आज का उद्धरण

निवेदिता श्रीवास्तव कोट्स

दूसरे के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए अपना अस्तित्व बनाये और बचाये रखने की सकारात्मकता सब में नहीं होती है ,परन्तु जिस ने भी इस बात को समझ लिया वही अपने हिस्से के आसमान के साथ ,सुकून से रह पाता है।

- निवेदिता श्रीवास्तव, एक टुकड़ा आसमान का

लघुकथा का लिंक: एक टुकड़ा आसमान का 

© विकास नैनवाल 'अंजान'

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4 Comments
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  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (24-01-2021) को   "सीधी करता मार जो, वो होता है वीर"  (चर्चा अंक-3949)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --
    नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिन की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    Replies
    1. जी चर्चा अंक में मेरी प्रविष्टि को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार....

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  2. सुंदर प्रस्तुति

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