एक बुक जर्नल: आज का उद्धरण

Wednesday, October 14, 2020

आज का उद्धरण


आज का उद्धरण - मृदुला गर्ग


बात मैंने मज़ाक में कही थी। वह हँसा था और मैं भी हँस दी थी। कई बार मज़ाक मज़ाक में हम अनजाने कितना बड़ा सच बोल जाते हैं! पर यह मैंने बहुत बाद में सोचा था। सोचते हम हमेशा बाद में हैं। सच के अनुभव के बाद..

-मृदुला गर्ग, चितकोबरा

किताब के प्रति मेरे विस्तृत विचार आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
चितकोबरा

किताब आप निम्न लिंक से जाकर खरीद सकते हैं
पेपरबैक | हार्डबैक

2 comments:

Disclaimer:

Vikas' Book Journal is a participant in the Amazon Services LLC Associates Program, an affiliate advertising program designed to provide a means for sites to earn advertising fees by advertising and linking to Amazon.com or amazon.in.

लोकप्रिय पोस्ट्स