आज का उद्धरण

हरिशंकर परसाई | प्रवचन और कथा | हिन्दी कोट्स

पिछले कुछ सालों में प्रवचनों के विषय और शैली और उद्देश्य बदले हैं। कुछ प्रवचनकारों के, सबके नहीं। बाकी तो वही कथा, अध्यात्म, दृष्टांत, पुराण के प्रवचन करते हैं। पर जब से राजनीतिक उद्देश्य के लिए धर्म का उपयोग शुरू हुआ, प्रवचनकर्ता धर्म के बहाने राजनीति बोलते हैं। राजनीतिज्ञ हैं नहीं तो कच्ची राजनीति बोलते हैं। साम्प्रदायिक द्वेष की राजनीति बोलते हैं। ये अक्सर, ओछा, कुरुचिपूर्ण और भद्दा बोलते हैं। अशिष्ट बोलते हैं।

- हरिशंकर परसाई, प्रवचन और कथा

किताब लिंक:  हार्डकवर

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