साहित्य विमर्श प्रकाशन की नवीन पुस्तकों का प्री ऑर्डर हुआ शुरू

साहित्य विमर्श की नवीन पुस्तकों का प्री ऑर्डर हुआ शुरू

साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा अपनी आने वाली पुस्तकों पर प्री ऑर्डर शुरू किया जा चुका है। इस बार साहित्य विमर्श ने चार नवीन पुस्तकों पर प्री ऑर्डर शुरू किया है।  इस चार पुस्तकों में से दो पुस्तके प्रेम कहानियाँ हैं वहीं बाकी दो पुस्तकें अपराध कथाएँ हैं। 


साहित्य विमर्श द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकें निम्न हैं:


तुम तक 

तुम तक हेमा बिष्ट का उपन्यास है। 140 पृष्ठों की यह पुस्तक हर्षा और पलाश की प्रेम कहानी है। उनके अपने प्रेम को पाने की कहानी है। आप इस पुस्तक को साहित्य विमर्श प्रकाशन की वेबसाईट या अमेज़न से कम कीमत में प्री ऑर्डर कर सकते हैं।

किताब परिचय

प्रेम के जादू और इश्क़ के रुतबे से कोई अभागा ही अनजान होगा। जब प्यार किसी से होता है तो प्रेमी ना अपनी पात्रता देखता है और ना प्रेम की अलभ्यता की तरफ़ उसका ध्यान जाता है। 

हर्षा एक साधारण, मितभाषी और पढ़ाकू लड़की जिसे ख़ूबसूरत, चंचल और बातूनी पलाश अपने जादू में क़ैद कर लेता है। हर्षा जानती है कि वो पलाश को कभी हासिल नहीं कर सकेगी, लेकिन जब तक पलाश को प्यार करने का अधिकार किसी और के पास ऑफ़िशियली नहीं है, तो हर्षा क्यूँ ना ये इस एकतरफ़ा प्यार को जी ले? पलाश भी सोचता है कि प्यार करने में प्यार जताने की शर्त थोड़ी ना जुड़ी होती है। कहाँ वो और कहाँ उसका प्यार? कोई मेल ही नहीं। जातियाँ अलग, आर्थिक हालात अलग। जहाँ रहना नहीं मुमकिन उस गली में क्या झाँकना। अपना प्यार अपने दिल में दबाए पलाश और हर्षा अलग हो गए। 

क्या उनके दिल की हूक वो दोनों एक दूसरे से छिपा जाएँगे? 

प्रेम क्या प्रेमियों से हार जाएगा? इश्क़ कभी आशिक़ों का रुतबा ख़ुद से ऊँचा उठने देगा?

एम आर पी: 149/-

प्री ऑर्डर कीमत 

साहित्य विमर्श:  99/- + डिलीवरी चार्ज | अमेज़न: 109 रुपये + डिलीवरी चार्ज

पुस्तक लिंक: साहित्य विमर्श लिंक | अमेज़न लिंक


संभल ए दिल 

संभल ए दिल भी लेखिका हेमा बिष्ट की पुस्तक है। आज के वक्त में व्यक्ति दो जिंदगी जी रहा है। एक असल जिंदगी और दूसरी ऑनलाइन जिंदगी। संभल ए दिल भी इन्हीं दो ज़िंदगियों के बीच में पिसते प्रेम की कहानी है। 150 पृष्ठ की यह पुस्तक साहित्य विमर्श और अमेज़न से प्री ऑर्डर के लिए उपलब्ध है। 

किताब परिचय

बुरी शादियाँ धोख़े के एक झटके से बिखर जाती हैं और अच्छी शादियाँ? वैसे शादी के कुछ साल बाद कौन सी शादी अच्छी रह जाती है? 

समीर की शादी भी अब छः साल पुरानी हो गयी है और वो एक बेटी का पिता भी बन गया है। अच्छी पत्नी है, अच्छी बेटी है, अच्छी नौकरी है, अच्छी आमदनी है। कुल मिलाकर ये कि सब कुछ अच्छा ही अच्छा है। कितनी बोरिंग सी ज़िंदगी है समीर की। 

उसकी इस बोरिंग सी ज़िंदगी में ख़ुशनुमा रंगों की सम्भावना लेकर आती है मधु। 

फिर आती है वो रात, जिस रात समीर और उसकी पत्नी सुधा के बीच आ जाती है मधु। सुधा एक मॉडर्न लड़की है। पति को परमेश्वर और शादी को सब कुछ मानने वाली लड़की नहीं है वो। आत्म-सम्मान और गरिमा से दीप्त है सुधा। उस रात समीर के धोख़े ने सुधा का दिल छलनी कर दिया। सुधा अबला नहीं बल्कि समर्थ नारी है। सुधा को जो चाहिए वो हासिल करने के लिए साम, दाम, दण्ड और भेद सबका इस्तेमाल करना उसे आता है। सुधा को क्या चाहिए? समीर या समीर से बदला? शादी या तलाक़? मधु के साथ क्या करेगी सुधा?

