फेमस फाइव और कारवाँ का सफर - एनिड ब्लाइटन | अनुवाद: डॉ सुधीर दीक्षित, रजनी दीक्षित

 संस्करण विवरण

फॉर्मैट: पेपरबैक | पृष्ठ संख्या: 275 | प्रकाशक: मंजुल बुक्स | शृंखला: फेमस फाइव #5 | अनुवादक: डॉ सुधीर दीक्षित, रजनी दीक्षित 

पुस्तक लिंक: अमेज़न

समीक्षा: फेमस फाइव और कारवाँ का सफर - एनिड ब्लाइटन | Review: Famous Five Aur Carvaan Ka Safar (Famous Five Go Off in a Caravan in Hindi)

कहानी 

गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं और इस बार बच्चे किरिन कॉटेज की जगह जूलियन डिक और एन के घर आए हुए थे। जॉर्ज भी टिम के साथ यहीं पर इस बार अपनी छुट्टियाँ मना रही थी। वह सभी इन छुट्टियों में  भी कुछ ऐसा रोचक काम करना चाहते थे जो उन्हें खतरे में भी न डाले और उन्हें मज़ा भी आए। पर उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।  

ऐसे में उन्होंने सर्कस के एक कारवाँ को गुजरते देखा और निर्धारित किया कि वह भी गर्मियों की छुट्टियाँ उसी झील के किनारे बिताएँगे जहां पर वह सर्कस वाले बिताएँगे।

वह लोग कहाँ जानते थे कि उनके लिए एक रोमाँच वहाँ पर इंतजार कर रहा था।

आखिर कैसा रहा पाँचो का यह कारवाँ का सफर?

वहाँ पर सर्कस के कारवाँनों  के अलावा और क्या उनकी प्रतीक्षा कर रहा था?


मुख्य किरदार 

जूलियन, जॉर्ज, डिक, एन, टिमी - फेमस फाइव 
नॉबी - वह बच्चा जो सर्कस के साथ जा रहा था
टाइगर डैन - नॉबी के अंकल जो सर्कस के जोकर थे
लुइस ऑलबर्ग उर्फ लू - एक कलाबाज जो टाइगर डैन का दोस्त था  
पोंगो - सर्कस का मसखरा वनमानुष 
बार्कर और ग्राउलर - नॉबी के कुत्ते
मिस्टर गोर्जियो - सर्कस का मालिक
लूसली - बंदरों की मालकिन
लैरी - हाथी का मालिक
मिस्टर एंड मिसेज मैकी - किसान दंपती जिनका फार्म हाउस उस जगह से नजदीक था जहां बच्चे रुके हुए थे...

मेरे विचार

'फेमस फाइव और कारवाँ का सफर' लेखिका एनिड ब्लाइटन के 1946 में प्रथम बार प्रकाशित हुए उपन्यास 'फाइव गो ऑफ इन अ कैरावान' (Five Go Off In a Caravan)  का हिंदी अनुवाद है। इस उपन्यास का अनुवाद डॉक्टर सुधीर दीक्षित और रजनी दीक्षित द्वारा किया गया है। अनुवाद अच्छा हुआ और पढ़ते हुए कहीं भी नहीं लगता है कि आप कोई अनुवाद पढ़ रहे हैं। यह फेमस फाइव शृंखला का पाँचवा उपन्यास है और मंजुल द्वारा हिन्दी में अनूदित करवाया गया इस शृंखला का आखिरी उपन्यास है। 

उपन्यास का कथानक गर्मियों की छुट्टियों में घटित होता है। गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी हैं और इस बार हमारे पाँच दोस्त किरिन कॉटेज जाने के बजाए जूलियन डिक और एन के घर में मौजूद हैं। जॉर्ज और टिम भी वहीं रह रहे हैं और उन्हें यह छुट्टी लगभग बोर ही कर रही है। वह इन छुट्टियों में को मनोरंजक बनाने के तरीके के विषय में सोच ही रहे होते कि एक सर्कस का कारवाँ उनके घर के आगे से गुजरता है और उनको कारवाँ में सफर करने का विचार आ जाता है। चूँकि जूलियन अब बढ़ा हो चुका है तो उसके माता-पिता जूलियन के भरोसे पर इन बच्चों को कारवाँ के सफर पर जाने की इजाजत दे देते हैं। हमारे पाँचों दोस्त इस सफर पर निकलते हैं और इस सफर में उनके साथ जो घटित होता है वही उपन्यास का कथानक बनता है। 


 उपन्यास के विषय में सबसे पहली चीज जो साफ करने योग्य है वह यह है कि इस उपन्यास में रोमांच काफी देर में आता है। 275 पृष्ठ और 23 अध्यायों में विभाजित उपन्यास के 191 वें पृष्ठ जो कि 16 वाँ अध्याय के अंत है से ही बच्चे को लगता है कि वह  एक रोमांचक अभियान से दो चार होने वाले हैं। 

एन ने थोड़ी सहमी आवाज में कहा, “आखिर हम रोमांचक अभियान के बीच में पहुँच ही गए।”

