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Saturday, February 6, 2021

आज का उद्धरण

शरद जोशी | हिन्दी कोट्स | राग भोपाली

जिसने मसिहाई का दम भरा उसी की दुर्गत हुई। इस दौर में कोई आराम से रहा है तो सिर्फ चमचे आराम से रहे। रकाबियाँ बदल गईं, फूट गईं, टुकड़े-टुकड़े हो गईं मगर चमचा शायद हमेशा सलामत रहा। वह एक रकाबी से कूदा और दूसरी में चला गया और वहाँ चमचागिरी करने लगा।

- शरद जोशी, चमचागिरी का यह मुबारक दौर: राग भोपाली में संकलित

किताब लिंक: किंडल | हार्डकवर

6 comments:

  1. व्यंग्यकार शरद जोशी जी ने लाख रुपये की बात कही है विकास जी । नोट करके रखने लायक है । साझा करने के लिए आपका हार्दिक आभार ।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (07-02-2021) को "विश्व प्रणय सप्ताह"   (चर्चा अंक- 3970)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --
    "विश्व प्रणय सप्ताह" की   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    Replies
    1. चर्चाअंक में मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिये हार्दिक आभार, सर....

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  3. बेहतरीन अंश चुना ....
    सदा समसामयिक !!!

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