नेवर गो बैक | लेखक: ली चाइल्ड | शृंखला: जैक रीचर | अनुवादक: विकास नैनवाल

लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक के उपन्यास का प्री ऑर्डर शुरू



अपराध साहित्यकार सुरेन्द्र मोहन पाठक (Surender Mohan Pathak) अपने प्रशंसकों के बीच खासे प्रसिद्ध हैं। उनकी पुस्तकों का उनके प्रशंसकों का बेसब्री से इंतजार रहता है। फिर चाहे वो उनकी नई किताब हो या वर्षों से आउट ऑफ प्रिन्ट रही उनकी पुस्तकें, पाठक इनका इंतजार करते हैं। 

इसी क्रम में हाल ही में लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक (Surender Mohan Pathak) की पुस्तक ‘दीवाली की रात’ (Deewali Kee Raat) को साहित्य विमर्श प्रकाशन (Sahitya Vimarsh Prakashan) द्वारा पुनः प्रकाशित किया गया है और पुस्तक पाठकों के लिए प्री ऑर्डर के लिए उपलब्ध है। सुरेन्द्र मोहन पाठक (Surender Mohan Pathak) का यह उपन्यास सर्वप्रथम वर्ष 1989 में लुगदी कागज में प्रकाशित हुआ था और काफी वर्षों से आउट ऑफ प्रिन्ट चल रहा था। अब साहित्य विमर्श प्रकाशन (Sahitya Vimarsh Prakashan) नवीन साज सज्जा के साथ इस पुस्तक को वापस पाठकों के समक्ष लेकर आ रहा है। 

'दीवाली की रात' (Deewali Kee Raat) लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक (Surender Mohan Pathak) द्वारा रचित सुनील शृंखला (Sunil Series) का 97वाँ  उपन्यास है। उपन्यास एक मर्डर मिस्ट्री जहाँ पर सुनील पर कत्ल का इल्जाम तब आयद होता है जब उसके फ्लैट में एक लाश पायी जाती है। सुनील, जो कि ब्लास्ट नामक अखबार का खोजी पत्रकार है, कैसे इस मुसीबत से छूटता है इस उपन्यास का कथानक बनता है। 

साहित्य विमर्श प्रकाशन (Sahitya Vimarsh Prakashan) द्वारा इस पुस्तक को पेपरबैक और हार्डबैक दो संस्करणों में  लाया जा रहा है। जहाँ फिलहाल प्री ऑर्डर में पेपर बैक की कीमत 175 रुपये रखी गयी  है और हार्डकवर की कीमत 339 रुपये रखी गयी है। 

ज्ञात हो साहित्य विमर्श प्रकाशन द्वारा पुनः मुद्रित की गयी यह सुरेन्द्र मोहन पाठक (Surender Mohan Pathak) की पाँचवी पुस्तक है। इससे पहले साहित्य विमर्श प्रकाशन (Sahitya Vimarsh Prakashan) द्वारा सुरेन्द्र मोहन पाठक (Surender Mohan Pathak) की पाँच पुस्तकें (निम्फ़ोमैनियाक,कुबड़ी बुढ़िया की हवेली, बैताल और शहजादी, जादूगरनी, मौत का विलाप) पुनः प्रकाशित कर चुका है। 


'दीवाली की रात' का लिंक: 

हार्डकवर: साहित्य विमर्श | अमेज़न 

पेपरबैक: साहित्य विमर्श | अमेज़न 


साहित्य विमर्श और अमेज़न पर सुरेन्द्र मोहन पाठक की अन्य पुस्तकें:

साहित्य विमर्श | अमेज़न 


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6 Comments
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  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (12-10-2022) को  "ब्लॉग मंजूषा"  (चर्चा अंक-4579)  पर भी होगी।
    --
    कृपया कुछ लिंकों का अवलोकन करें और सकारात्मक टिप्पणी भी दें।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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    1. चर्चा अंक में मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार।

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  2. प्रस्तुत उम्दा जानकारी के लिए धन्यवाद भाई विकास जी!

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    1. जानकारी आपको पसंद आयी यह जानकर अच्छा लगा। आभार।

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  3. बहुत बढ़िया जानकारी।

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    1. लेख आपको पसंद आया यह जानकर अच्छा लगा, मैम।

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