लकड़ी का रहस्य - एस सी बेदी

 उपन्यास 22 नवम्बर 2020 को पढ़ा गया

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 48 | प्रकाशक: राजा बाल पॉकेट बुक्स | श्रृंखला: राजन-इकबाल #211

समीक्षा: लकड़ी का रहस्य - एस सी बेदी

पहला वाक्य:
नफीस ने उँगली सिर पर रखी और कुछ क्षण ठक-ठक करते हुए सोचता रहा, फिर बड़बड़ाया -"इकबाल के पास चलता हूँ , वही कोई उपाय बतायेगा।"

कहानी:
चन्दन नगर में हो रही हत्याओं ने पुलिस की नींद उड़ा दी थी। अब तक दो हत्याएं हो चुकी थीं और कोई भी कुछ पता नहीं लगा पाया था। 

वहीं कुछ दिनों से इकबाल का दोस्त नफीस भी गायब चल रहा था। वह अचानक किधर चले गया था किसी को इसका अंदाजा नहीं था।

इन सब बातों से अनभिज्ञ इकबाल सलमा के शहर में न होने का पूरा फायदा उठा रहा था। वह तफरी कर रहा था और इसी कारण वह ब्यूटी नाईट क्लब में अपनी रात बिताने गया था। लेकिन जब उधर उसे राजन दिखा था तो उसे लग गया था कि राजन किसी न किसी गुप्त मामले के चलते उधर आया था। और फिर किसी ने वहाँ मौजूद एक लड़की पर गोली चला दी।

आखिर कौन था शहर में हो रही हत्याओं के पीछे?
इकबाल का दोस्त नफीस अचानक से किधर गायब हो गया था?
राजन ब्यूटी नाईट क्लब में क्या कर रहा था?
ब्यूटी नाईट क्लब में मौजूद युवती पर किसने हमला किया था?
क्या बाल सीक्रेट एजेंट इन सभी प्रश्नों के उत्तर जान पाये?

मुख्य किरदार: 
नफीस - इकबाल का दोस्त
दिलीप - एक नौजवान युवक जो कि अपनी बेकारी से परेशान था 
मारिया स्मिथ - गोल्डन प्लाईवुड कम्पनी के मैनेजर की सेक्रेटरी 
जयपाल - गोल्डन प्लाईवुड कम्पनी का मैनेजर 
पी एल गुप्ता - एक व्यक्ति जिसके पास गोल्डन प्लाईवुड कम्पनी के जरूरि कागजात थे 
इकबाल - बाल सीक्रेट एजेंट 
राजन - बाल सीक्रेट एजेंट 
नसीम बानो - ब्यूटी नाईट क्लब में मौजूद एक युवती 
इंस्पेक्टर बलबीर - चन्दननगर में मौजूद पुलिस इंस्पेक्टर 
जारविस क्लार्क - एक लंगड़ा इटालवी 
टेली - जारविस की संस्था में काम करने वाली एक युवती 
मार्क हटन - एक अपराधी जिसकी लाश पुलिस को मिली थी 
भोलू - राजन इकबाल का नौकर 
विजय - जयपाल का साथी

मेरे विचार:
लकड़ी का रहस्य राजन इकबाल श्रृंखला का लघु-उपन्यास है। यह राजा बाल पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित राजन इकबाल श्रृंखला का 211वाँ उपन्यास है। वैसे तो लकड़ी का रहस्य को बाल उपन्यास कहा गया है लेकिन मैं इसे बाल उपन्यास नहीं कहूँगा।  इसमें राजन इकबाल व्यस्क ही दिखलाए गये हैं क्योंकि वह लोग आसानी से नाईट क्लब आते-जाते दिखते हैं। फिर उपन्यास की विषय वस्तु भी ऐसी है जिसके कारण इसे बाल उपन्यास की श्रेणी में मेरी नजर में तो नहीं रखा सकता है। हाँ, इसे किशोर उपन्यास जरूर कहा जा सकता है।

उपन्यास की शुरुआत नफीस की एंट्री से होती है और उसके साथ जो कुछ होता है वह पाठक की रूचि कथानक में जगा देता है। इसके बाद घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है और पाठक यह सोचता रह जाता है कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है? राजन और इकबाल की एंट्री कथानक में होती तो है पर आप यह भी जान जाते  हैं कि राजन को मामले की कुछ जानकारी तो है ही लेकिन वह भी सब कुछ नहीं जानता है।  सारे मामले आख़िर में जाकर कैसे खुलने वाले हैं यह जानने के लिए आप उपन्यास पढ़ते चले जाते हैं। 

राजन इकबाल श्रृंखला के उपन्यासों की एक यू एस पी इकबाल की हरकतें और उसकी झख भी होती है। यह चीज इस उपन्यास में मौजूद है। यही नहीं इस उपन्यास में इकबाल के अलावा नफीस भी मौजूद है जिसकी हरकतें हास्य पैदा करती हैं। इकबाल और नफीस जिस भी सीन में होते हैं उन्हें पढ़कर मजा आ जाता है।

