आज का उद्धरण

शंकर | चौरंगी | हिन्दी कोट्स

जीवन में उलझने न आयें, तो जीवित रहने का आनन्द ही खत्म हो जाएगा। दुःख है, दुश्चिन्ताएँ हैं, दरिद्रता और अभाव है, इसलिए तो जीवन अब तक नीरस और अर्थहीन नहीं हुआ है। 

- शंकर, चौरंगी

किताब लिंक: पेपरबैक | हार्डबैक

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