फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन की नई पेशकश


फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन की नई पेशकश
साभार: फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन

फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन ने अपने पाठकों के लिए तीन उपन्यास लेकर आ रहे हैं। उन्होंने इन उपन्यासों की घोषणा अपने फेसबुक पृष्ठ पर करी है।

इन पुस्तकों में दो उपन्यास हॉरर थ्रिलर श्रेणी के हैं वहीं एक उपन्यास एक प्रेम कहानी है जो कि बिहार और नक्सलवाद की पृष्ठभूमि में लिखी गई  है। 

फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन द्वारा लायी जाने वाली यह तीन पुस्तकें निम्न हैं:

लौट आया नरपिशाच - देवेन्द्र प्रसाद

केविन मार्टिन, जो अपनी एजेंसी का सबसे काबिल प्राइवेट डिटेक्टिव था, जिसे चौहड़पुर एक ख़ास मिशन पर भेजा गया था।मिशन था एक खतरनाक नरपिशाच की सच्चाई का पता लगाना, जो पिछले सौ सालों से चौहड़पुर के लिए आतंक का पर्याय बना हुआ था।जिसके बारे में कहा जाता था कि वह हर 24 साल के बाद क्रिसमस के बाद आता है और नए साल की शुरुआत से पहले चौहड़पुर के इकलौते चर्च के फादर का सारा खून चूसकर उसे मौत के घाट उतार देता है।24 साल पहले भी उसने फादर मार्कोनी डिकोस्टा को वीभत्स तरीके से मार डाला था और इस बार किसी और की बारी थी।क्या केविन अपने मिशन में कामयाब हुआ और चौहड़पुर को उस खूनी नरपिशाच के आतंक से मुक्त करवा पाया?

या एक बार फिर.! लौट आया नरपिशाच 

किताब लिंक: अमेज़न

आर्किड विला - संजना आनन्द

कहते हैं पुरानी, वीरान इमारतों में, कईं ऐसे राज़ दफन होते हैं, जो अतीत की कब्र से बाहर आने के लिए बेचैन रहते हैं। शायद ऑर्किड विला भी अपने अंदर ऐसे कुछ रहस्यों को समेटे हुए था। अगर ऐसा न होता, तो फिर क्यों अनिकेत को हर रात, ऑर्किड विला के बगीचे में एक खूबसूरत लड़की का साया-सा नज़र आता? मगर इससे पहले की अनिकेत उसके करीब पहुँच पाता, क्यों वह धुन्ध की चादर में कहीं खो जाती थी? आखिर क्या है ऑर्किड विला का सच? 

किताब लिंक: अमेज़न

डार्विन जस्टिस - प्रवीण कुमार 

बिहार के इतिहास को, बुद्ध और महावीर के शांति सन्देशों के अलावा, सामाजिक संरचना में डार्विन जस्टिस की थ्योरी को भी समझना था। सामाजिक संरचना में सदियों से चला आ रहा असंतुलन, संतुलित होने के नाम पर रक्तरंजित होने जा रहा था। तैयारियाँ शुरू हो गईं। लोग दूर-दराज़ से आने लगे। जिन्हें अपने खेतों से झंडे उखड़वाने थे, वे मनचाहा योगदान देने को तैयार थे। अनय और चश्मिश की कहानी, काल के किसी कार्यक्रम का हिस्सा है; किसी इंसान के बहाने इंसानियत को कंलकित करना है। उसे कार्ल माक्र्स के अंदर डार्विन के सिद्धान्त को समझाना है। उसे समझाना है कि, न्यूटन का सिद्धान्त सिर्फ भौतिक विज्ञान की किताबों में ही नहीं है, बल्कि वह सामाजिक संरचना के अंदर भी घुसा हुआ है; उसे समझाना है कि, लिंकन के जिस प्रजातंत्र का हम दम्भ भरते हैं, वहाँ भी डार्विन की थ्योरी चुपचाप अपना काम करती रहती है।

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2 Comments
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  1. 🙄
    डार्विन जस्टिस क्या नॉन फिक्शन है?
    समरी से ऐसा ही लगा।

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    1. जी नहीं सारांश में लिखा है कि यह अनय और चश्मिश की कहानी है। उपन्यास गल्प ही है बस इसकी पृष्ठ भूमि नक्सल वाद और बिहार है।

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