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Wednesday, February 10, 2021

आज का उद्धरण

हिन्दी कोट्स | विजयदेव नारायण साही


मनुष्य की कोई भी भावना उसे जिस तरह एक छोर पर परात्पर सत्य तक ले जाती है, वैसे ही दूसरे छोर पर प्रकृति तक ले जाती है। क्योंकि मनुष्य जड़ और चेतन दोनों है। शरीर और आत्मा दोनों है। परात्पर सत्य उसकी चेतना की शुद्ध अवस्था है, उसी तरह प्रकृति उसकी जड़ता की। वह दोनों के सन्धिस्थल पर है। आदिम काल से एक ओर जहाँ वह परमात्मा में मानवीयता का आरोप करता आया है, वहीं वह प्रकृति पर भी मानवीयता आरोपित करता आया है।

- विजयदेव नारायण साही, विजय देव नारायण साही रचना संचयन



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