जंगल का रहस्य - एस सी बेदी

रेटिंग : 3/5
ये लघु उपन्यास 9 अगस्त 2018 को पढ़ा गया 

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट : पेपरबैक 
पृष्ठ संख्या : 40
प्रकाशक : राजा पॉकेट बुक्स 


पहला वाक्य:
कॉफ़ी पीते हुए इकबाल की नज़र कोने वाले मेज की तरफ उठ गई।

डॉक्टर हारबर ग्राहम एक मशहूर वैज्ञानिक थे जो भारतीय औषधियों के ऊपर अनुसंधान कर रहे थे। जब उनकी किसी ने हत्या कर दी तो पूरा चंदन नगर हैरत में आ गया। भला एक वैज्ञानिक को कौन मार सकता था? लेकिन उनकी ह्त्या तो मानो आने वाली हत्याओं की शुरुआत थी।

जब क़ानून को धता बताकर एक के बाद एक पचास लोगों की हत्याएँ हो गई तो ये सभी के लिए चिंता और रहस्य का विषय बन गया। एक तरफ क़ानून खुद को असहाय महसूस कर रहा था और दूसरी तरफ शहर के लोग डरे हुए थे। जाने कब किसी की ह्त्या हो जाये, कुछ भी कहना मुहाल था। 

और अचरच की बात ये थी कि ऐसी  हत्याएँ भारत में ही नहीं हो रही थी। कुछ समय पहले यूरोप में भी ऐसी हत्याएँ हो चुकी थी और उधर  कातिल आजतक पकड़ा नहीं गया था।

आखिर एक ही तरीके से ये हत्याएँ क्यों की जा रही थीं?

आखिर कौन था इन हत्याओं के पीछे?

क्या यूरोप में हुई हत्याओं और भारत में हो रही घटनाओं का कुछ सम्बन्ध था? तो वो कौन सा तार था जो इन्हें जोड़ता था?

ऐसे खूनी खेल से चंदननगर में खौफ का माहौल बनना लाजमी ही था। और यही कारण था राजन-इकबाल ने अपने आप को इन गुत्थियों से उलझता पाया। 

क्या वो इस गुत्थी को सुलझा सके ? 

उन्हें इसके लिए किन किन मुसीबतों का सामना करना पड़ा?

ये सब आप इस लघु उपन्यास को पढ़कर जान पाएंगे।
मुख्य किरदार:
राजन - बाल सीक्रेट एजेंट 
इकबाल - बाल सीक्रेट एजेंट 
सलमा - एक सीक्रेट एजेंट जो राजन इकबाल के साथ मिलकर काम करती है और इकबाल जिसे चाहता है 
शोभा - एक सीक्रेट एजेंट जो राजन इकबाल के साथ काम करती है और राजन से प्यार करती है 
डॉक्टर हारबर ग्राहम - एक वैज्ञानिक जो भारतीय जड़ी बूटियों पर अनुसन्धान कर रहे थे
डेनी ग्राहम - डॉक्टर हारबर ग्राहम की बेटी 
लेविस ग्राहम - डॉक्टर हारबर ग्राहम का भाई 
डॉक्टर लौरी - हारबर ग्राहम का सहकर्मी जो उनसे अलग हो गया था 
टेफी माइकल - एक रहस्यमय लड़की को लौरी के साथ इकबाल को दिखी थी 
सेफन एडबर्ग - एक विदेशी जो डाक बंगले में ठहरा था 
दिनेश खेर - एक व्यक्ति जिसके विषय में राजन को लगता था कि वो खतरनाक है 
मियाँ नफीस खान ठेकेदार, करोड़पति - एक मूर्ख करोड़पति जो इक़बाल के दोस्त भी थे 
हेनर और जॉन स्मिथ - दो व्यक्ति जिनकी लाश पुलिस को मिली थी और जो होम सेक्रेटरी के साथ देखे गये थे। उसके पश्चात ही सेक्रेटरी का अपहरण हो गया था 
मीरा रेनी - जॉन स्मिथ की पर्सनल सेक्रेटरी जिससे वो शादी करने वाला था 
इंस्पेक्टर महेश कपूर - एक पुलिस इंस्पेक्टर 
मिस्टर डंकन - एक शिकारी जिसे जंगल में मौजूद जड़ी बूटियों के विषय में जानकारी थी। और ऐसे लोग जो जंगल में मौजूद जड़ी बूटियों में रूचि रखते थे, उनकी मदद डंकन गाइड के रूप में करता था।

