नूरजहाँ का नैकलेस - जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा

संस्करण विवरण:

फॉर्मैट: पैपरबैक | पृष्ठ संख्या: 124 | प्रकाशन: नीलम जासूस कार्यालय | शृंखला: जगत 

किताब लिंक: अमेज़न


कहानी

वह नूरजहाँ का हार था जिसे लेने के लिए लंदन में दुनिया भर के जोहरी आने वाले थे। सबकी इच्छा उस पर आधिपत्य जमाने की थी। 

लेकिन कोई और भी था जो उस हार को पाना चाहता था। 

और उसका मकसद उस हार को खरीदना नहीं अपितु मालिक की नाक के नीचे से उड़ाना था। 

यह काम विजय अंचला के लिए करने वाला था। विजय और अंचला दोनों ही अपराधी थी और नकली नामों से ही जीवन व्यतीत करते थे। अंचला अब तक 18 बार शादी कर चुकी थी और अब उसने विजय के समक्ष शर्त रखी थी कि अगर वो नूरजहाँ का हार उसे लाकर देगा तो वह उसकी होकर रह जाएगी। 

पर विजय जानता था कि अंचला क्या है? वह उसके पूर्वपतियों के हश्र से भी वाकिफ था।  लेकिन फिर भी उसने हार उसके लिए लाने का फैसला किया। 

आखिर किसे मिला यह नूरजहाँ का हार?

आखिर यह अंचला और विजय कौन थे? 

क्या अंचला सचमुच विजय से प्यार करती थी या वो उसका उन्नीसवाँ शिकार बनने वाला था?


मुख्य किरदार


अंचला - एक ठग जिसने कई मर्दों से शादी की और उन्हें ठगा था 
विजय - एक ठग जिसके साथ विजय शादी करना चाहती थी
डीन स्मिथ - मैकेंजी ज्वेलर्स नामक फर्म का मालिक 
माधव जी - बंबई के प्रसिद्ध प्राइवेट जासूस 
सोमनाथ - माधव का सहकर्मी 
रंगनाथ - बंबई का मशहूर जौहरी 
राजेश - केन्द्रीय खुफिया विभाग के सीनियर जासूस 
जयंत - राजेश का सहयोगी और मित्र 
चक्रवर्ती - केन्द्रीय खुफिया विभाग का चीफ 
मगनलाल - रंगनाथ का बेटा 
पीटर मैकनाल्ड - स्कॉटलैंड यार्ड के इंस्पेक्टर


मेरे विचार

अंतरराष्ट्रीय ठग जगत लेखक ओम प्रकाश शर्मा (Om Prakash Sharma) के काफी उपन्यासों का स्थाई पात्र रहा है। जगत भले ही एक ठग है लेकिन उसके अपने कुछ उसूल हैं और उन उसूलों पर कायम रहने के चलते केन्द्रीय खुफिया विभाग के सीनियर जासूस राजेश उसका सम्मान करते हैं। प्रस्तुत उपन्यास ‘नूरजहाँ का नैकलेस’  (Noorjahan Ka Necklace) जगत शृंखला का पहला उपन्यास है। उपन्यास नीलम जासूस कार्यालय (Neelam Jasoos Karyalay) द्वारा प्रकाशित किया गया है। 

उपन्यास के कथानक की शुरुआत बंबई के एक होटल से जरूर होती है लेकिन कथानक का मुख्य हिस्सा लंदन में ही घटित होता है। 

उपन्यास के केंद्र में नूरजहाँ का हार है जिसे डीन स्मिथ नामक अंग्रेजी जौहरी ऊँचे दामों में बेचना चाहता है। वह इसके लिए लंदन में एक नीलामी का आयोजन करता है जिसमें देश-विदेश के जौहरी इस हार को पाने की हसरत लिए पधारते हैं। 

वहीं जगत जो इस वक्त विजय बना हुआ है वह अपनी मौजूद प्रेमिका अंचला के लिए इसे हासिल करना चाहता है। वैसे तो जगत एक समझदार व्यक्ति है और वह जानता है कि स्कॉटलैंड यार्ड की सुरक्षा से इस हार को निकालने की सोचना शेर की माँद में जाकर शिकार निकालने सरीखा है लेकिन अंचला का जादू उस पर इस तरह हावी है कि वह यह कार्य करने का बीड़ा उठा ही लेता है। लंदन में इस हार की नीलामी होने वाली है और वह किस तरह से इस हार को पाने की योजना बनाता है यही उपन्यास की विषय वस्तु बनता है। 

उपन्यास में जगत तो है ही वहीं उसके विपक्ष में बंबई के मशहूर प्राइवेट डिटेक्टिव माधव जी अपने सहायक के साथ मौजूद हैं। वहीं केन्द्रीय खुफिया विभाग का सीनियर जासूस राजेश भी इधर मौजूद है। जहाँ प्राइवेट डिटेक्टिव माधव जगत के लंदन होने से अंजान रहते हैं और वह एक रंगनाथ नामक बंबई के जौहरी के लिए सुरक्षा मुहैया करवाते हैं। वहीं दूसरी तरफ राजेश जगत का पीछा करते करते ही लंदन पहुँचते हैं। 

