एक बुक जर्नल: फ्रेंडी

Saturday, February 15, 2020

फ्रेंडी

कॉमिक बुक 14 फरवरी 2020 को पढ़ी गयी

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट: पेपरबैक
पृष्ठ संख्या: 32
प्रकाशक: राज कॉमिक्स
श्रृंखला: फ्रेंडी #1
लेखक: हनीफ अजहर, चित्रांकन: नरेश कुमार, सम्पादक: मनीष गुप्ता

फ्रेंडी

कहानी:
विशु ने जब से नागराज नोवेल्टीज द्वारा बनाये गये फ्रेंडी नामक गुड्डे विज्ञापन देखा था तभी से वह इस गुड्डे को पाने के लिए लालायित हो गया था। चूँकि उसका जन्मदिन आ चुका था तो उसे पता था कि यह गुड्डा उसकी मम्मी उसे लाकर दे ही देंगी।

मिसेज रंजना गुहा ने जब विशु की माँग के विषय में सुना तो उन्होंने विशु को यह तोहफा उसके जन्मदिन में दे ही दिया। 

डॉल पाने के बाद विशु की ख़ुशी का ठिकाना न रहा।  अपनी बोलने वाला गुड्डा उसे इतना पसन्द कि अब यह गुड्डा हर पल उसके साथ रहने लगा।

विज्ञापन की माने तो हर फ्रेंडी गुड्डे का अलग नाम था और यह गुड्डा तीन वाक्यों को दोहराने के लिए ही प्रोग्राम किया गया था। 

परन्तु विशु का ऐसा मानना नहीं था। विशु की माने तो यह गुड्डा इनसानों की तरह व्यवहार करने में सक्षम था। वह न केवल इनसानों की तरह बोलता था बल्कि उनकी तरह अपनी मर्जी से इधर से उधर आ जा भी सकता था। विशु ने अपनी माँ को भी यह बातें बताई लेकिन उन्हें उस वक्त यह सब बालमन की कल्पनाएँ ही लगी थीं। 

लेकिन फिर विशु और मिसेज रंजना गुहा की जिंदगी में ऐसी घटनाएं घटित होने लगी कि उनको समझ नहीं आया क्या सच है और क्या कल्पना। मौत का ऐसा तांडव उनके चारों तरफ होने लगा कि उनकी समझ ने काम करना बंद कर दिया।

क्या विशु का कहना सही था? क्या फ्रेंडी नामक यह गुड्डा सचमुच इनसानों जैसी हरकतें कर सकता था?

आखिर वो कौन सी घटनाएं थी जिन्होंने मिसेज रंजना गुहा को हैरत में डाल दिया? 

विशु और उसके परिवार के जीवन में इन घटनाओं के कारण कैसी मुसीबतें आयीं? 

आखिर उन्हें इन मुसीबतों से कैसे छुटकारा मिला?


मेरे विचार:
फ्रेंडी राज कॉमिक्स की फ्रेंडी हॉरर सीरीज का पहला भाग है। मुझे कॉमिक बुक में हॉरर या परालौकिक तत्वों के इर्द गिर्द रची गयी रचनाओं को पढ़ना अच्छा लगता है। राज कॉमिक्स में ऐसी कहानियाँ या तो थ्रिल हॉरर सीरीज के अंतर्गत छपती हैं या परालौकिक तत्व(सुपरनेचुरल एलेमेंट्स) एन्थोनी के कथानकों में पढ़ने को मिल जाते हैं। यही कारण है मुझे इन सबको पढ़ना अच्छा लगता है। 

इन सबके अलावा राज कॉमिक्स ने कभी कुछ ऐसी सीरीज भी निकाली थी जिनमे हॉरर कथानक थे जैसे फ्रेंडी सीरीज, हुउउउ  सीरीज, एक्स सीरीज इत्यादि। इन सीरीज को मेरा पढ़ने का मन तो करता था लेकिन अब यह कॉमिक्स ढूँढने पर भी नहीं मिलती हैं। यह सब आउट ऑफ़ प्रिंट हैं। और जिनके पास मिलती हैं वो इन्हें रेयर कॉमिक्स की कीमत के हिसाब से बेचते हैं जो कि मेरी जेब अफ्फोर्ड नहीं कर सकती है। 