एमआरपी: 149/- 

प्री ऑर्डर कीमत

साहित्य विमर्श: 99 + डिलीवरी | अमेज़न: 109 + डिलीवरी 

पुस्तक लिंक:

साहित्य विमर्श लिंक | अमेज़न लिंक 


स्वाहा 2:  गुनाह, प्रतिशोध और संतुष्टि

स्वाहा 2 लेखक संतोष पाठक की स्वाहा शृंखला का दूसरा उपन्यास है। 334 पृष्ठों का इस भाग की कीमत वैसे तो 299 रुपये है लेकिन प्री ऑर्डर करने पर यह आपको कम कीमत में प्राप्त हो सकती है। 

किताब परिचय

श्यामली के कत्ल से शुरू हुई सिद्धांत की बद्किस्मती उसका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी। दिल के भीतर दहकती बदले की आग उसके जुर्म की फेहरिश्त में निरंतर इजाफा करती जा रही थी। वह भटक रहा था, एक-एक कर के दुश्मनों का सफाया करता जा रहा था, मगर जब मंजिल पर पहुँचा तो ये देखकर हैरान रह गया कि प्रतिशोध के दावानल को बुझाने हेतु जितने भी गुनाह किये थे उनका हासिल एक ही झटके में जलकर स्वाहा हो गया।

एमआरपी: 299/- 

प्री ऑर्डर कीमत 

साहित्य विमर्श: 180/- + डिलीवरी चार्ज | अमेज़न:  189/- + डिलीवरी चार्ज

पुस्तक लिंक: साहित्य विमर्श | अमेज़न 


स्वाहा 3 : हसरत, दौलत और हासिल

स्वाहा 3 हसरत दौलत और हासिल लेखक संतोष पाठक द्वारा लिखित तीन भागों में फैली स्वाहा शृंखला का तीसरा एवं अंतिम भाग है। 250 पृष्ठों में फैले इस उपन्यास की कीमत 219 रुपये रखी गयी है। परन्तु प्रीऑर्डर करने पर यह काफी कम कीमत में क्रय किया जा सकता है। 

किताब परिचय:

जिसे चाहा उसे खो दिया। जहां भी कदम पड़े तबाही और बर्बादी का मंजर आम हो गया। इंसानियत हैवानियत में बदल गई, सबकुछ एक ही झटके में स्वाहा हो गया। अपने प्रारब्ध से जूझता ऐसा बदकिस्मत शख्स दुनिया में बस एक ही हो सकता था और वह था सिद्धांत सूर्यवंशी। जो एक ऐसे रास्ते पर चल पड़ा था जिसकी कोई मंजिल नहीं थी।

एमआरपी: 219/-

प्री ऑर्डर कीमत 

साहित्य विमर्श: 160/- + डिलीवरी चार्ज | अमेज़न:  169/- + डिलीवरी चार्ज

पुस्तक लिंक: साहित्य विमर्श | अमेज़न 


स्वाहा के तीन खंडों पर विशेष ऑफर 

साहित्य विमर्श प्रकाशन, स्वाहा सीरीज की तीनों पुस्तकों का बंडल ऑफर भी लेकर आया है।  शृंखला की तीनों ही पुस्तकें आप, फ्री डिलीवरी के साथ, आप मात्र 499/- रूपये में मंगवा सकते हैं। आप स्वाहा सीरीज के किसी भी पुस्तक पर क्लिक करें। इसी पेज पर आपको 'Frequently Bought Together' दिखाई देगा. उसके नीचे ऐड टू कार्ट पर क्लिक करें। ऐसा करते ही यह बंडल ऑफर तीनों पुस्तकों पर लागू हो जाएगा।


यह सभी पुस्तकें पाठकों को 13 नवंबर 2021 से भेजनी शुरू कर दी जाएँगी। 

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