"और क्या," जूलियन बोला। “लेकिन प्यारी एन अगर तुम चाहो, तो तुम मिसेज मैकी के फार्म हाउस पर रुक जाना। तुम्हें हमारे साथ आने की जरूरत नहीं है।”

“अगर तुम लोग रोमांचक अभियान में हो, तो मैं भी हूँ।”, एन बोली। “मैं बाहर रहने की तो सोच भी नहीं सकती।”
(पृष्ठ 191-192

वैसे तो उपन्यास में हमारे पाँचों दोस्त किसी रोमांचक घटनाक्रम से काफी देर में दो चार होते हैं लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि इसका पहले का उपन्यास नीरस है। उपन्यास में फाइव का कारवाँ का सफर मनोरंजन करता है। एन के अंदर एक कुशल गृहणी है यह भी इसमें दिखता है। अच्छी बात यह है कि फाइव में दो लड़कियाँ हैं और दोनों की प्रवृत्तियाँ अलग-अलग हैं और लेखिका ने किसी भी प्रवृत्ति को कमतर नहीं दिखाया है। जहाँ जॉर्ज में कुछ खूबी है तो वहीं एन में भी कुछ खूबियाँ हैं और यह खूबियाँ इन्हें विशिष्ट बनाती हैं। इस उपन्यास में तो  एन एक तरह से उन सभी का ख्याल रखती है और चूँकि वह घर सम्भालने में सबसे ज्यादा दक्ष है तो सभी उसका कहा मानते भी हैं। 

वहीं उपन्यास में फाइव का दोस्त नॉबी भी है जिसके माध्यम से फाइव और साथ में पाठक भी सर्कस और उसके जानवरों से मिलते हैं। नॉबी के साथ फाइव के व्यवहार से ही आप सीखते हैं कि दोस्तों में दिल मिलने चाहिए। आर्थिक स्थिति जैसी भी हो लेकिन अगर आपके दिल मिलते है तो हर एक दोस्त जरूरी हो जाता है।  सर्कस में होने वाली यह मुलाकात काफी रोचक रहती है। नॉबी का पालतू वनमानुष तो ऐसी हरकतें करता है कि उन हरकतों पर आप मुस्कराए बिना नहीं रह पाते हैं। अपने पाँचों दोस्तों को यूँ सर्कस में मस्ती करते हुए देखकर आप ये सोचे बिना नहीं रह पाते कि काश आप भी किसी सर्कस में जाकर मस्ती करते तो कितना मज़ा आता। काश पोंगो जैसा आपका भी दोस्त होता तो आपकी लाइफ कितनी अच्छी होती। आप उसकी शैतानियों पर कितना हँसते।  


उपन्यास में नॉबी की जिन्दगी के कुछ स्याह पहलुओं से भी आप वाकिफ होते हैं। लेकिन फिर इन परेशानियों में नॉबी जिस प्रकार मस्त मौला बना रहता है वह आपको प्रेरित ही करता है। नॉबी से मैं आगे दोबारा जरूर मिलना चाहूँगा। 

16 वें चैप्टर के बाद जब कथानक रोमांचक कारनामें की तरफ मुड़ता है तो कथानक में तनाव बढ़ जाता है। उपन्यास में दो खलनायक डैन और लू हैं जो कि शुरुआत से ही आपको पसंद नहीं आते हैं। बच्चे भी अपनी जासूसी प्रवृत्ति के कारण ऐसी मुसीबत में फँस जाते हैं कि आप उँगलियाँ दबाकर उनके उससे निकलने का इंतजार करने लगते हैं। वह किस तरह और किस-किस की मदद से इस मुसीबत से पार पाते हैं यह देखना रोचक रहता है। 

उपन्यास का अंत भावुक करने वाला है। जब फाइव अपने नवीन दोस्तों को छोड़कर जाते हैं तो आप भी भावुक हुए बिना नहीं रह पाते हैं। 

उपन्यास में कहीं कोई कमी तो नहीं है। हाँ, इक्का-दुक्का जगह प्रूफ की कुछ गलती है लेकिन इतनी कम है कि वह इतनी खटकती नहीं है। 

अंत में यही कहूँगा कि उपन्यास मुझे तो बहुत पसंद आया। अगर आप केवल रोमांचक कारनामों के लिए इस शृंखला के उपन्यास पढ़ते हैं तो हो सकता है देर में रोमांचक कारनामें का शुरू होना आपको थोड़ा खले। परंतु अगर आप मेरी तरह पाँचों दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए उपन्यास पढ़ते हैं तो आपको यह जरूर पसंद आएगा। 


पुस्तक लिंक: अमेज़न


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3 Comments
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  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (21-09-2022) को  "मोम के पुतले"   (चर्चा अंक 4559)  पर भी होगी।
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    कृपया कुछ लिंकों का अवलोकन करें और सकारात्मक टिप्पणी भी दें।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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    1. चर्चा अंक में पोस्ट को शामिल करने हेतु हार्दिक आभार।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज बुधवार (21-09-2022) को  "मोम के पुतले"   (चर्चा अंक 4559)  पर भी होगी।
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    कृपया कुछ लिंकों का अवलोकन करें और सकारात्मक टिप्पणी भी दें।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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