नेवर गो बैक | लेखक: ली चाइल्ड | शृंखला: जैक रीचर | अनुवादक: विकास नैनवाल

साक्षात्कार: लेखिका सुमन बाजपेयी से उनके नव प्रकाशित उपन्यास 'क्रिस्टल साम्राज्य' पर बातचीत

साक्षात्कार: लेखिका सुमन बाजपेयी से उनके नव काशित उपन्यास 'क्रिस्टल साम्राज्य' पर बातचीत


सुमन बाजपेयी पिछले 32 सालों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। यात्रा वृत्तांत, बाल साहित्य, कविता, कहानी और अनुवाद के क्षेत्र में वह लगातार कार्य करती आ रही हैं। हाल ही में फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन से उनका बाल उपन्यास  'क्रिस्टल साम्राज्य' प्रकाशित हुआ है। 'एक बुक जर्नल' पर हमनें उनसे उनके इस नव प्रकाशित उपन्यास पर बातचीत की है। उम्मीद है यह बातचीत आपको पसंद आएगी। 


*****


नमस्कार मैम, एक बुक जर्नल में आपका स्वागत है। सर्वप्रथम तो आपको नवीन पुस्तक क्रिस्टल साम्राज्य के प्रकाशन पर हार्दिक बधाई।

कृपया अपनी पुस्तक के विषय में पाठकों को संक्षिप्त में कुछ बताएँ।

धन्यवाद विकास इस साक्षात्कार के लिए। मेरी यह पुस्तक 'क्रिस्टल साम्राज्य' एक फैंटेसी है। लेकिन फैंटेसी के तमाम तत्व समाहित करने के बावजूद इसमें मैंने एक गंभीर मुद्दे को भी उठाया है। यह मुद्दा हमारे वास्तविक जीवन से गहराई से जुड़ा है। इसके बारे में अक्सर वयस्क व समाज बच्चों से बात करने से कतराता है। यहाँ तक की बच्चों से छुपाया भी जाता है। यह मुद्दा है एडॉप्शन का। इसमें बिन्नी जो इस कहानी की मुख्य नायिका है या पात्र कह सकते हैं, उसे गोद लिया गया है। और जब उसे इस बात का पता चलता है तो वह किस तरह से प्रतिक्रिया करती है, इसे मैंने इस उपन्यास में वर्णित किया है।

 बाकी जैसे मैंने कहा कि यह एक फैंटेसी उपन्यास है जो इसी मुद्दे पर आधारित होकर आगे बढ़ता है। बिन्नी जानना चाहती है कि उसके जन्म देने वाले माँ-बाप कौन हैं और इस खोज में वह एक दूसरी दुनिया में जो उनकी दुनिया से अलग है, पहुँचती है। उसके साथ अन्य पाँच दोस्त भी हैं। इस दौरान उनके सामने बहुत सी अविश्वसनीय घटनाएँ  घटती हैं।

बाकी तो उपन्यास पढ़ने पर ही पूरा रहस्य और रोमांच सामने आएगा।


क्रिस्टल साम्राज्य को लिखने का विचार आपको कैसे आया? क्या कोई विशेष घटना हुई थी जिससे प्रेरित होकर आपने इस उपन्यास को लिखने की सोची?

असल में जादुई दुनिया या फैंटेसी विधा पर इससे पहले मैंने कोई पुस्तक नहीं लिखी थी। एक बार ऐसे ही जादू और जादुई दुनिया विषय पर उठाकर पुस्तक लिखना शुरू किया तो 'तारा की अनोखी दुनिया' का सृजन हुआ। उसके प्रति  पाठकों का बहुत अच्छा रिस्पांस मिला तो लगा कि इस विधा पर और भी आगे कुछ लिखा जा सकता है। और इसका श्रेय मैं अपने प्रकाशक 'फ्लाई ड्रीम्स प्रकाशन' को भी देना चाहूँगी जो मुझे निरंतर लिखने के लिए प्रेरित करते रहे। 

