एक बुक जर्नल: आज का उद्धरण

Friday, October 16, 2020

आज का उद्धरण

sharat chandara quotes

किंतु सभी चिंताओं की एक किस्म होती है। जिसे आशा रहती है, वे एक तरह सोचते हैं; जिसे आशा नहीं रहती, वह दूसरी तरह सोचते हैं। पूर्वोक्त चिंता में संजीवता है, सुख है, तृप्ति है, दुख है और उत्कंठा है; इसी में मनुष्य थक जाता है- अधिक देर तक सोच नहीं पाता। लेकिन जिसे आशा नहीं रहती, उसे सुख नहीं है, दुख नहीं है, उत्कण्ठा नहीं है- है तो केवल सन्तुष्टि! आँखों से आँसू गिरते हैं और गम्भीरता भी रहती है...किन्तु रोज रोज नयी अंतर्पीड़ा नहीं होती। वह हल्के बादल की तरह, जहाँ तहाँ उड़ता चलता है; जहाँ हवा नहीं लगती वहाँ से हट जाता है। तन्मय मन को, उद्वेगहीन चिन्ता में कुछ सार्थकता मिलती है।

- शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय, देवदास 

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