आज का उद्धरण

विमल मित्र quotes



व्यक्तिगत रूप से मेरी धारणा रही है कि प्रत्येक कलात्मक रचना के पीछे एक सामाँजिक नीतिबोध रहता है इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य को नैतिक शिक्षा देना ही साहित्य का धर्म है, क्योंकि ऐसा होने से तो वह या तो धर्म-पुस्तक बन जाएगी या फिर पाठ्य पुस्तक। साहित्य की जो अधिष्ठात्री देवी है वह धर्म नहीं मानती, शिक्षा भी नहीं मानती। वह केवल एक ही चीज मानती है और वह रस।

- बिमल मित्र, गवाह नम्बर तीन


किताब के विषय में मेरी राय निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
गवाह नम्बर तीन

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पेपरबैक | किंडल

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2 Comments
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  1. बहुत सुन्दर सन्देश।
    रूप-चतुर्दशी और धन्वन्तरि जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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    Replies
    1. जी आभार सर। रूप चतुर्दशी और धन्वन्तरि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ....

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