वेद प्रकाश काम्बोज

 

वेद प्रकाश काम्बोज - जीवनी
स्रोत: लेखक के फेसबुक पृष्ठ से 


वेद प्रकाश काम्बोज का पहला उपन्यास कँगूरा 1958 में प्रकाशित हुआ था जो कि पाठकों के बीच में आते ही छा गया था। यह उपन्यास रंगमहल कार्यालय खारी बावली दिल्ली से प्रकाशित हुआ था। 

अपने पहले प्रकाशन के प्रकाशन के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 60,70 और 80 के दशक में उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर थी। 

वह पिछले साठ सालों से वह लेखन क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके अब तक 400 से ज्यादा उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। लेखन के साथ उन्होंने कई रचनाओं का अनुवाद कार्य भी किया है। 
 
वेद प्रकाश शर्मा विजय रघुनाथ शृंखला के लिए जाना जाते थे। इसके अलावा उनके द्वारा लिखी अलफाँसे शृंखला और सिंगही शृंखला भी पाठकों के बीच हिट हुई थी। 

लोकप्रिय लेखन से लेखन की शुरुआत करने वाले वेद प्रकाश काम्बोज अब ऐतिहासिक लेखन कर रहे हैं। 


मुख्य कृतियाँ

शृंखलाएँ

एकल उपन्यास

अपराध साहित्य 

  1. खतरे की खोपड़ी
  2. इंसाफ का जनाजा (अमेज़न)
  3. चंद्रहार के चोर (अमेज़न)
  4. रेलगाड़ी का भूत (अमेज़न)
  5. चंद्रमहल का खजाना (अमेज़न)

सामाजिक उपन्यास

  1. पत्ती झरा गुलाब 
  2. कॉलेज का रोमांस 
  3. प्रतिष्ठा 
  4. नीड़ का पंछी 
  5. मेरा प्यार पुकारे 

ऐतिहासिक उपन्यास 

  1. युगपुरुष विष्णुगुप्त चाणक्य एवं चंद्रगुप्त (अमेज़न)
  2. जुपिटर का बेटा सिकंदर महान (अमेज़न)
  3. सम्राट अशोक: राज्याभिषेक (अमेज़न)

अनुवाद

  1. पिशाच कुत्ता (अमेज़न)
  2. कुछ विदेशी अपराध कथाएँ (अमेज़न)
  3. ड्रेगन की अँगूठी (अमेज़न)
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