उपन्यास का कथानक रोचक है। जगत किस तरह हार को पाने की योजना बनाता है यह देखना रोचक रहता है। उपन्यास पढ़ते हुए मुझे लगा था कि वह कोई रोमांचक योजना बनाएगा लेकिन चूँकि वह ठग है तो रोमांच से ज्यादा दिमाग लगाने में विश्वास रखता है। लोगों को विश्वास में लेकर उनसे चीजों को हासिल करना उसका पेशा है और यहाँ भी वह ऐसा ही करता है। जगत दिमाग वाला है और उसका ध्येय कानून से दो कदम आगे रहना है। इसके लिए उसे कई बार कुछ कदम पीछे भी खींचने पड़े तो वह इसे अपने अहम पर नहीं लेता है। शायद यही बात है कि यह जगत इतना सफल ठग है और कानून से दो कदम आगे चलता है।

जगत के अलावा उपन्यास में अंचला का किरदार भी है। अंचला एक ऐसी लालची युवती है जो कि अद्वितीय सौन्दर्य की मालकिन है और इस कारण वह अपने इस गुण को कैश करने से नहीं चूकती है। वह जानती है कि अपने रूप से वह लोगों को नचा सकती है और वह यह कार्य बाखूबी करती है। उपन्यास में मुझे अंचला की कहानी सबसे ज्यादा रोचक लगी। इस कहानी को लेखक ने इस उपन्यास में संक्षिप्त रूप से दर्शाया है लेकिन मुझे लगता है खाली अंचला को केंद्र में रखकर एक अच्छा रोमांचक उपन्यास लिखा जा सकता है। 


उपन्यास की कमी की बात करूँ तो मुख्य तौर पर ऐसी कोई कमी मुझे नहीं लगी फिर भी कुछ चीजों को बेहतर किया जा सकता था। उपन्यास में एक दो जगह वर्तनी की गलतियाँ हैं जिन्हें अगले संस्करण में सुधारा जा सकता है। हाँ, अगर आप तेज रफ्तार लूट वाली या डकैती वाले उपन्यासों की अपेक्षा लगाकर इसे पढ़ेंगे तो शायद निराश हों। यह एक हाइस्ट नॉवल (ऐसे उपन्यास जिसमें लूट या डकैती को उपन्यास के मुख्य किरदार अंजाम देते हैं) नहीं है। उपन्यास में ऐसी एक घटना होती जरूर है लेकिन लेखक ने उसे एक ही पंक्ति में निपटा दिया है क्योंकि उसका जगत से कोई लेना देना नहीं होता है। वैसे मुझे लगता है उस घटना को थोड़ा विस्तार देते तो रोमांच के तत्व उपन्यास में बढ़ जाते। वहीं मुझे लगता है उपन्यास में जगत को किसी दूसरे ठग या ऐसे ही किसी पार्टी से कोई प्रतिस्पर्धा मिलती तो उपन्यास और रोमांचक बन सकता था। अभी तो केवल जगत और माधवजी और राजेश के बीच का मामला रहता है। और यह मामला भी इतना आमने सामने का नहीं होता है कि कोई अतिरिक्त रोमांच पैदा कर सके। जगत उपन्यास में इनसे अंत तक दो कदम आगे ही देखने को मिलता है। अगर उसकी जान कहीं पर साँसत में अटकती दिखती तो बेहतर रहता। 

उपन्यास के विषय में यही कहूँगा कि यह मुझे पठनीय लगा। जगत, अंचला, राजेश, माधव के किरदार मुझे पसंद आए। अंचला के किरदार को लेकर एक विस्तृत उपन्यास पढ़ने की इच्छा जहाँ मन में जगी वहीं बाकी के तीनों किरदारों को लेकर लिखे गए अन्य उपन्यासों को पढ़ने की इच्छा भी मन में उत्पन्न हुई। इन उपन्यासों को जरूर पढ़ना चाहूँगा। 

अगर आपने इस उपन्यास को नहीं पढ़ा है और धीमे कथानक पढ़ने से आपको कोई गुरेज नहीं है तो आपको इसे पढ़ना चाहिए। उपन्यास आपको पसंद आएगा।

किताब लिंक: अमेज़न


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2 Comments
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  1. जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी के उपन्यास एक अलग ही तरह के होते हैं। कथानक बहुत धीमा होता है।
    अच्छी समीक्षा, धन्यवाद।

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    Replies
    1. जी सही कहा। उपन्यास अलग तरह के होते हैं। लेख आपको पसंद आया यह जानकर अच्छा लगा। आभार।

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