इस उपन्यास में राजन की रेड फ़ोर्स का भी जिक्र है। यह पहली बार है जब मैंने राजन की रेड फोर्स के विषय में पढ़ा। जितना उपन्यास पढ़कर मुझे पता लगा उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेड फोर्स के लोग आम नागरिक हैं जो कि राजन के लिए कार्य करते हैं। मैं यह जरूर जानना चाहूँगा कि राजन ने रेड फोर्स का निर्माण क्यों और किस उपन्यास में किया। अगर आपको इस चीज की जानकारी है तो मुझे जरूर बताइयेगा।

उपन्यास की विषय वस्तु रोचक है लेकिन जिस तरह से इस कथानक को बुना गया है वह उपन्यास की रोचकता को कम कर देता है।  कहानी में कई घुन्डियाँ हैं जिनके विषय में राजन को ही काफी कुछ पता रहता है। पाठक और बाकी किरदार दोनों ही अँधेरे में रहते हैं। चूँकि राजन द्वारा की गयी तहकीकात का हिस्सा दर्शाया नहीं गया है तो पाठक को केवल घटनाएं ही पता चलती हैं जो कि उपन्यास की रोचकता को कम कर देती हैं। उदाहरण के लिए:

राजन ने आखिर में एक बहुरूप धरा था। वह उसे कैसे धर पाया? यह बात दिखलाई जाती तो बेहतर होता। 

विजय से राजन की पहली मुलाक़ात नहीं दिखाई गयी है और इस चीज के विषय में हमें आखिर में राजन से ही पता चलता है। अगर यह मुलाक़ात दिखाई गयी होती तो बेहतर होता।

राजन को गोल्डन प्लाईवुड कम्पनी के विषय में भी काफी चीजें पता रहती हैं। यह क्यों और कैसे हुआ यह दिखलाया जाता तो बेहतर होता।

ऊपर लिखी तीनों बातें ही अगर होती दिखलाई जाती तो अच्छा रहता। इनसे उपन्यास की रोचकता बढ़ जाती।

उपन्यास में एक प्रसंग यह है कि एक बड़ा अपराधी पुलिस को धोखे में रखने के लिए अपनी नकली लाश को चौहराहे में फिंकवा देता है। वह यह कार्य लाश के ऊपर नकली मेकअप लगाकर करता है। अब अगर कोई शातिर अपराधी है तो वह यह बात समझता होगा कि पहले लाश का पोस्ट मार्टम होगा और लाश नकली है यह पता चल ही जाएगा। जबकि इससे बेहतर कई उपाय वह कर सकता था जिससे लाश की असलियत का पता लगाना ज्यादा मुश्किल होता और उसका मकसद भी पूरा हो जाता।

उपन्यास का शीर्षक लकड़ी का रहस्य है लेकिन नब्बे प्रतिशत उपन्यास में इस लकड़ी का जिक्र नहीं आता है। बस गोल्डन प्लाईवुड कम्पनी के कुछ सदस्य ही संदेहस्पद दर्शाए गये हैं। पर उसमें भी लकड़ी नहीं केवल लोग ही रहस्मय लगते हैं। हाँ, आखिर में बस उपन्यास के शीर्षक को सिद्ध करने के लिए आखिर में लकड़ी और रहस्य जोड़ा गया है। अगर उपन्यास की शुरुआत ही लकड़ी और रहस्य से होती तो मुझे लगता है यह और बेहतर हो सकता था।

अंत में यही कहूँगा कि उपन्यास एक बार पढ़ा जा सकता है। मुझे यह औसत लगा। इक़बाल और नफीस के सीन आपका मनोरंजन तो करते हैं लेकिन कथानक जिस तरह बुना गया है वह पाठक के रूप में आपको असंतुष्ट करता है। कथानक की विषय वस्तु अच्छी है। इस पर और कार्य किया जाता तो यह बहुत बेहतर बन सकता था।

रेटिंग: 2/5 

लकड़ी का रहस्य का एक छोटा सा अंश आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
पुस्तक अंश: लकड़ी का रहस्य

राजन इकबाल श्रृंखला के अन्य उपन्यासों के विषय में मेरी राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
राजन-इकबाल 

एस सी बेदी के अन्य उपन्यासों के प्रति मेरी राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
एस सी बेदी

© विकास नैनवाल 'अंजान'
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2 Comments
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  1. राजन-इकबाल के उपन्यास ज्यादातर औसत स्तर के होते थे, पर यह बच्चों के लिए लिखे जाते थे, इसलिए बच्चों के लिए रोचक थे।
    किशोरावस्था में मैंने राजन-इकबाल खूब पढा है, अब पढने को मन नहीं करता।
    आपने उपन्यास के विषय में अच्छी जानकारी दी, धन्यवाद।

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    1. जी सही कहा। लेकिन बच्चों के लिए काफी अच्छे उपन्यास भी लिखे गए है। आप एनिड ब्लाइटन के उपन्यास पढ़े। आप देखेंगे कि वह बच्चों के लिए होते हुए भी अच्छे हैं। आप अब भी उन्हें पढ़कर उनका लुत्फ ले सकते हैं। राजन इकबाल के औसत होने का कारण शायद उनका कम वक्त में लिखा जाना रहा होगा। ऐसे में लेखक को कथानक पर कार्य करने का वक्त नहीं मिल पाता रहा होगा। आभार।

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