साहित्यकार शरद पगारे को 'पाटलीपुत्र की साम्रागी' के लिए मिला 2020 का 'व्यास सम्मान'

साहित्यकार शरद पगारे को  'पाटलीपुत्र की साम्रागी' के लिए मिला  2020 का 'व्यास सम्मान'
साहित्यकार शरद पगारे को  'पाटलीपुत्र की साम्रागी' के लिए मिला  2020 का 'व्यास सम्मान'

वरिष्ठ साहित्यकार शरद पगारे को 2010 में प्रकाशित उपन्यास पाटलीपुत्र की साम्रागी के लिए 2020 का व्यास सम्मान दिये जाने की घोषणा हुई है। यह निर्णय प्रो रामजी तिवारी की अध्यक्षता में संचालित एक चयन समिति द्वारा किया गया है।

व्यास सम्मान के के बिड़ला फाउंडेशन द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला सम्मान है। यह सम्मान, सम्मान वर्ष के ठीक पहले 10 वर्ष की अवधि में प्रकाशित किसी भी भारतीय नागरिक की हिन्दी की एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को भेंट किया जाता है। 1991 में शुरू हुए इस सम्मान में अंतर्गत 4 लाख रूपये की पुरस्कार राशी के साथ प्रशस्ति पत्र  व प्रतीक चिन्ह भेंट किया जाता है। 

साहित्यकार शरद पगारे हिन्दी साहित्य के जाने माने लेखकों में से एक हैं। उनका जन्म खंडवा मध्य प्रदेश 5 अगस्त 1931 में हुआ था। उन्होंने इतिहास में एम ए करने के पश्चात पी एच डी की उपाधि प्राप्त की है। वे इतिहास के शोधकर्ता रहे हैं। प्राध्यापक और प्रोफेसर के रूप में उन्होंने अध्यापन कार्य किया है। विशेष विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में शिल्पकर्ण विश्वविद्यालय, बैंकॉक-थाईलैंड में उन्होंने अध्यापन किया है। अब वह सेवानिवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं।

शरद पगारे के अब तक पाँच उपन्यास, छः कहानी संग्रह और दो नाटक प्रकाशित हो चुके हैं। शरद पगारे को अपने लेखन के लिए अब तक कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उनकी अनेक कहानियों का उड़िया, मराठी, मलयालम, कन्नड़, तेलुग में अनुवाद एवं प्रकाशन हो चुका है।

©विकास नैनवाल 'अंजान'

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