Sunday, February 4, 2018

षड्यंत्र

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रेटिंग: 3.5/5
कॉमिक्स 3 फरवरी 2018 को पढ़ी गई

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट: पेपरबैक
पेज काउंट: 64
प्रकाशक : राज कॉमिक्स
लेखक: अनुपम सिन्हा, चित्रांकन: अनुपम सिन्हा,इंकिंग : विनोद कुमार, विट्ठल काम्बले,सुलेख व रंग: सुनील पाण्डेय, सम्पादक: मनीष गुप्ता
आईएसबीएन: 9789332407183


भारत ने मंगल ग्रह में भेजे जाने वाला राकेट तैयार कर दिया था। और इस राकेट में अन्तरिक्ष यात्री के तौर पर ध्रुव को चुना गया था। क्योकि देश की साख का मामला था तो ध्रुव को इससे कोई दिक्कत भी नहीं थी। वो अन्तरिक्ष यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार था। बस राकेट के बनने का आखिरी चरण पूरा होने की देर थी।

लेकिन फिर कुछ ऐसी घटनायें होने लगी कि ध्रुव को लगा कि उसके और उसके मिशन खिलाफ कुछ षड्यंत्र रचा जा रहा है।

आखिर ऐसा क्या हुआ जिससे ध्रुव का माथा ठनका था ? आखिर कौन था इस षड्यंत्र के पीछे? क्या ध्रुव ने अपने मिशन में सफतला प्राप्त की? ऐसे ही कई सवाल हैं जिसका पता आपको इस कॉमिक को पढ़कर लगेगा।

2018  में  मैंने ये भी फैसला लिया है कि कम से कम एक कॉमिक तो हर हफ्ते पढूँगा। कॉमिक के प्रति अपने प्रेम को दर्शाने का इससे अच्छा तरीका मेरे हिसाब से नहीं है। इसीलिए मैंने कई दिनों से मेरे पास मौजूद इस कॉमिक को पढ़ने का फैसला किया।

वैसे तो ये एकल कॉमिक है लेकिन इसमें कई किरदार अंधी मौत और सजा-ए-मौत कॉमिक के भी हैं तो अगर आपने वो पढ़ी हैं तो शायद इसका ज्यादा आनन्द ले पाओगे। मैंने अंधी मौत काफी साल(10-15) पहले पढ़ा था। उस वक्त शायद आठवीं या नव्वीं में रहा होऊंगा। हल्की कहानी तो मुझे याद थी तो उस रिफरेन्स को समझ गया था लेकिन सजा-ए-मौत न पढ़े होने के कारण उसका रिफरेन्स नहीं समझ पाया। इससे इस कॉमिक को एन्जॉय करने पर इतना फर्क तो नहीं पढ़ा लेकिन फिर भी शायद मैंने सजा-ए-मौत पढ़ा होता तो ज्यादा मजा आता।  ये तो हुई उन कॉमिक्स की बात जिन्हें आप अगर इसको पढने से पहले पढेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। अगर आपके पास नहीं है तो उनके बिना भी इसे पढ़ा जा सकता है।

अब आते हैं इस कॉमिक पर। ध्रुव का ये कॉमिक रोमांचक था। हाँ, षड्यंत्र कौन रच रहा है इसे रहस्य नहीं रखा गया है। पाठक कॉमिक जैसे पढ़ता रहता है उसे बीच में पता चल जाता है कि मुख्य खलनायक कौन हैं। वो जो कर रहे हैं क्यों कर रहे हैं इसका पता अंत में लगता है। लेकिन अगर ध्रुव द्वारा ही पाठको को षड्यंत्र कर्ताओं का पता चलता तो ज्यादा सही रहता। ये काम आसान भी था। बस वो पैनल जिसमे वो षड्यंत्र करते हुए दर्शाए गये हैं उन्हें हटाने की जरूरत थी और फिर अंत में ध्रुव को उनका पर्दा फाश करते हुए दर्शाया जा सकता था।

किरदारों की बात करूँ तो कॉमिक में मोल नाम का एक किरदार है जो कवर पे भी बना है। उसके और ध्रुव की लड़ाई मजेदार रही। ध्रुव को उसने नाको चने चबवा दिए थे जिसने कॉमिक को और ज्यादा रोमांचक बनाया। खलनायक के रूप में मुझे वो काफी अच्छा लगा था।

कॉमिक के एक दो लोगों से और ध्रुव टकराता है जिसके विषय में आप कॉमिक में पढ़े तो ज्यादा मज़ा आएगा। हाँ, इधर इतना कहूँगा कि इस कॉमिक्स में हत्यारी राशियाँ वाला नास्त्रेदमस भी है। उसके अंदर जिस तरह का बदलाव दिखाया गया है वो मुझे पसंद आया। मुझे अब ये देखना है कि इस कॉमिक के बाद उसके और ध्रुव के सम्बन्ध किस तरह के होते हैं क्योंकि आसार तो अच्छे दिख रहे हैं।

इसके इलावा कॉमिक में एक अन्य कहानी भी ध्रुव की कहानी के समानांतर चलती है। इसमें एक परग्रही जोड़ा है। उसका इस कॉमिक में क्या रोल है ये तो आपको कॉमिक पढने के दौरान ही पता चलेगा। वैसे मैं इस पशोपेश में था कि इस विषय में बताऊँ या नहीं लेकिन चूँकि कवर में वो बना हुआ है तो मैंने सोचा बताने में हर्ज नहीं है। हाँ, जिस तरह से उनका उपयोग कहानी में किया है मुझे वो पसंद आया।

अंत में मैं इतना ही कहूँगा कि ध्रुव का ये कॉमिक पूरी तरह से पाठको का मनोरंजन करने में सफल होता है। हाँ,षड्यंत्र कौन रच रहा है इसको जितना देर तक हो सके उतने देर तक अगर रहस्य रखा होता तो ज्यादा मजा आता। फिर रोमांच के साथ रहस्यकथा का मज़ा भी मिल सकता था।

अगर आपने कॉमिक्स पढ़ी है तो इसके विषय में अपनी राय कमेंट्स के रूप में जरूर दीजियेगा। और अगर आपने इस कॉमिक्स को नहीं पढ़ा है और पढ़ना चाहते हैं तो आप इसे निम्न लिंक से मँगवा सकते हैं:
राज कॉमिक्स
अमेज़न

2 comments:

  1. देखा जाय तो एक तरह से अंधी मौत और षड्यंत्र दोनों एक मिनी सीरीज ही हैं।क्योंकि इसकी कहानी अंधी मौत में ही स्टार्ट हो जाती है।वैसे एक सुझाव और है कि कॉमिक्स वाले रिव्यु कॉमिक्स ग्रुप में भी शेयर करें।यदि आप ऐसे ग्रुप में नहीं हो तो मैं शेयर कर रहा हूँ।

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    Replies
    1. नहीं, कॉमिक्स के समूहों से मैं नहीं जुड़ा हूँ। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर कॉमिक्स मुझे साहित्य की एक विधा ही लगती है इसलिए एक ही जगह साझा कर देता हूँ।

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