Friday, October 4, 2019

मौत का रहस्य - परम आनन्द

उपन्यास  सितम्बर 25 से सितम्बर 30 सितम्बर के बीच पढ़ा गया

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट : पेपरबैक
पृष्ठ संख्या: 144
प्रकाशन: विश्व बुक्स
आईएसबीएन: 9789350652343
मूल्य: 110 रूपये



मौत का रहस्य - परम आनन्द


पहला वाक्य:
जुलाई का महीना था।

कहानी:
अपने बॉस भानु प्रताप ठीकरी के कहने पर जब राजन यादवपुर के एयरपोर्ट पर मृदुला ठीकरी को लेने गया तो वो केवल बॉस का हुक्म बजा रहा था। मृदुला को पहली मर्तबा देखने पर वह उसे एक सीधी साधी लड़की ही लगी थी। लेकिन फिर कुछ वक्त बाद जब वह मृदुला से मिला तो उसने जाना कि मृदुला जो उस वक्त दिखी थी वो थी नहीं। वह एक तेज तर्रार खाई पीयी लड़की थी।

राजन और मृदुला के बीच नज़दीकियाँ बढ़ने लगी और उन्होंने एक महीने अलकापुरी नाम की जगह में जाकर मौज मस्ती करने का फैसला किया। यह निर्धारित हुआ कि मृदुला पहले अलकापुरी पहुँच कर सब बंदोबस्त कर देगी और राजन बाद में पहुँचेगा। इससे श्री ठीकरी को की नज़रों से यह बात भी छुप सकेगी और दोनों अपने दिल के अरमान भी पूरे कर लेंगे। 

लेकिन जब राजन अलकापुरी पहुँचा तो उसने पाया कि किसी ने मृदुला की हत्या कर दी थी। इस बात ने उसके होश फाख्ता कर दिए कि मृत्यु के वक्त मृदुला दो माह के गर्भ से थी। 

राजन यह तो जानता था कि उसके और मृदुला के बीच संबंध ऐसे नहीं हुए थे कि बच्चा उसका हो। और वह यह भी  जानता था कि अगर तहकीकात हुई तो उसका फँसना तय है। 

आखिर किसने किया था मृदुला का कत्ल? आखिर मृदुला किसके बच्चे की माँ बनने वाली थी?क्या उसके कत्ल के पीछे यही कारण था या उसका कत्ल किसी और कारण से हुआ था?

इन्ही प्रश्नों का उत्तर राजन को तलाश करना था। श्री ठीकरी ने राजन को यह जिम्मेदारी दी थी। और अपनी जान को साँसत से बचाने के लिए भी यह जरूरी है। 

क्या राजन रहस्यों से पर्दा उठा पाया? इसके लिए उसे किन मुश्किलातों का सामना करना पड़ा?

यह तो आपको उपन्यास पढ़ने के बाद ही पता चलेगा।


मुख्य किरदार:
राजन - लोकवाणी के यादवपुर कार्यालय का प्रभंदक 
भानु प्रताप ठीकरी - लोकवाणी के मालिक 
रीटा - कार्यालय में राजन की सेक्रेटरी 
मृदुला ठीकरी - श्री ठीकरी की बेटी 
करमाकर - वो पुलिस वाला जो मृदुला की मौत की तहकीकात कर रहा था
अर्जुन देव - सब इंस्पेक्टर जो कि करमाकर का मातहत था
विमला ठीकरी - श्री ठीकरी की तीसरी पत्नी
इकबाल - एक पत्रकार जिसकी मृदुला से पहचान थी
देवराज - एक अपराधी जो मृदुला का आशिक था
बलराम अटवाल - एक आपराधिक चरित्र
अनीता अटवाल - मृदुला की दोस्त
कालू - बलराम अटवाल का आदमी
जीवन - बलराम अटवाल का आदमी
गोविन्द - बलराम अटवाल का आदमी
कमल - एक प्राइवेट जासूस जिसे राजन ने रखा हुआ था 

मेरे विचार:
मौत का रहस्य से पहली बार मैं अमेज़न के माध्यम से वाकिफ हुआ था। मैं अक्सर उधर हिन्दी में अपराध साहित्य की कृतियाँ ढूँढता रहता हूँ और इसी सिलसिले में मैं विश्व बुक्स द्वारा प्रकाशित इस उपन्यास तक पहुँचा। किताब का शीर्षक देखकर मैं यह तो तय था कि यह अपराध साहित्य से जुड़ा उपन्यास है। लेकिन उस वक्त मैं परम आनंद नाम लेखक से परिचित नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे यह कोई छद्दम नाम है। खैर, उपन्यास के प्रति रूचि तो थी ही और इस कारण जब पिछले साल पुस्तक मेला जाना हुआ तो मैंने यह उपन्यास खरीद लिया।