 जहाँ तक किसी घटना की बात है तो ऐसी कोई विशेष घटना तो नहीं हुई थी जिसकी वजह से मैंने यह उपन्यास लिखना शुरू किया। लेकिन मैं एडॉप्शन के बारे में मैं अवश्य लिखना चाहती थी और इस प्रयास में एक फैंटेसी उपन्यास की भी भूमिका मेरे मन में बनी। लिखते हुए बहुत सारे पात्र, मोड़ और चुनौतियाँ मुझे झकझोरती रहीं और वही उपन्यास के रूप में अब आपके सामने हैं। यथार्थ को कल्पनाशीलता के साथ समाहित करने का यह मेरा प्रयास है।


उपन्यास का केंद्रीय पात्र बिन्नी है। कहते हैं कि लेखक अपने आसपास की दुनिया से ही अपने पात्र चुनता है। क्या बिन्नी के साथ भी ऐसा ही है? 

बिन्नी नाम मेरी कई कहानियों में आपको देखने के लिए मिलेगा। इसकी कोई खास वजह नहीं है लेकिन शायद मुझे यह नाम पसंद है या कोई छवि है जो मुझे आंदोलित करती है। जब मैं किसी पात्र को गढ़ती हूँ, चाहे वह लड़का हो या लड़की, मैं उसे सशक्त दिखाना चाहती हूँ। एक सकारात्मक संदेश उसके द्वारा देना मेरा हमेशा उद्देश्य रहता है। ताकि बाल पाठकों को यह महसूस हो कि चाहे कितनी ही दिक्कतें आएँ या चुनौतियों का सामना करना पड़े, अगर दृढ़ विश्वास है तो वे उन्हें पार कर सकते हैं।

 मेरी यह पात्र भी भी ऐसी है और मुझे लगता है कि अपने आसपास हमें ऐसे पात्र देखने को मिल भी जाते हैं जिनमें कुछ कर गुजरने का जज्बा होता है।और बिन्नी उन्हीं में से एक है।


बिन्नी के इतर पुस्तक का वो कौन सा किरदार है जो आपको पसंद है? और क्यों वो आपका पसंदीदा है?

बिन्नी के अलावा इस पुस्तक में 'मौरा' नाम की किरदार मुझे पसंद है। बेशक मौरा एक नकारात्मक किरदार है और पूरी ईमानदारी से उसी तरह की प्रवृत्ति वह प्रदर्शित भी करती है। लेकिन बाद में जब उसे एहसास होता है तो उसमें जो बदलाव आता है, वह एक सकारात्मक और आशाजनक संदेश देता है।


क्रिस्टल साम्राज्य में आपने एक फंतासी का निर्माण किया है? एक नवीन दुनिया आपने रची है। उस दुनिया की ऐसी कौन सी चीज है जो कि आप चाहेंगी कि यहां असल दुनिया में होती तो बहुत अच्छा होता?

सभी पात्रों का एक दूसरे की मदद करने का जज्बा और अपने भीतर परिवर्तन करने की चाह।


आप कई विधाओं में लिखती आयी हैं। बाल साहित्य के साथ-साथ आपने वयस्कों के लिए भी लेखन किया है। आप बाल साहित्य की रचना करते हुए किन-किन बातों का ध्यान रखती हैं?

वयस्कों की अपेक्षा बाल साहित्य लिखना अधिक कठिन और चुनौती पूर्ण कार्य है। इसकी वजह है कि हम बच्चों को कुछ भी ऐसा नहीं दे सकते हैं जो उनकी बाल बुद्धि के अनुरूप न हो या जो उन्हें अपील न करे। उनके लिए लिखते समय भाषा का बहुत अधिक ख्याल रखना पड़ता है। अपने शब्दों को संयमित रखते हुए, सही ढंग से संप्रेषण करना होता है किसी भी कहानी या उपन्यास में। घटनाएँ चाहे यथार्थ से जुड़ी हों या काल्पनिक हों, दोनों ही स्थितियों में सबसे आवश्यक होता है कि आपने उनको किस तरह से प्रस्तुत किया है। ताकि बच्चा उन्हें जब ग्रहण करे तो उस पर पड़ने वाला प्रभाव उसे दुविधा में डालने की बजाय समाधान ढूँढने के विकल्प की ओर आकर्षित करे।

