एक नयी सुपर हीरो कॉमिक बुक श्रृंखला की रोमांचक शुरुआत है गर्व | फिक्शन कॉमिक्स | आशुतोष सिंह राजपूत

संस्करण विवरण:

फॉर्मैट: ई-बुक | प्लैटफॉर्म: प्रतिलिपि | श्रृंखला: नेक्टर #1 | लेखक: आशुतोष सिंह राजपूत | चित्रांकन: सुशांत पंडा, विकास सतपथी | कलर्स: संगीता त्रिपाठी |  कलर इफेक्ट: बसंत पंडा, शादाब सिद्दकी | कैलीग्राफी: निशांत पराशर | सह-संपादक: मंदार गंगेले, अनुराग कुमार सिंह  

कॉमिक बुक लिंक: प्रतिलिपि | फिक्शन कॉमिक

comic book review - garv | fiction comics

कहानी 

बिलासा सिटी में घूम रहा था शिकारी। उसने टीकाराम आजाद को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। टीकाराम आजाद एक देशभक्त थे जिनका बिलासा सिटी में काफी नाम था। उनकी मौत ने पूरे बिलासा सिटी में हड़कंप मचा दिया था। 

अब शिकारी ने धमकी जारी करके कहा था कि वह 26 जनवरी तक बिलासा सिटी में मौजूद देश के रंगों का सफाया कर देगा। अपनी इस धमकी सी जुड़ी उसने एक पहेली भी जारी की थी। 

आखिर कौन था यह शिकारी? 

वह देश के रंगों को क्यों खत्म करने वाला था? आखिर ये देश के रंग क्या थे?

क्या उसे कोई रोक पाएगा?

विचार

फिक्शन कॉमिक्स हाल के वर्षों में हिन्दी कॉमिक बुक इंडस्ट्री में एक चमकता हुआ नाम बनकर उभरा है। इस प्रकाशन के द्वारा प्रकाशित कॉमिक बुक्स ने मेरा ध्यान अपनी तरफ खींचा है और मैं काफी वक्त से इस प्रकाशन के कॉमिक बुक पढ़ना चाहता था लेकिन मौका लग नहीं पा रहा था। ऐसा नहीं है कि मैं उनकी वेबसाईट पर नहीं गया था लेकिन वहाँ कॉमिक बुक की जानकारी पूरी न होने के कारण इसी पशोपेश में रहता था कि कॉमिक लूँ या नहीं। ऐसे में जब प्रतिलिपि पर मैंने फिक्शन कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित कॉमिक बुक देखा तो इसे पढ़ने का मौका मैं चूक नहीं सकता था। 

प्रस्तुत कॉमिक बुक पर आएँ तो गर्व नेक्टर शृंखला का पहला कॉमिक बुक है। इस कॉमिक बुक का कथानक एक काल्पनिक शहर बिलासा सिटी में घटित होता है।  चूँकि यह कॉमिक बुक शृंखला का पहला कॉमिक है तो कॉमिक की शुरुआत नेक्टर और ब्लू आय की एंट्री से होती है जहाँ वो लोग कुछ जरायमपेशा लोगों की धुलाई करते नजर आते हैं। उसी वक्त शहर के दूसरे हिस्से में एक खलनायक  शिकारी भी अपना कार्य करता पाठकों को दिखाई देता है। 

जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है वैसे है नेक्टर और ब्लू आय के बारे में काफी ऐसी बातें पता लगती चली जाती हैं जो कि इन किरदारों में आपकी रुचि जागृत करती चली जाती हैं। यह दोनों एक साथ कब आए? इन्हें यह ताकतें  कब और क्यों दी गयी? नेक्टर किस बीमारी से ग्रसित है? प्रोफ़ेसर अमृतराज कौन है और उनकी प्रयोगशाला कब और क्यों बनी? क्या नेक्टर से पहले भी कोई नेक्टर था, जिसका जिक्र मास्टर भी करता है, और क्या इस नेक्टर ने उसकी जगह ली है? ऐसे कई प्रश्न कहानी पढ़ते हुए आपके मन में जागृत होते हैं जो कि इन किरदारों से दुबारा मिलने की इच्छा आपके मन में जगा देते हैं। वहीं नेक्टर और ब्लू आय के बीच का समीकरण रोचक है और इनके आपसी नोकझोंक पढ़ने में मज़ा आता है। लेखक ने इन्हें एक मजाकिया लहजा दिया है जो कि कहानी को मनोरंजक बनाता है। नेक्टर और ब्लू आय के नाम के पीछे क्या कारण है यह भी मैं जरूर जानना चाहूँगा।  इनका एक साथी ब्रेन भी कॉमिक में है जो कि मशीन है। वह भी रोचक है और नेक्टर के साथ उसकी बातचीत हास्य भी पैदा करती है। उम्मीद है उसके विषय में आगे आने कॉमिक में और पढ़ने को मिलेगा।  

वही दूसरी तरफ शिकारी कौन है और वह जो कर रहा क्यों कर रहा है यह चीज भी आपको कहानी पढ़ते हुए पता चलती जाती है। आपको यह भी पता चलता है कि शिकारी असल में मास्टर के लिए काम कर रहा है। मास्टर कहानी का मुख्य खलनायक है जो कि जितना क्रूर है उतना ही कुटिल भी है। वह एक तगड़ा खलनायक है जो कि ब्लू आय और नेक्टर से दो कदम आगे ही खड़ा दिखता है। वह जो कर रहा है वह क्यों कर रहा है? यह एक प्रश्न है जिसका उत्तर जानने के लिए आप पृष्ठ पलटते चले जाते हैं।  

कहानी की शुरुआत ही एक्शन से होती है और यह एक्शन अंत तक बना रहता है। जहाँ शिकारी और नेक्टर ब्लू आय के बीच का युद्ध रोमांच पैदा करता है। वहीं शिकारी की पहेलियाँ और यब सब करने के पीछे उसकी मंशा जानने के लिए आप कॉमिक के पृष्ठ पलटते चले जाते हैं। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है इसमें ट्विस्टस भी आते हैं जो कि रोमांच बरकरार रखते हैं । मास्टर की कहानी जब आखिर में आपको पता चलती है तो आप काफी कुछ सोचने को मजबूर भी हो जाते हो। मास्टर जैसे कई लोग भारत में मौजूद हैं। उनके कदम गलत जरूर हैं लेकिन अगर उनके कारणों को देखा जाए तो एक तरह से उनके प्रति थोड़ी सहानुभूति भी होती है। आप यही सोचते हो कि काश इसने कानून और लोकतंत्र से बाहर जाकर नहीं बल्कि इसी के अंदर रहकर अपनी लड़ाई लड़ी होती तो वह अपने जैसे कई शोषितों के लिए प्रेरणा बन सकते थे लेकिन गलत रास्ते में चलते से उन्हें केवल आतंकवादी और खलनायक का तमगा ही मिल पाता है जिनको सजा दिलाई जानी जरूरी हो जाती है क्योंकि उनके क्रियाकलाप कई मासूम लोगों का भी नुकसान कर देते हैं।

इस कॉमिक की अच्छी बात यह भी है इसी कॉमिक में इस कहानी को पूरा करा गया है। वरना भाग वाले कॉमिक में भाग जुटाना अलग परेशान करता है और इस कारण भाग वाले कॉमिक मुझे पसंद नहीं आते हैं।  