ऐसे में जब मेरे मामा के पास मुझे फ्रेंडी सीरीज मिली तो मैंने इसे लेकर पढ़ने की योजना बना ली थी। पिछले दो तीन महीनों से यह मेरे पास पड़ी है। अब इसे पढ़ना शुरू किया है।

फ्रेंडी कॉमिक्स जैसे शीर्षक से ही जाहिर है फ्रेंडी गुड्डे के विषय में है। कॉमिक की कहानी शिमला शहर में घटित होती है। कहानी शुरुआत एक बैंक रोबीरी से होती है और फिर उसके बाद कहानी सीधे शिमला में मिसेज गुहा के परिवार का रुख ले लेती है। मिसेज गुहा के परिवार में यह फ्रेंडी गुड्डा आता है और उसके आने के बाद उनके जीवन में क्या उथल पुथल मचता है यही इस कॉमिक्स का कथानक बनता है। 

कॉमिक्स रोमांचक है। कथानक चुस्त है और तेजी से घटनाक्रम होते हैं। फ्रेंडी का कहर किस किसको मौत का ग्रास बनाएगा और विशु और उसका परिवार कैसे उसके चंगुल से बच पायेगा यह देखने के लिए आप कॉमिक्स पढ़ते चले जाते हैं। चूँकि यह कहानी भागों में है तो कहानी का जहाँ अंत होता है उधर पाठक को पता रहता है कि अंत नहीं हुआ है। इससे अगला भाग पढ़ने की लालसा बढ़ ही जाती है।

कहानी के किरदारों की बात करूँ तो कॉमिक में मुख्य किरदारों के अलावा इक्के दुक्के रोचक किरदार आये थे। ऐसे ही एक किरदार विशु की दोस्त पिंकी के पिता जासूस विकास शर्मा हैं। वह एक जासूस हैं और जासूसी के हर फन में माहिर बताये जाते हैं। जब उनका कथानक में प्रवेश हुआ था त मुझे लगा था कि उनका इधर विस्तृत रोल होगा लेकिन ऐसा नहीं निकला। इससे मुझे निराशा हुई। अगर उनका रोल अधिक  होता तो मुझे अच्छा लगता क्योंकि इससे जासूसी के तत्व कॉमिक बुक में लाये जा सकते थे। वैसे उनके विषय में पढ़ते वक्त मैं यह भी सोच रहा था कि शिमला जैसे छोटे शहर में एक जासूस का भला क्या काम होगा? उन्होंने कैसे केस सोल्व किये होंगे? सच पूछिए तो मैं विकास शर्मा से जुड़ी कहानियों को भी पढ़ना चाहूँगा जिसमें वो नायक हों और केस सुलझाते दिखें। उम्मीद है आगे के भागों में उनकी उपस्थिति रहेगी।

कॉमिक्स में  इंस्पेक्टर सुनील का किरदार भी रोचक है। फ्रेंडी के बनने में काफी हद तक उसका हाथ भी था। फिर जब से केस की तफ्तीश उसने शुरू की तो वह फ्रेंडी से सीधे तौर से जुड़ चुका है। यह सम्बन्ध कब तक रहेगा और इसका सुनील पर क्या असर पड़ेगा?  यह देखना बनता है।  उम्मीद है आगे की कॉमिक्स में भी उसकी हाजरी बनी रहेगी।

कॉमिक के बाकि किरदार कहानी के हिसाब से ही थे। कॉमिक्स में विशु के पिता का जिक्र भी आता है लेकिन वह इस कॉमिक्स में नहीं दिखाई देते हैं। अगले भाग में देखना होगा कि वह कौन हैं?