  मैंने अपने अनुभव से जाना है कि बच्चे वयस्कों से अधिक सृजनशील और कल्पनाशील होते हैं। कोई बात उन्हें अगर अखरती है तो वह तुरंत प्रश्न करते हैं और इसका सटीक उत्तर भी चाहते हैं। इसलिए बाल साहित्य की रचना करते हुए हमें कथानक के अलावा शिल्प, शैली, वाक्य विन्यास, शब्दों का सही चयन, सही भाव रखना आवश्यक होता है। जहाँ तक संभव हो नकारात्मक संदेश देने से बचना चाहिए या उपदेश देने वाली रचनाएँ भी बच्चे पढ़ना पसंद नहीं करते हैं। उन तक कुछ संदेश पहुंचाना है तो वह इस सूक्ष्म ढंग से पहुँचाना होता है कि उन्हें एहसास भी न हो कि उन्हें सीधे-सीधे सीख दी जा रही है।


क्रिस्टल साम्राज्य की बात की जाए तो क्या ये एकल पुस्तक है या किसी शृंखला की शुरुआत है?

अभी तो इसे श्रृंखला का रूप देने का कोई विचार नहीं है।


गर्मियों की छुट्टियाँ आने वाली हैं? आप अपनी छुट्टियाँ बचपन में कैसे बिताती थी? क्या पाठकों से उसकी याद साझा करना चाहेंगी?

छुट्टियाँ आती थीं तो हमारे घर में बहुत रौनक रहती थी।  हम पाँच भाई बहन थे और हमारे पास खेलने के लिए बहुत सारे गेम्स थे, खासकर कैरम बोर्ड और लूडो। इन्हें मेरे पापा जापान से लाए थे और वे अलग किस्म के थे। तो छुट्टियों में परिवार का हर सदस्य ये गेम्स खेलता था। और सब साथ फर्श पर बैठकर खूब मजे से आम खाते थे। खाना या फल या मिठाई खाना भी एक जश्न की तरह होता था। गाँव से दादी हमारे खेत के आम और गन्ने भेजा करती थीं जिन्हें खाने का तो अलग ही लुत्फ होता था। और फिर आम के अलग-अलग व्यंजन बनते थे आचार समेत।

 उन दिनों क्योंकि आज की तरह एक्स्पोज़र नहीं थे। एक-दो घरों में ही टीवी होते थे तो खेलना सबसे पसंदीदा और समय व्यतीत करने का पर्याय हुआ करता था। इसके अलावा लाइब्रेरी से किताबें लाकर खूब पढ़ा करते थे। और सुबह-शाम इंडिया गेट और चिल्ड्रन्स पार्क में बिताया करते थे। वहाँ से भी जामुन इकट्ठा करके लाया करते थे। परिवार के सदस्यों के अलावा उस समय दोस्त भी बहुत होते थे और गर्मी की छुट्टियाँ कैसे बीत जाती थीं, पता ही नहीं चलता था। 

आपने यह प्रश्न पूछ कर मुझे बीते दिनों में पहुँचा दिया और बचपन की खट्टी-मीठी यादें ताजा हो गईं।


बचपन में आपकी पसंदीदा पुस्तकें क्या क्या थी? क्या आप कुछ के नाम साझा करना चाहेंगी?

घर में बाल पत्रिकाएँ आती थीं तो उन्हें तो पढ़ते ही थे साथ ही अंग्रेजी व हिंदी के उपन्यास भी खूब पढ़े हैं। जैसे नैन्सी ड्रयू, पीटर पैन और एनिड ब्लाइटन की लिखी पुस्तकें। उन दिनों दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की मोबाइल वैन आती थी और घर के हर सदस्य के कार्ड थे तो किताबें हमारे घर में सभी पढ़ते थे। 


आखिर में मैम, एक बार फिर से नव प्रकाशित बाल उपन्यास के लिए आपको हार्दिक बधाई। उम्मीद है इससे पूर्व आई पुस्तक 'तारा की अनोखी यात्रा' की तरह ही इस पुस्तक को भी भरपूर प्यार मिलेगा।

क्या आखिर में पाठकों को आप कुछ संदेश देना चाहेंगी?