उपन्यास की बात करूँ तो उपन्यास एक मर्डर मिस्ट्री है। उपन्यास दो काल्पनिक शहरों यादवपुर और अलकापुरी में घटित होता है। मकतूला की मृत्यु से राजन की जान साँसत में फँस जाती है। उसे मालूम है कि उसकी हालत ऐसी है कि अगर उसके विषय में पुलिस को पता चले तो वह उसे ही कातिल करार देंगे। वहीं मकतूला के पिता और उसके बॉस श्री ठीकरी का दबाव भी उसके ऊपर बना हुआ है। वो जानता है कि अगर उन्हें उसके और मृदुला के विषय में पता चला तो उसके लिए आगे रोजगार के सिलसिले समाप्त हो जायेंगे। श्री ठीकरी उसे बर्बाद करके रहेंगे। उसके आगे कुआँ और पीछे खाई है। इसलिए उसका कातिल का पता लगाना बहुत जरूरी हो गया है।

कातिल का पता लगाने की कोशिश करते हुए वह ऐसी परिस्थितियों में फंसता जाता है जो कि उसे अपराध की दुनिया में और गहरा उतारती जाती हैं।

ऐसा कैसा होता है? वह किन अपराधिक ग्तिविधियों में फँसता है? वह इन परिस्थितियों से कैसे निकलता है?

यह प्रश्न ही पाठकों को उपन्यास पढ़ते हुए जाने के लिए विवश कर देते हैं।

वहीं राजन की तहकीकात के साथ साथ पुलिस की तहकीकात भी चलती है। क्या पुलिस राजन तक पहुँच पायेगी? अगर पुलिस राजन तक पहुंचेगी तो वह खुद को कैसे बचाएगा? यह भी ऐसे प्रश्न हैं जो उपन्यास पढ़ते हुए पाठक के मन में आयेंगे और वह इनका उत्तर जानने के लिए उपन्यास के पन्ने पलटते जायेगा।

उपन्यास का कथानक तेज रफ्तार हैं। उपन्यास में घटनाएं ऐसी होती रहतीं हैं जो पाठकों को बाँध कर रखती हैं। उपन्यास 144 पृष्ठों का है तो कहीं से भी ज्यादा खिंचा हुआ नहीं लगता है। घटनाएं तेजी से घटित होती रहती हैं तो टेंशन बनी रहती है।

उपन्यास का प्रकाशन स्तरीय है। पृष्ठों की क्वालिटी बेहतरीन हैं। अगर कमी की बात करूँ तो बस यह कि उपन्यास में श्री ठीकरी का नाम पहले भानु प्रताप लिखा गया था जो आगे चलकर बदल जाता है।

इसके अलावा तो मुझे किताब में कोई कमी नहीं दिखी। यह एक अच्छी रहस्यकथा है जो पाठक का अंत तक मनोरंजन करती है। मेरा इसने भरपूर मनोरंजन किया और आशा करता हूँ आपका भी यह मनोरंजन करेगा।

रेटिंग: 3/5

अगर आपने इस उपन्यास को पढ़ा है तो आपको यह कैसा लगा? अपने विचारों से मुझे जरूर अवगत करवाईएगा?

अगर आपने इस उपन्यास को नहीं पढ़ा है और पढ़ने के इच्छुक हैं तो आप इसे निम्न लिंक पर जाकर मँगवा सकते हैं:
पेपरबैक
किंडल 


© विकास नैनवाल 'अंजान'

4 comments:

  1. Not original novel. Word to word translation of a James Hedley Chase novel.

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    1. Which novel is it copied from? Could you please mention the name too? I have lots of James Hadley Chase novels. I would read it and would add it's name here.

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  2. आपकी समीक्षा पढ़कर यह नॉवेल पढ़ने की उत्सुकता जाग गई है| वैसे अमेज़न पर विश्व बुक्स की बुक्स मिल तो जाती है पर उनकी शिपिंग चार्ज अधिक होता है इस वजह से विश्व बुक्स की बहुत सी बुक्स विश लिस्ट में होते हुये भी नही ले पाया|

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    1. राकेश भाई मैंने भी इसीलिए नहीं मँगवाई थी। फिर पुस्तक मेले में जाकर खरीदी थी। हो सके तो जनवरी के पुस्तक मेले में आइये। उधर ही खरीदना।

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