Tuesday, October 27, 2020

आज का उद्धरण

मुंशी प्रेमचंद कोट्स



रत्नजटित मखमली म्यान में जैसे तेज तलवार छिपी रहती है, जल के कोमल प्रवाह में जैसे असीम शक्ति छिपी रहती है, वैसे ही रमणी का कोमल हृदय साहस और धैर्य को अपनी गोद में छिपाए रहता है। क्रोध जैसे तलवार को बाहर खींच लेता है, विज्ञान जैसे जल-शक्ति का उदघाटन कर लेता है, वैसे ही प्रेम रमणी के साहस और धैर्य को प्रदीप्त कर देता है।

- मुंशी प्रेमचंद, माँ 


माँ कहानी मानसरोवर प्रथम भाग में संकलित है। कहानी के विषय में मेरी राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
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4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (28-10-2020) को   "स्वच्छ रहे आँगन-गलियारा"    (चर्चा अंक- 3868)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    Replies
    1. जी, पोस्ट को चर्चा अंक में शामिल करने के लिए आभार।

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  2. बहुत सुंदर उद्धरण!--ब्रजेन्द्रनाथ

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