आज का उद्धरण

आज का उद्धरण | बिमल मित्र | आज कल और परसों

अहम् सक्षम को भी नहीं शोभता और अक्षम के लिए तो अहम्  एक मजाक ही है। जो कहता है कि अहम्  या घमंड यौवन का धर्म है, वह सच नहीं कहता.. यह मैं किसे समझाऊँ? अहम् चाहे यौवन का हो, चाहे सम्मान का, स्वरूप का हो या धन का, प्रतिष्ठा का हो या मान का..इसका असर जीवन-भर ढोना पड़ता है। इतिहास यह बताता है कि अतीत में जो कुछ हुआ है, वही भविष्य में भी होकर रहेगा। व्यतिक्रम यदि किसी चीज का होता है तो वह केवल बाहरी स्वरूप का। जैसे अतीत से लेकर आज तक प्रकृति में कोई भी परिवर्तन नहीं आया, उसी तरह मनुष्य भी कभी नहीं बदला है।

- आज कल और परसों, बिमल मित्र

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