जंगल का रहस्य एस सी बेदी जी का लघु उपन्यास है। यहाँ ये बताना जरूरी है कि ये एक बड़ी कहानी का पहला भाग है। कहानी इस लघु उपन्यास में शुरू तो होती है लेकिन खत्म 'रहस्य खुल गया' (उपन्यास में तो लिखा था कि रहस्य खुल गया इसका दूसरा भाग है लेकिन असल में ऐसा नहीं है। रहस्य खुल गया जहाज का रहस्य का दूसरा भाग है) है। खुशकिस्मती से मैंने बाल सीक्रेट एजेंट का पूरा सेट खरीदा था तो मुझे दूसरा उपन्यास भी मिल गया था। लेकिन मुझे लगता है कि एस सी बेदी जी के उपन्यासों में एक दिक्कत यही होती है। उपन्यास के शुरुआत में ही नहीं  बताया जाता कि उपन्यास एकल है या कथानक अगले उपन्यास में पूरा होता है। ये तो मैंने पन्ने पलटते हुए आखिरी पृष्ठ खोला तो मुझे पता लगा। फिर किताब मैंने किनारे रख दी थी। क्योंकि मुझे पता नहीं था कि मेरे पास दूसरा हिस्सा है या नहीं। और मैं आधी कहानी नही  पढ़ना चाहता था। फिर मैं राज कॉमिक्स की साईट पर गया और मैंने बाल सीक्रेट एजेंट वाला सेट देखा जो मैंने खरीदा था और जिसमें उन उपन्यासों के नाम थे जो उसमें दिये गये थे। उसमें उपन्यासों के नाम देखे तो मुझे रहस्य खुल गया भी दिख गया और मैंने राहत की साँस ली। अब मैं आराम से इसे पढ़ सकता था। और फिर मैंने उपन्यास पढ़ना दोबारा चालू किया। ऐसे में जो उपन्यास दिन में 
खत्म हो सकता था वो रात तक चला। खैर, यही ज़िन्दगी है। अब आते हैं उपन्यास के ऊपर। 

जंगल का रहस्य के पठनीय और रहस्यमय बाल उपन्यास है। इसमें वो सभी तत्व हैं जिसके लिए राजन इकबाल श्रृंखला जानी जाती है। इकबाल की झख है, उसकी हंसी दिलाने वाले मजाक है,सलमा इकबाल की मीठी तकरार है और राजन का संजीदा अंदाज है। हाँ, इस कहानी में राजन कम दिखता है। ज्यादा काम इकबाल करता है और राजन खाली निर्देश देता है। लेकिन चूंकि इक़बाल ज्यादा मौजूद है तो मजाक भी ज्यादा होता है, हँसी भी ज्यादा आती है। और पाठक के रूप में मुझे ज्यादा हँसने से कभी कोई गुरेज नहीं रहा।

