भेड़िया आया | राज कॉमिक्स | तरुण कुमार वाही

 संस्करण विवरण:

फॉर्मैट: पेपरबैक | प्रकाशक: राज कॉमिक्स | शृंखला: भेड़िया | लेखक: तरुण कुमार वाही | चित्रांकन: धीरज वर्माइंकिंग: राजेन्द्र धौनी



कहानी 

भेड़िया देवता की मूर्ति के चुराए जाने पर जंगल के कबीले वासियों में डर का माहौल था। सभी इस बात से आशंकित थे कि आगे न जाने क्या होगा? बस उन्हें इसका पता था कि जो होगा बुरा ही होगा और इसलिए उन्होंने भेड़िया देवता की मूर्ति को वापिस स्थापित करने का मन बना लिया था।

पर वह कहाँ जानते थे कि भेड़िया अब मूर्ति नहीं रहा था। वह जागृत हो चुका था।  

वहीं दूसरी और जंगल के जानवरों पर एक बहुत बड़ी मुसीबत टूटने वाली थी।

किंग जबरान एक तस्कर था और उसने तस्करी के लिए जानवरों को इकट्ठा करने का ऐसा तरीका ढूँढा था जो कि उसकी तस्करी की जरूरत को एक झटके से पूरा कर देगा। उसे इस बात से कोई लेना देना नहीं था कि इस तरीके से वह कई निरीह जानवरों की हत्या करने वाला था। 

भेड़िया देवता के चुराए जाने का क्या असर पड़ने वाला था?

क्या जंगल वासी वाकई किसी मुसीबत में पड़ने वाले थे? क्या वो भेड़िया को दोबारा स्थापित कर पाए?

भेड़िया के जागृत होने का क्या नतीजा हुआ?

किंग जबरान की योजना क्या था?


विचार 

'भेड़िया आया' भेड़िया शृंखला  की दूसरी कॉमिक बुक है।  जहाँ पिछली कॉमिक बुक की कहानी परशुराम शर्मा द्वारा लिखी गई थी वहीं इस कॉमिक की कहानी तरुण कुमार वाही द्वारा लिखी गई है। चित्रांकन धीरज वर्मा द्वारा ही किया गया है।

प्रस्तुत कॉमिक बुक में जागृत होने के पश्चात भेड़िया जंगल में मौजूद अपने पहले खलनायक से जूझता और उसे खत्म करता दिखता है। यह तो सभी जानते हैं जंगल में शिकारी निरीह जानवरों का शिकार उनके शरीर के अंगों के लिए करते आए हैं। इसके बाद उन जानवरों के अंगों की तस्करी कर वो इन्हें ऊँचे दामों में बेचा करते हैं। प्रस्तुत कॉमिक का खलनायक भी ऐसा ही तस्कर किंग जबरान है। जब काफी मेहनत करने के बाद भी वह अपनी जरूरत का कुछ ही हिस्से की तस्करी कर पाता है तो वह अपने दाहिने हाथ क्रूटो  को इस मांग को पूरा करने को कहता है। वह किस तरह इस मांग को पूरा करने की कोशिश करता है? और भेड़िया उन्हें कैसे रोकता है? यही सब कॉमिक बुक की कहानी बनती है।

इस कॉमिक बुक में भेड़िया की कॉमिक्सो के मुख्य पात्र फूजो बाबा भी पहली बार एंट्री होती है। पाठक कॉमिक्स से जानते हैं कि वह 150 साल के हैं और सभी जानवरों की बोलियाँ बोल लेते हैं। वह जानवरों से प्यार करते हैं इसी कारण कॉमिक के अंत में भेड़िया और फूजो बाबा के बीच में एक समीकरण बन जाता है जो कि आगे आने वाले कॉमिक में रोचकता लाएगा। 

कॉमिक बुक रोचक है और एक्शन से भरपूर है। कहानी सीधे तौर पर आगे बढ़ती है तो इसमें कोई मोड़ नहीं हैं।  कॉमिक बुक के माध्यम से लेखक ने एक ऐसी समस्या को उजागर करने का प्रयास किया है जिससे हम लोग जूझ रहे हैं। इंसान अपने स्वार्थ के चलते कितना क्रूर हो सकता है यह भी इसमें दिखता है। क्रूटो की क्रूरता विचलित भी कर सकती है। वहीं कॉमिक में क्रूरता के मामले में भेड़िया खलनायकों से बीस ही साबित होता है।  

कहानी की कमी की बात करूँ तो इसका मुख्य खलनायक यानी किंग जबरान मुझे थोड़ा कमजोर लगा। उससे बेहतर मुझे क्रूटो लगा जिसके साथ भेड़िया का मुकाबला रोचक था। खैर, भेड़िया एक अलग ही चीज है और इसलिए शुरुआत में मुख्य खलनायक का उससे काफी कमजोर होना लाजमी है लेकिन अच्छा होता कि मुख्य खलनायक कम से कम क्रूटो से बेहतर होता। तब कॉमिक थोड़ा और रोमांचक बन सकती थी। 

कॉमिक बुक की दूसरी कमी कहानी पर तो असर नहीं डालती है लेकिन प्रकाशक या आर्टिस्ट का आलस्य दर्शाती है। इसके पहले पेज में एक अखबार देखने को मिलता है जिसमें भेड़िए की मूर्ति की चोरी की खबर होती है। अब इस खबर का शीर्षक तो भेड़िए से जुड़ा होता है लेकिन खबर इसराइल की होती है। खबर नहीं लिखनी थी तो शीर्षक ही दिखाते और टेक्स्ट ब्लर कर देते।

आर्टवर्क की बात करूँ तो कॉमिक बुक का आर्ट धीरज वर्मा ने बनाया है जो कि अच्छा है। हाँ, इतना फैन्सी नहीं है कि आपकी आँखें उस पर टिक कर रह जाएँ लेकिन इतना बुरा भी नहीं है कि यह आपको चुभे। कहीं बीच में है  और कहानी को यह उभारने में मदद करता है।

अंत में यही कहूँगा कि कॉमिक बुक एक बार पढ़ा जा सकता है। यह एक ठीक ठाक कॉमिक बुक है जो आपको बोर नहीं होने देता है। हाँ, मुख्य खलनायक थोड़ा और बेहतर होता तो कॉमिक बुक में रोमांच अधिक आ जाता।


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