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Monday, January 25, 2021

आज का उद्धरण

कृष्णा सोबती | जैनी मेहरबान सिंह

अजीब बात है, बचपन के ख़्वाब कभी धुँधलाते नहीं। मुरझाते नहीं। सफ़र की हर मंज़िल पार करते हम बार-बार उस झुरमुट से होकर जाते हैं जहाँ से हमे पहली आवाज़ पड़ी थी। पहली पुकार सुनी थी।

कृष्णा सोबती, जैनी मेहरबान सिंह

किताब लिंक: पेपरबैक | हार्डबेक


© विकास नैनवाल 'अंजान'

2 comments:

  1. सार्थक और सुन्दर सन्देश।
    --
    गणतन्त्र दिवस की पूर्वसंध्या पर हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete

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