गीतांजलि श्री के उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज़ की लॉन्गलिस्ट में शामिल; बना इस सूची में शामिल होने वाला पहला हिंदी से अनूदित उपन्यास


गीतांजलि श्री के उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज़ की लॉन्गलिस्ट में शामिल
गीतांजलि श्री और डैजी रॉकवेल

मशहूर लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास 'रेत समाधि' का अंग्रेजी अनुवाद टूम ऑफ स्टैन्ड (Tomb of Sand) अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2022 (International Booker Prize 2022)  की लॉन्ग लिस्ट में शामिल हुआ है। बताते चलें यह पहली बार है कि हिंदी से अनूदित किसी उपन्यास को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार (International Booker Prize) की दीर्घ सूची में शामिल किया गया है। 

2018 में प्रकाशित गीतांजलि श्री का उपन्यास 'रेत समाधि' उनका पाँचवा उपन्यास जिसके केंद्र में एक अस्सी वर्षीय विधवा है जो अपने पति के गुजरने के बाद आए अवसाद से न केवल उभरती है बल्कि अपने इतिहास से जुड़े कई अनसुलझे पहलुओ का आमना-सामना कर अपने जीवन का पुनर्वालोकन करती है।  उपन्यास का अनुवाद डेजी रॉकवेल द्वारा किया गया है। 

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उपन्यास के विषय में बात करते हुए पुरस्कार चयन समिति के सदस्यों ने कहा, गीतांजलि श्री के कल्पनाचतुर और ऊर्जावान टूम ऑफ सैंड के लगातार बदलते कालखंड और दृष्टिकोण हमें एक अस्सी वर्षीय महिला के जीवन के हर एक कोने और चकित कर देने वाले इतिहास तक पहुँचाते है। वहीं डेजी रॉकवेल का सजीव अनुवाद लेखिका के चुस्त लेखन और शब्दों की बाजिगिरी के साथ पूरी तरह न्याय करता है। 

लेखिका गीतांजलि श्री दिल्ली में रहती हैं। उनके अब तक पाँच उपन्यास ('माई', 'हमारा शहर उस बरस', 'तिरोहित', 'खाली जगह', 'रेत-समाधि' ) और चार कहानी संग्रह ('अनुगूँज', 'वैराग्य', 'प्रतिनिधि कहानियाँ','मार्च माँ और साकुरा', 'यहाँ हाथी रहते थे') प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी कृतियाँ इंग्लिश, फ्रेंच, जर्मन, कोरियाई और सर्बियन भाषा में अनूदित हो चुकी है। 

डेजी रॉकवेल पैंटर, लेखिका और अनुवादिका हैं। वह वरमॉन्ट यूएसए में रहती हैं। उन्होंने हिंदी और उर्दू के कई क्लासिक कृतियों जैसे उपेन्द्रनाथ अश्क की गिरती दीवारें, भीष्म साहनी की तमस और खाजीदा मस्तूर की आँगन इत्यादि का अनुवाद किया है। अपने अनुवादों  के लिए वह कई पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। 

ज्ञात हो अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार (International Booker Prize) अंग्रेजी में अनूदित पुस्तकों के लिए हर वर्ष दिया जाता है। पुरस्कार का मकसद अंग्रेजी में अनूदित हुए उच्चस्तरीय साहित्य को सम्मानित करके उत्कृष्ट रचनाओं के अनुवाद को प्रोत्साहित करना और अनुवादक के महत्व को पहचान देना है। वहीं लेखक और अनुवादक के महत्व को बराबर मानकर 50000 पौंड (लगभग 50 लाख) की पुरस्कार राशि को लेखक और अनुवादक के बीच बराबार भागों में बाँट दिया जाता है। 


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2 Comments
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  1. वाह!....... गीतांजलि श्री जी को बधाई.....
    .. बढ़िया पोस्ट.... विकास भाई।...... 👍👍👍👍👍👍👍👍

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    1. पोस्ट आपको पसंद आई जानकर अच्छा लगा... आभार...

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