत जो उसे विरसे में मिली थी, एक नौकरी जिसका अपना रुतबा था और एक खूबसूरत पत्नी जिससे वो बेइन्तहा प्यार करता था।

लेकिन फिर उसकी ज़िन्दगी में एक केस आया। और इसका अंत ऐसा हुआ कि आज रवि वर्मा कोठरी में था। और उस पर अपनी पत्नी के कत्ल का इल्जाम था। 

आखिर क्यों किया था रवि ने अपनी पत्नी का कत्ल?

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एक ही रास्ता 
साहिल सरीन का भाई जेल में था । वो एक ड्रग स्मगलर था, ड्रग माफिया का कर्जाई था और कर्जा न चुका पाने की सूरत में ड्रग माफिया के जल्लादों के हाथों जेल में भी उसकी मौत निश्चित थी। अपने भाई की जान बचाने का साहिल सरीन के सामने एक ही रास्ता था कि वो अपने भाई का काला धंधा अख्तियार करता!

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एक करोड़ का जूता 
सत्तरह साल पहले दीवाली की रात को गोपाल यशवंतराय आवतरमानी ने अपना वह सफेद जूता पहन कर हवेली से बाहर कदम रखा तो फिर कभी वापिस लौट कर न आया। कोई कहता था कि क्योंकि उसने गबन किया था, इसलिए वह कहीं छुपा हुआ था तो कोई कहता था कि वह कब का मर-खप चुका था। मोती आवतारमानी गोपाल का बेटा था और जानता था कि जो जूता उसका पिता सत्रह साल पहले पहनकर निकला था वह एक बहुमूल्य जूता था। वह एक करोड़ का जूता था। सत्रह सालों बाद तक भी मोती न उस जूते को भुला पाया था और न इस बात को कि उसके पिता के कारण सभी उसे एक धोखे बाज की सन्तान समझते थे। वह अपने माथे से इस दाग को धो देना चाहता था। 

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खाली मकान 
सुनील को ग्लैमर बॉय की उपाधि देकर, उसकी असाधारण सफलता में पक्षपात का हवाला देकर इन्स्पेक्टर प्रभूदयाल ने एक केस की स्वतंत्र रूप से तहकीकात करने की मांग कर डाली । परिणामस्वरूप उसके सामने थी डबल मर्डर की एक पेचीदा, मकड़ी के जाले की तरह उलझी हुई दास्तान, जो उसके लिये स्वयं उसके सृजनकर्ता का चैलेन्ज थी ।

किताब लिंक: पेपरबैक


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