कॉमिक बुक के आर्टवर्क की बात करूँ तो इसका आर्ट सुशांत पंडा और विकास सथपथी द्वारा किया गया है। सुशांत पंडा अनुभवी आर्टिस्ट हैं और यह अनुभव इधर दिखता है। आर्टवर्क अच्छा है और इसका कहानी के साथ बढ़िया तालमेल बैठता है । लेकिन फिर भी कुछ बातें थीं जिनका ख्याल रखा जा सकता था। कॉमिक के कई किरदार भारतीय नहीं लगते हैं विशेषकर गैंग वाले लोग तो सभी विदेशी ही लगते हैं। इनका चेहरा मोहरा भारतीय बनाया जा सकता था। वहीं एक और चीज मैंने नोटिस की कि कॉमिक बुक में मुझे एक भी किरदार श्याम वर्णी नहीं दिखा। भारतीय कॉमिक बुक की एक सबसे बड़ी कमी मुझे यही लगती है। भारत में ज्यादातर लोग श्याम वर्णी हैं लेकिन हिन्दी कॉमिक बुक में वह नदारद रहते हैं। सकारात्मक रूप से तो कम ही इस वर्ण के लोगों को दिखाया जाता है। फिक्शन कॉमिक में भी श्याम वर्णी लोगों का न होना मेरे लिए थोड़ा हैरान करने वाला था क्योंकि छत्तीसगढ़ में शायद अधिकतर लोग श्याम वर्णी या साँवले होते हैं। फिर चूँकि पंडा बंधु खुद छत्तीसगढ़ से आते हैं और नेक्टर शृंखला का यह घटनाक्रम बिलासा सिटी में बसाया गया है जो कि शायद बिलासपुर से प्रेरित है तो ऐसे में अगर श्यामवर्णी किरदार इसमें दिखते तो अच्छा रहता। कॉमिक बुक में श्यामवर्णी किरदारों की कमी खलती है। फिक्शन इस एरिया पर ध्यान दे तो अच्छा रहेगा।   

अंत में यही कहूँगा कि कॉमिक बुक पढ़कर मुझे तो मज़ा आया। कहानी में आने वाली पहेलियाँ, एक्शन और ट्विस्ट जहाँ कथानक में रुचि बनाए रखती हैं वहीं कहानी में नेक्टर और ब्लू आय से संबंधित ऐसे कई बिन्दु मौजूद हैं जो इन किरदारों के विषय में अधिक जानकारी पाने के लिए पाठकों को उत्सुक करते हैं। मैं इस शृंखला के दूसरे कॉमिक जरूर बुक पढ़ना चाहूँगा। 

साथ ही साथ प्रकाशन से भी कहना चाहूँगा कि अपनी वेबसाईट पर कम से कम कॉमिक से जुड़ी जानकारी पूरी रखें। अभी टाइटल और सीरीज में उसका नंबर छोड़कर उधर कुछ भी देखने को नहीं मिलता है। जबकि मेरा ख्याल है उधर कॉमिक के कथानक के प्रति उत्सुकता जगाता चंद लाइनों का ब्लर्ब (blurb) या सारांश होना चाहिए ताकि पाठक को पता लग सके कि कॉमिक बुक में उसे क्या पढ़ने को मिल सकता है। साथ ही कॉमिक बुक की पृष्ठ संख्या भी उधर दर्ज हो तो बेहतर रहेगा। इन सबके ना होने से केवल कवर देखकर पुस्तक ऑर्डर करना शायद कोई भी नया पाठक पसंद नहीं करेगा। 

क्या आपने नेक्टर शृंखला का यह कॉमिक पढ़ा है। आपको यह कैसा लगा? मुझे इस विषय में अपनी राय जरूर दीजिएगा। 

फिक्शन कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ऐसे कौन से पाँच कॉमिक्स हैं जिन्हें आप एक नये पाठक को पढ़ने की सलाह देंगे? अपने उत्तर कमेन्ट बॉक्स में जरूर लिखिएगा ताकि लेख पढ़ने वाले नये पाठकों को कुछ जानकारी मिल सके।  


कॉमिक बुक लिंक: प्रतिलिपि | फिक्शन कॉमिक



फिक्शन कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित अन्य कॉमिक उनकी वेबसाईट पर जाकर खरीदी जा सकती हैं:

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