अगर उपन्यास की कहानी की बात करूँ तो इस बार घटनाक्रम के शुरुआत से नहीं अपितु घटनाक्रम के मध्य में पाठक कहानी में दाखिल होता है। हमे क़त्ल की शुरुआत कैसी हुई ये पता नहीं रहता। पाठक तब कहानी में दाखिल होता है जब इकबाल किसी की निगरानी कर रहा होता है। ये निगरानी क्यों हो रही है और मामला क्या है? ये बात पाठक को शुरुआत में नही पता होती है। इससे एक रहस्य सा बन जाता है और पाठक जानने को उत्सुक हो जाता है कि बात क्या है? जैसे जैसे पन्ने पलटते जाते हैं बात पाठक के सामने खुलती जाती है। पाठक को पता चलता है कि राजन इक़बाल किस केस के पीछे हैं। ये सब घटनाएं रोमांचक होती हैं। इकबाल पर हमला होता है। इकबाल और सलमा को भेस बदल कर कही जाना पड़ता है। कत्ल होते हैं। और पाठक के रूप में आप चकरा जाते हैं कि क्या हो रहा है। यही हाल उपन्यास में इकबाल का भी है। केवल राजन को कोई आईडिया है कि चल क्या रहा है। और आप भी इक़बाल के साथ साथ उस पर निर्भर हो जाते हो।

"तुम्हारा बस चले तो मुझे आग की भट्टी में झोंक दो। मैं जिंदा वापस आ गया हूँ - यह देखकर तुम्हें तो बहुत दुःख हो रहा होगा? केस के बारे में कुछ बताते नहीं हो और झोंक देते हो आग की भट्टी में।"
(पृष्ठ 19 इकबाल के द्वारा राजन को बोला गया)

वैसे तो इस बात से ये भी सम्भावना होती है कि पाठक थोड़ा चिढ जाए। मेरे साथ भी ऐसा होता है। अगर कोई उपन्यास ऐसा हो जिसमें मुझे पता न चल रहा हो कि चल क्या रहा है। किरदार जो कर रहे हैं वो क्यों कर रहे? तो एक तरह की झल्लाहट मन में उपज ही जाती है। लेकिन इधर ऐसा कम होता है क्योंकि उपन्यास का कलेवर काफी कम है। उपन्यास चालीस पृष्ठों में सिमटा है तो पाठक को बात जानने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता। और दूसरा जब एक बार पता चल जाता है कि कहानी अगले भाग में खत्म हो गई तो आप निश्चिन्त भी हो जाते हैं। आपको पता हो जाता है कि इधर ज्यादा कुछ पता नहीं चलेगा। हमारे हीरो हाथ पैर ही मारेंगे और अगले भाग में ही कुछ कर दिखाएँगे। ये भाग रोमांच के सहारे ही  बढेगा। और यही होता भी है। उपन्यास में ऐसी घटनाएं घटती है जो रोमांच बरकरार रखती हैं और पाठक का मनोरंजन करती हैं।

उपन्यास अंत में काफी प्रश्न पाठक के सामने छोड़ देता है। ये प्रश्न पाठक को अगला भाग पढने के लिए विवश करेंगे। 

उपन्यास में लेखक ने पुलिस के रवैये पर भी टिपण्णी की है। आम आदमी इस रवैये से वाकिफ ही रहता है। और लेखक का इक़बाल द्वारा ये बताना मुझे अच्छा लगा। 

इकबाल सोच रहा था - सिफारिश का कितना महत्व है। इंस्पेक्टर ने उसे कितनी इज्जत के साथ छोड़ दिया था। अगर कोई साधारण व्यक्ति होता तो पुलिस मार-मारकर अब तक उसकी हड्डियाँ तोड़ चुकी होती।
(पृष्ठ 35 )

उपन्यास में वैसे तो कोई कमी नहीं है। लेकिन दो एक बात मुझे खटकी थी तो उनके विषय में जरूर लिखना चाहूँगा। पहले तो उपन्यास का शीर्षक जंगल का रहस्य ही मेरे समझ से परे है। उपन्यास में जड़ी बूटियों का जिक्र तो है लेकिन जंगल अंत तक नहीं आता है। आखिरी पृष्ठ पर कुछ एक दो लाइन जरूर हैं लेकिन वो खानापूर्ति ही लगती हैं। अगर वो लाइन नहीं होती तो भी कहानी में फर्क नहीं पड़ता। मुझे लगता है अंत में जंगल का जिक्र केवल शीर्षक का औचित्य साबित करने के लिए किया गया है। उपन्यास का शीर्षक कुछ और हो सकता था। क्योंकि इसका कथानक शहर में हो रहे कत्लों से जुड़ा है तो उसी को लेकर कुछ होता तो शायद ज्यादा अच्छा रहता।