कहानी का आर्ट वर्क अच्छा है। राज कॉमिक्स में जैसा आर्ट वर्क रहता है उसी हिसाब से है। हाँ, कहानी शिमला पर आधारित है तो उधर के स्थानीय कपड़े या संस्कृति या जगहों को इसमें स्थान दिया होता तो शायद बेहतर होता। अभी ऐसा नहीं है। अगर लिखा नहीं होता तो यह बताना मुश्किल है कि कथानक शिमला जैसे पहाड़ी प्रदेश में हो रहा है। बस एक जगह पहाड़ी तत्व देखने को मिलता है और वो भी बेतुका है। यहाँ मिसेज रंजना गुहा को ऐसे घर में रहते हुए दर्शाया गया है जिसकी खिड़की के बाहर खाई है। मैं पहाड़ों से आता हूँ तो जानता हूँ कि वहाँ ऐसे घर नहीं बनते हैं कि खिड़की से कोई गिरे और खाई में जाए। घर और खाई में बाकायदा काफी दूरी होती है।

कहानी वैसे तो रोचक है लेकिन मुझे लगता है कि कहानी में अगर कुछ एक दो बदलाव होते तो शायद कहानी और रोचक बन सकती थी। 

कहानी में बैंक रॉबरी वाला दृश्य पहले ही डाला गया है जिसके कारण हमे फ्रेंडी कौन है इसका पता चल ही जाता है। इससे एक तरह से कहानी की रहस्यमकता प्रभावित होती है। हाँ, उस किरदार के पास इतनी ताकत कैसे आई कि वह फ्रेंडी बन गया और इतनी ताकत के बावजूद क्यों वह बैंक डकैती में शामिल हुआ यह प्रश्न अभी भी मेरे मन में उठ रहा है? लेकिन फिर भी गुड़िया का बैंक रॉबरी से जुड़ाव का हिस्सा सुनील की तहकीकात के बाद खुलता तो बेहतर रहता।

दूसरी बात जो मुझे बदलाव के योग्य लगी कि कहानी में पाठक फ्रेंडी को सब कुछ करते देखता है। इससे पाठक को पता है विशु बेगुनाह है लेकिन बाकी किरदारों को नहीं पता। इससे भी कहानी उतनी रहस्यमय नहीं होती है। इसके बदले जब तक फ्रेंडी ने खुद को इंस्पेक्टर पर उजागर नहीं किया होता तब तक फ्रेंडी को कोई भी ऐसी हरकत करते नहीं दिखाया गया होता तो कहानी में एक रहस्य बना रहता कि विशु सच कह रहा है या अपने अपराध छुपाने के लिए झूठ कह रहा है। इस तरह से लिखने पर कहानी और रहस्यमयी हो सकती थी। हाँ, यह मुझे पता है कि यह तभी मुमकिन था कि जब कहानी को हम इंस्पेक्टर की नज़र से देखते जबकि अभी हम केवल दर्शक की नजर से देख रहे हैं।

इन दो बातों के सिवा कहानी में मुझे कहीं कुछ बुराई नहीं लगी। कहानी का अंत इस प्रकार होता है कि आप कहानी का दूसरा भाग पढ़ने के लिए लालायित हो ही उठेंगे। मैं तो हूँ और जल्द ही दूसरा भाग पढूँगा।

रेटिंग: 3/5

क्या आपने इस कॉमिक्स को पढ़ा है? अगर हाँ तो आपको यह कैसी लगी?

अब कुछ प्रश्न ब्लॉग के पाठकों के लिए:

प्रश्न 1. इस कॉमिक्स में परकाया प्रवेश का जिक्र है जिसके चलते एक किरदार अपनी आत्मा को मरने से पहले एक गुड़िया में डाल देता है। अगर आपको अपनी आत्मा को किसी एक वस्तु में डालने का मौक़ा मिले तो आप किस चीज में डालना चाहेंगे?

प्रश्न 2: गुड़िया के अंदर आत्मा होने का कांसेप्ट कई बार इस्तेमाल हो चुका है? अगर आपको कभी ऐसी कहानी लिखनी हो जिसमें एक निर्जीव वस्तु के अंदर आत्मा डलवानी पड़े तो आप कौन सी सबसे अटपटी वस्तु इस काम के लिए चुनेंगे?

अगर आप प्रश्नों के उत्तर देंगे तो मुझे अच्छा लगेगा।

राज कॉमिक्स के दूसरे कॉमिक बुक्स के प्रति मेरे विचार आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:

हॉरर की दूसरी कृतियों के प्रति मेरे विचार आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:

© विकास नैनवाल 'अंजान'

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