आज का उद्धरण

शिवरतन थानवी | जग दर्शन का मेला | हिन्दी कोट

शिक्षा बिना न हमें हमारे अज्ञान से मुक्ति मिल सकती है, न ज्ञान के अहंकार से मुक्ति मिल सकती है। मैं अपना उदाहरण दूँ। जब दयानन्द सरस्वती, प्रेमचंद और गांधीजी को पढ़ा तो एक मोड़ आया। देवेन्द्र सत्यार्थी और वासुदेव शरण अग्रवाल को पढ़ा तो दूसरा मोड़ आया। लेकिन राहुल सांकृत्यायन की पुस्तक 'तुम्हारा क्षय' पढ़ते ही बहुत बड़ा मोड़ आ गया। मेरी तमाम कट्टरता-संकीर्णता जाती रही। चेतना में नई खिड़कियाँ खुलने लगीं। ज्ञात होने लगा कि कितना भी जान लो, जानने को बहुत बाकी बचा रहता है। पाने के लिए बहुत कुछ पुराना छोड़ना पड़ता है।

- शिवरतन थानवी, जग दर्शन का मेला 

किताब लिंक: हार्डकवर

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