दूसरा, उपन्यास का आवरण चित्र भी भ्रमित करता है। चित्र देखने से लगता है जैसे कि उपन्यास में इनसानी बलि से जुड़ा कुछ होगा। एक तांत्रिक जैसा आदमी जिसके हाथ में रक्त रंजित तलवार है और उसने वो तलवार किसी की गर्दन धड़ से अलग करने के लिए उठा रखी है। एक महिला है तो ढोल बजा रही है और दूसरी महिला एक पत्थर के स्लेब के ऊपर खुद को समर्पित करती हुई लेटी है। इन चित्रों को आप देखे तो मन कोई और ही कहानी उभरती है। जबकि उपन्यास की कहानी का इससे कोई लेना देना नहीं है। अगले भाग में कुछ हो तो वो जुदा बात है लेकिन ये आवरण इस कथानक से मेल नहीं खाता है।

तीसरी बात जो मुझे अजीब लगी वो यह थी कि उपन्यास में एक बार डेनी पर हमला होता है। राजन ने इक़बाल को बताया भी होता है कि डेनी की जान खतरे में है। लेकिन फिर भी वो लापरवाही दिखाता है। एक सीक्रेट एजेंट से ऐसी उम्मीद नहीं रहती। कोई भी सामान्य अक्ल का आदमी होगा तो एक बार हमले से बचाने के बाद उस व्यक्ति को निगरानी में तो रखेगा ही। लेकिन इकबाल ऐसा नहीं करता है। ये देखकर मुझे हैरानी हुई। और इस बाबत राजन भी उसे कुछ नहीं बोलता है। ये बात कुछ हजम नहीं हुई।

चौथी बात, जो मुझे अभी खटकी लेकिन हो सकता है अगले भाग को पढ़कर मामला साफ़ हो जाए, वो ये थी कि राजन को इस कथानक में सब कुछ पता रहता है। कौन सा व्यक्ति खतरनाक है, कौन कहाँ ठहरा है, इकबाल को किधर भेजना है? न इकबाल को पता रहता कि राजन ये सब कैसे जानता है और न पाठक को ही कुछ आईडिया हो पाता है। अगर पाठक को ये जानकारी देते तो शायद ठीक रहता। उम्मीद है अगले भाग में ये बात साफ होंगी कि राजन इतना सब कैसे जानता था। 

उपन्यास कई सवालों को पाठक के सामने रखकर खत्म होता है। अब दूसरा भाग पढ़ने की इच्छा मेरे मन  में उठ रही है। वो जल्द ही पढूँगा। इस भाग के लिए तो यही कहूँगा कि ये भाग पठनीय और रोमांचक है। कॉमेडी के लिए इकबाल के साथ साथ नफीस भी है और दोनों का होना हँसी ला देता है। दोनों के सीन जबर्दस्त हैं।  बस शोभा उपन्यास में बहुत कम आती है। उम्मीद है अगले में ज्यादा दिखेगी। उपन्यास ने मेरा मनोरंजन किया और मुझे उम्मीद है आपका भी करेगा।

अगर आपने इसे पढ़ा है तो अपनी राय से मुझे जरूर अवगत करवाईयेगा।



ये उपन्यास राज कॉमिक्स के बाल सीक्रेट एजेंट सेट में मौजूद है। अगर आप इसे पढ़ना चाहते हैं तो निम्न लिंक से इसे मँगवा सकते हैं:


अगर आपको पता है कि जंगल का रहस्य का दूसरा भाग क्या है तो कृपया कमेन्ट के माध्यम से इसका उत्तर दीजियेगा। मैं इस कहानी को पूरा पढ़ना चाहूँगा। 


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