आज का उद्धरण

बिमल मित्र | कोट्स | चार आँखों का खेल



सन्देह यों ही एक ऐसा सर्प होता है जिसका फन हो या न हो, नज़र पड़ते ही सारे शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। जब तक सामने रहता है तब तक किसी भी तरह मन से अलग नहीं किया जा सकता।

किताब लिंक: पेपरबैक

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4 Comments
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  1. संदेह से परे फिर कुछ नहीं होता..सत्य कथन..।

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  2. चार आंँखों का खेल आपकी आंँखों से देखा । आकर्षक लगा ।

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