Friday, November 13, 2020

आज का उद्धरण

विमल मित्र quotes



व्यक्तिगत रूप से मेरी धारणा रही है कि प्रत्येक कलात्मक रचना के पीछे एक सामाँजिक नीतिबोध रहता है इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य को नैतिक शिक्षा देना ही साहित्य का धर्म है, क्योंकि ऐसा होने से तो वह या तो धर्म-पुस्तक बन जाएगी या फिर पाठ्य पुस्तक। साहित्य की जो अधिष्ठात्री देवी है वह धर्म नहीं मानती, शिक्षा भी नहीं मानती। वह केवल एक ही चीज मानती है और वह रस।

- बिमल मित्र, गवाह नम्बर तीन


किताब के विषय में मेरी राय निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
गवाह नम्बर तीन

किताब निम्न लिंक से मँगवाई जा सकती है
पेपरबैक | किंडल

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर सन्देश।
    रूप-चतुर्दशी और धन्वन्तरि जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी आभार सर। रूप चतुर्दशी और धन्वन्तरि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ....

      Delete

Disclaimer:

Ek Book Journal is a participant in the Amazon Services LLC Associates Program, an affiliate advertising program designed to provide a means for sites to earn advertising fees by advertising and linking to Amazon.com or amazon.in.

लोकप्रिय पोस्ट्स