परमात्मा शृंखला की भूमिका बाँधने में सफल होता है 'अब क्या होगा?'

संस्करण विवरण:

फॉर्मैट: ई-बुक | प्रकाशक: राज कॉमिक्स | पृष्ठ संख्या: 48 | शृंखला: परमात्मा #1 | परिकल्पना: विवेक मोहन | लेखक: तरुण कुमार वाही | चित्रांकन: दिलीप चौबे | इफेक्टस: प्रदीप सहरावत | कैलीग्राफी: अमित कठेरिया | संपादक: मनीष गुप्ता | अतिथि संपादक: मंदार गंगेले 

कॉमिक बुक लिंक: अमेज़न 


Comic Book Review: Ab kya hoga? | तरुण कुमार वाही | राज कॉमिक्स




कहानी 


दिल्ली की आँख था परमाणु। दिल्ली में हो रही हर चीज की उसे खबर रहती थी। यही कारण था कि वह हर तरह की चीजों से दो-चार होता रहता था। 

परंतु वह रात अनोखी थी। अचानक से मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी थी और मौसम विभाग तक इसका अनुमान नहीं लगा पाया था।  

उस रात परमाणु जिन चीजों से दो-चार हुआ उन्होंने उसे भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि अब क्या होगा? 

आखिर कैसी रात थी वो? 
मौसम विभाग क्यों बारिश का पता नहीं लगा पाया?
उस रात परमाणु किन-किन चीजों से दो-चार हुआ था?


मेरे विचार


हमारे पुराणो के अनुसार देवता  और देवदूत आसमान में कहीं रहते हैं । यह देवता और देवदूत किस तरह दिखते हैं कोई नहीं जानता है लेकिन फिर भी पौराणिक साहित्य में जो इनका विवरण मिलता है उसके अनुसार इन्हें कई बार चित्रित किया गया है। यह पौराणिक कथाएँ कितनी सच हैं या नहीं ये तो एक बहस का मुद्दा हो सकता है लेकिन इन पर लोगों की गहरी आस्था है। वहीं माना जाता रहा है कि देवता और देवता और देवतदूत समय-समय पर धरती पर आगमन करते रहते हैं। लेकिन यह सब द्वापर और सतयुग की बातें हैं। कलयुग में ऐसा होना शायद ही किसी ने सुना हो। लेकिन दिल्ली में ऐसा ही हुआ था और इसिलिये परमाणु हैरान था। 

‘अब क्या होगा’ परमाणु  की परमात्मा सीरीज का पहला कॉमिक बुक है। कॉमिक बुक का शुरुआती हिस्सा विनय की उलझनों को दिखाता है। हम देखते हैं कि कैसे वह शिप्रा और शीना रूपी दो पाटों के बीच पिस रहा है और खुद को किंकर्तव्यविमूढ़ सा पाता है। दिल्ली की बात करें तो दिल्ली में जो दिन साधारण सा प्रतीत हो रहा था वह असाधारण तब बन जाता है जब न केवल परमाणु को देवदूत मिलते हैं बल्कि उसका सामना एक राक्षस से भी होता है। वहीं कॉमिक का अंत परमात्मा, जिसके नाम पर यह शृंखला है,  के धरती पर अवतरण से होता है जो कि पाठक को शृंखला के अगले कॉमिक बुक के लिए उत्साहित कर देता है। 

कहानी में जहाँ एक तरफ परमाणु का भावनात्मक द्वन्द को लेखक ने उजागर किया है  वहीं इसमें एक्शन भी उपयुक्त मात्रा में मौजूद है।  खलनायक के रूप में दिशासुर प्रभावित करता है। परमाणु का उससे भिड़ना रोमांच पैदा करता है।  वहीं परमात्मा नामक जीव भी उत्सुकता जगाने में कामयाब होता है। परमात्मा की एंट्री काफी रोचक है और अब वह आगे क्या करेगा ये देखने की इच्छा मन में जगाती है।  

कहानी में कई ऐसे प्रश्न भी छोड़े गए हैं जिनके उत्तर मिलने की उम्मीद आपको अगले भाग में होगी। जैसे कि मौसम का हाल बताने वाली सैटेलाइट को किसने नष्ट किया था? उड़ते समय परमाणु की ड्रेस में जो खराबी आई थी वह क्या केवल एक इत्तेफाक था? क्या परमाणु शीना की बात मान जाएगा? यह परमात्मा कौन था और क्यों धरती पर आया था? यह खुद को देवदूत कहने वाले जीव असल में क्या देवदूत ही थे या इसके पीछे कोई गहरा राज था? 

यह सभी प्रश्न कॉमिक के अंत में आपके दिमाग में भी जरूर आएंगे और मेरा यकीन है कि आप इनके उत्तर पाने के लिए इस शृंखला का अगला भाग जरूर पढ़ते चले जाओगे।

कथानक की कमी की बात की जाए तो मुझे लगता है कि लेखक को इंस्पेकटर विनय को इतना गावदी भी नहीं दिखाना चाहिए। उससे ज्यादा खुर्राट तो शिप्रा इसमें लगती है।  कम से कम कॉमिक में मौजूद साधारण गुंडों वाले प्रसंग में उसे थोड़ा कोशिश करते हुए दिखाया जा सकता था। आखिर वो एक प्रशिक्षित अफसर जो है।   

आर्टवर्क की बात की जाए तो प्रस्तुत कॉमिक बुक में आर्टवर्क दिलीप चौबे द्वारा किया गया है और इफेक्टस के साथ मिलकर यह खिलकर आता है। इसका ग्लॉसी लुक ई संस्करण में भी महसूस होता है।  हाँ, जहाँ पहले का विनय एक मर्द जैसा लगता था वहीं दिलीप जी का विनय एक मेट्रोसेक्शुअल लड़का सा प्रतीत होता है जो कि नई पीढ़ी को तो शायद पसंद आए लेकिन पुराने की पीढ़ी को कैसा लगता है यह जानना रोचक होगा। 

अंत में यही कहूँगा कि एक शृंखला की भूमिका के रूप में 'अब क्या होगा?' पूर्णतः सफल होती है।  यह न केवल मुख्य पात्रों को कहानी में रोचक ढंग से लाती है बल्कि साथ ही आगे वाले भागों के लिए उत्सुकता भी जगा देती है। मुझे कॉमिक बुक पसंद आई। अगर नहीं पढ़ी है तो पढ़ सकते हैं। 


कॉमिक बुक लिंक: अमेज़न 


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