आज का उद्धरण


आज का उद्धरण - मृदुला गर्ग


बात मैंने मज़ाक में कही थी। वह हँसा था और मैं भी हँस दी थी। कई बार मज़ाक मज़ाक में हम अनजाने कितना बड़ा सच बोल जाते हैं! पर यह मैंने बहुत बाद में सोचा था। सोचते हम हमेशा बाद में हैं। सच के अनुभव के बाद..

-मृदुला गर्ग, चितकोबरा

किताब के प्रति मेरे विस्तृत विचार आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
चितकोबरा

किताब आप निम्न लिंक से जाकर खरीद सकते हैं
पेपरबैक | हार्डबैक

Post a Comment

2 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad