आज का उद्धरण

बिमल मित्र | हिन्दी कोट्स | गवाह नम्बर तीन


बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में मनुष्य के पास समय ही कहाँ है! मनुष्य का आज का धर्म हो गया है- आगे बढ़ते चलो-सबको पीछे छोड़ते चलो-धक्का मारकर, चोट पहुँचाकर- किसी भी तरह बढ़ते चले जाओ। रुकने का समय नहीं, पीछे मुड़कर देखने का समय नहीं, दो क्षण सोचने के लिए भी किसी के पास वक्त नहीं - क्योंकि उन्हीं दो क्षणों में तुम्हारे पीछे के वे लोग तुमसे आगे बढ़ जायेंगे।

- बिमल मित्र, गवाह नम्बर तीन

किताब लिंक: पेपरबैक | किंडल

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2 Comments
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  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (13-12-2020) को   "मैंने प्यार किया है"   (चर्चा अंक- 3914)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
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    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    1. चर्चा अंक में मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार, सर।

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