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Monday, December 14, 2020

आज का उद्धरण

अंकुर मिश्रा | हिन्दी कोट्स | life quotes


यही विडम्बना है वर्तमान वक्त की। हम जिस उद्देश्य की प्राप्ति के सारे प्रयास कर रहे होते हैं, कहीं न कहीं वही खोता जा रहा है। मानो फलक की तलाश में तेजी से, और तेजी से दौड़ा जा रहा है व्यक्ति, पर फलक भला कभी किसी की पकड़ में आया है।....इस दौड़ में पहले व्यक्ति थकता है, फिर लड़खड़ाता है, और अंत में गिर जाता है पर दूरी कम नहीं होती है। महत्वाकांक्षाएँ बढ़ती जाती हैं, जरूरतें बढ़ती जाती हैं।

- अंकुर मिश्रा, द ज़िन्दगी

किताब लिंक: पेपरबैक | किंडल


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