आज का उद्धरण

अनामिका | लालटेन बाज़ार | कोट


झूठ की उम्र भले ही कम हो, हाथ-पाँव बड़े लम्बे होते हैं जिनसे वो वह दूर तक पासे फेंक सकता है। अफवाहें मेंढक होती है - एक जीभ से दूसरी जीभ पर फुदकती हुई आस-पास के हर साफ-गंदे नाले में एक बार गुडुप से डुबकी ले लेने वाली।....दरअसल हर आदमी के मन में जीवन में कुछ कर नहीं पाने का जो रिसता पछतावा होता है, परनिन्दा-वृत्ति उसका ही विषैला मवाद है- जिस पर भिनभिनाने में कुंठाएँ विशेष सुख पाती हुई पलती-पुसती हैं।

- अनामिका, लालटेन बाज़ार 

किताब लिंक: पेपरबैक |  किंडल 

© विकास नैनवाल 'अंजान'

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