पाठकों को लिए यही संदेश देना चाहूँगी कि लेखन एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और उसके साथ प्रकाशन भी। तो किसी भी पुस्तक को नकारने से पहले उस पुस्तक को लाने में की गई मेहनत के बारे में एक बार अवश्य सोचना चाहिए। किताबें खरीद कर पढ़ना जारी रखें इससे लेखक का हौसला भी बढ़ता है। बच्चों के हाथों में किताबें वयस्कों को ही पहुँचानी होंगी और हमेशा बने रहने वाली यह शिकायत कि आजकल के बच्चे पढ़ते नहीं है, इसे दूर करने के लिए वयस्कों को पुनः अपने लिए किताबें खरीदने की आदत विकसित करनी होगी।


*****

तो यह थी लेखिका सुमन बाजपेयी से हुई हमारी बातचीत। उम्मीद है यह साक्षात्कार आपको पसंद आया होगा। साक्षात्कार के विषय में अपने विचार आप हमें कमेंट के माध्यम से बता सकते हैं। 


क्रिस्टल सम्राज्य 



पुस्तक विवरण:

अजीब सपने, सुनहरा शेर, अद्भुत उड़ने वाला घोड़ा और रंग-बिरंगे जादुई क्रिस्टल... क्या इन सब का बिन्नी के जन्म से कोई संबंध है? क्रिस्टल साम्राज्य का रहस्य क्या है? और क्या है बिन्नी के सपनों का सच? विचित्र आकृतियां बने बच्चे क्या अपने असली रूप में आ पाएंगे? जानने के लिए पढ़िए पग-पग पर एक रहस्य को सुलझाता यह रोमांचक उपन्यास।

प्रकाशक: फ्लाईड्रीम्स | पृष्ठ संख्या: 130 | पुस्तक लिंक: अमेज़न


******



अगर आप एक बुक जर्नल पर प्रकाशित अन्य साक्षात्कार पढ़ना चाहते हैं तो निम्न लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:

साक्षात्कार 


अगर आप लेखक हैं, अनुवादक हैं या प्रकाशक हैं और हमारे पटल के माध्यम से पाठको तक अपनी बातचीत पहुँचाना चाहते हैं तो आप contactekbookjournal@gmail.com पर हमसे संपर्क कर सकते हैं। 




FTC Disclosure: इस पोस्ट में एफिलिएट लिंक्स मौजूद हैं। अगर आप इन लिंक्स के माध्यम से खरीददारी करते हैं तो एक बुक जर्नल को उसके एवज में छोटा सा कमीशन मिलता है। आपको इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। ये पैसा साइट के रखरखाव में काम आता है। This post may contain affiliate links. If you buy from these links Ek Book Journal receives a small percentage of your purchase as a commission. You are not charged extra for your purchase. This money is used in maintainence of the website.

Post a Comment

6 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
  1. बढ़िया, सुमन जी को बधाई

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी साक्षात्कार आपको पसंद आया यह जानकर अच्छा लगा। आभार।

      Delete
  2. फैंटेसी से भरपूर बाल उपन्यास के लिए सुमन जी को हार्दिक बधाई। बालजगत में इसे भरपूर प्यार मिलेगा।

    ReplyDelete
  3. आदरणीय सुमन वाजपेई जी एक प्रख्यात लेखिका है और उनसे लिया गया साक्षात्कार अपने आप में उल्लेखनीय है। आपको और आदरणीय सुमन वाजपेई जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
    Replies
    1. साक्षात्कार आपको पसंद आया यह जानकर अच्छा लगा। हार्दिक आभार।

      Delete

Top Post Ad

Below Post Ad

चाल पे चाल