Friday, November 23, 2018

2,00,000 views mark!!(2 लाख का आँकड़ा पार)

आज  vikas' book journal ने 2 लाख व्यूज का आँकड़ा पार कर लिया है और मेरे लिए यह बहुत ख़ुशी की बात है।

ब्लॉग की पहली पोस्ट 2 अक्टूबर 2012 को प्रकाशित हुई थी। उस वक्त सोचा नहीं था कि यह पारी इतनी लम्बी चलेगी। ब्लॉग क्यों बना इसके पीछे कुछ विशेष कारण नहीं था। साहित्य में  रूचि थी और मैं अपने विचार व्यक्त करना चाहता था। उन दिनों मैं अक्सर अंग्रेजी साहित्य ही पढ़ता था।

फिर हिन्दी पुस्तकों के प्रति झुकाव बढ़ा और मैंने एक बात पर ध्यान दिया। मैं अक्सर जब भी हिन्दी पुस्तकों को अमेज़न या दूसरी ऑनलाइन साइट्स पर ढूँढता था तो मुझे पुस्तक तो मिल जाती थी परन्तु उसके विषय में जानकारी नहीं मिल पाती थी।  पुस्तक की कहानी क्या है? वह किस विषय में है? यह सब उधर नहीं होता था। ऐसे में मुझे मुझे शीर्षक देखकर ही चुनाव करना पड़ता था।

ऐसे में कई बार पुस्तक का विषय मुझे पसंद आता था और कभी नहीं। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं किताबों के विषय में लिखने लगा। मेरा मुख्य ध्यान हिन्दी साहित्य पर ही केंद्रित था क्योंकि अंग्रेजी के विषय में लिखा तो जा ही रहा था।


2012 के बाद हर साल मेरे हिन्दी और अंग्रेजी की किताबें पढ़ने का अनुपात में हिन्दी का हिस्सा लगातार बढ़ता रहा है। अब हाल ये है कि इस साल हिन्दी और अंग्रेजी का अनुपात 70:30 के करीब है। खैर, ये अनुपात तो बढ़ता घटता रहेगा।

उम्मीद है कि ये सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा।


(Today my blog has crossed 2lac views and i’m very ecstatic about it.

When i had first published my first post on 2nd of october 2012  i had no idea that i would be continuing for this long. I loved reading and wanted a place of mine to write about what i thought about books that i was reading. I guess most people start like that.

Then i started developing interest towards Hindi literature. It was then i noticed that for most of the books present in online space there was no information about them.I could search for the book in hindi in amazon and i would find many but almost all didn’t have any descriptions. I didn’t knew what the book was about, what was it’s subject and thus had no idea whether i would like it or not.

So, i used to buy the books just by looking at their titles which was often a hit and miss situation. This thing prodded me to write more in hindi. After 2012 every year the ratio of hindi literature is increasing in my reading. This year hindi to english ratio is about 70 to 30. This ratio may change in future but i hope reading doesn’t.

I would like to keep on writing here forever.)


इस साल मैंने जो किताबें पढ़ी हैं उनके विषय में आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
(I have read these books this year)

2018 reads


आप सभी का शुक्रिया!! किताबें पढ़ते रहिये!!
(Thank you all!! Keep on reading!!! )

11 comments:

  1. मैंने काफी समय से आपके ब्लॉग को पढ रहा हूँ। आपकी समीक्षा बहुत अच्छी व रोचक होती है।
    कई बार तो मैं पुस्तक चयन समीक्षा पढकर ही करता हूँ।
    धन्यवाद।
    गुरप्रीत सिंह
    श्री गंगानगर, राजस्थान।

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    1. जी, दिल से आभार। पोस्ट में मिली टिप्पणी उत्साहवर्धन करती हैं।

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  4. बहुत बहुत बधाई।
    Great analysis.great work.
    शानदार और रुचिकर ब्लॉग। बहुत सारी बुक्स तो मैंने आपकी समीक्षा पढ़ने के बाद ही मंगवा कर पढी है।
    आपका ब्लॉग जो भी देखेगा वह बुक्स पढ़ने के लिए अवश्य प्रेरित होगा।

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    1. शुक्रिया नीरज जी। यह जानकर दिल से ख़ुशी हुई है। आप ऐसे ही आते रहियेगा। जब ऐसी टिप्पणी मिलती है तो और अच्छा लिखने के लिए प्रोत्साहित होता हूँ।

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. vikas ji, aapka blog kaafi achha hain. raj comics

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    1. शुक्रिया। ब्लॉग पर बने रहियेगा।

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  7. सकारात्मक सोच के साथ सृजन की शुरुआत । बधाई एवं शुभकामनाएँँ ।

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