सूरज पॉकेट बुक्स का नया सेट हुआ रिलीज़

सूरज पॉकेट बुक्स द्वारा अपने नये सेट की घोषणा हाल ही में की गई है। उनके इस नये सेट में छः उपन्यासों को रिलीज़ किया जा रहा है। इन छः उपन्यासों में जहाँ चार उपन्यास अपराध साहित्य के हैं वहीं दो  उपन्यास ऐतिहासिक गल्प भी है। अपराध साहित्य की श्रेणी में आने वाले उपन्यासों में परशुराम शर्मा का एक उपन्यास है जिसे पुनः मुद्रित किया जा रहा है, वहीं दो लेखक विकास सी झा के उपन्यास हैं और एक लेखक जितेन्द्रनाथ द्वारा किया गया जेम्स हेडली चेज के उपन्यास जस्ट अनदर सकर का हिंदी अनुवाद है। ऐतिहासिक गल्प में एक उपन्यास परशुराम शर्मा का है और एक लेखक देवेन्द्र पाण्डेय का है।

यह उपन्यास निम्न हैं:

सूरज पॉकेट बुक्स का नया सेट हुआ रिलीज़

बेनकाब - परशुराम शर्मा 

अल्जीरिया में मिशन को अंजाम देने के बाद अब बाज़ीगर को पुकार रहा था उसका देश- हिंदुस्तान । स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में पहुँचते भारत के सोने के कारोबार को रोकने के लिये विनाश के लिये जरूरी था कि प्रिंस शोम्बी तक पहुँचे जिसकी मिल्कियत थी ­– समुद्र के बीच स्थित एक रहस्यमय जंजीरा । 

क्या बाजीगर अपने मिशन में कामयाब हो सका ? 

मोस्को माई लव आई हेट यू - परशुराम शर्मा 

कुछ उपन्यास लफ़्ज़ों के पेचोखम से तराश कर जीवन्त किए जाते हैं और अपनी अमिट छाप भी छोड़कर जाते हैं। बेशक ‘मास्को माय लव’ और ‘आई हेट यू’ भी लफ़्ज़ों का खेल है जिसका पहला संस्करण 1978 में प्रकाशित हुआ था। जैसी बलिदानी गाथा की सनसनीखेज कल्पना इस कथानक में की गयी, बेशक हक़ीक़त में वैसा कुछ नहीं हुआ पर यह ‘कथानक’ सच के आईने की एक ऐसी परछाई है जो धुंधली तो है पर साफ दिखाई देती है। भारत की आज़ादी के महानायक सुभाषचन्द्र बोस और आज़ाद हिन्द फौजियों के साथ क्या ऐसा ही गुज़रा होगा, इसकी कल्पना इस उपन्यास में की गयी है।

ये कथानक ज़बरदस्त एक्शन के साथ अपनी छाप छोड़ते हुए एक संदेश देता है-‘रंग दे बसंती चोला’

जाल - विकास सी एस झा 

ट्रिपल मर्डर की एक ऐसी गुत्थी, जिसके तारों में क्राइम ब्रांच का एक ऑफिसर चंद्रशेखर त्यागी, खुद उलझ बैठा, और ऐसा उलझा की पनाह माँग गया। लोभ, महत्वाकांक्षा और हवस की एक ऐसी कहानी जिसमें क़ातिल तक पहुँचना तमाम पुलिस और क्राइम ब्रांच के लिए निहायत दुश्वारियों भरा था। ये कहानी क्राइम ब्रांच के उस ऑफिसर, चंद्रशेखर त्यागी के खुद को पाक-साफ साबित करने और उस जद्दोजहद की कहानी है, जिसमें वो गले तक फँसा पड़ा था। ये कहानी एक ऐसी बेइंतहा हुस्न की मल्लिका उर्वशी कालरा की भी कहानी है जिसने पति के होते हुए भी पढ़ाए मर्दों से संबंध रखे, बाद में जिसका अंजाम खुद उसके कत्ल के तौर पर सामने आया, और फिर शुरू हुआ कत्ल का एक सिलसिला। 

क्या क़ातिल पकड़ा गया ? कौन था क़ातिल ?

इच्छामृत्यु - देवेन्द्र पाण्डेय 

इच्छामृत्यु शब्द सुनते ही पितामह भीष्म की प्रतिमा समक्ष उभर आती है, जिन्हें इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था, अर्थात उनकी इच्छा के बिना मृत्यु भी उनके समक्ष नही फटक सकती। वे द्वापर में अकेले थे जिन्हें इच्छामृत्यु का वरदान मिला था किंतु इस युग मे कुछ शूरवीर ऐसे भी थे जिन्होंने मृत्यु की आँखों में आँखें डालकर उसे चुनौती दी। हजारों प्रहार सहे, मानवी क्षमता के हर मानक, हर क्षमता को ध्वस्त करते हुए भीषण शौर्य किया, रक्त की अंतिम बूंद तक तलवार थामे रहे, शत्रु भी जिनकी वीरता देख कर थर्रा उठा। वे मुट्ठीभर और शत्रु अनगिनत। अपने शौर्य और जिद से मृत्यु को भी प्रतीक्षा करने पर विवश कर देने वाले वीरों की शौर्य गाथा है यह। साक्षी बनिए इतिहास के उस हिस्से का जो मृत्यु पर मानवी इच्छाशक्ति की जीत और अदम्य शौर्य का प्रतीक है।

41 मील का दुर्गम सफर, 21 घण्टे और हजारों शत्रु।

एक युद्ध जिसने इतिहास की दिशा बदल कर रख दी।

मोहरा - विकास सी एस झा 

वो शख्स निराशा से भरा अपने कमरे में आत्महत्या करने की कोशिश में फंदे से लटकने ही वाला था कि तभी उसके फोन की घंटी बजी…..कुछ देर बाद फोन कट करते ही उस शख्स के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने आत्महत्या का विचार त्याग दिया। फोन करने वाले ने उसे एक काम सौंपा था। 

आखिर वो कौन सा काम था ? कौन था वह व्यक्ति जिसने निराशा से आशा की दुनिया में उस शख्स को वापस ले आया ?

माफिया और राजनीति से जुड़ी ट्रिपल मर्डर की एक अनोखी दास्तान जिसमे कौन वज़ीर था और कौन था मोहरा ये बता पाना मुहाल था। क्राइम ब्रांच ऑफिसर चंद्रशेखर त्यागी का एक और हैरतअंगेज कारनामा….मोहरा – ए मर्डर मिस्ट्री।

खाली हाथ - जेम्स हेडली चेज;अनुवाद जितेन्द्र नाथ 

हैरी बार्बर एक ऐसा अभागा था जो साढ़े 3 साल जेल में उस अपराध के लिये बंद था जो उसने कभी किया ही नहीं था। जेल से निकलने पर जब एक खूबसूरत औरत ने उसे सिर्फ एक फोन कॉल करने के लिए $50,000 देने की पेशकश की तो उसके पास ना कहने की कोई वजह नहीं थी। दुनिया का ये सबसे आसान काम उसके लिए क्या इतना ही आसान साबित हुआ ? 

क्या उसे कुछ हासिल हुआ या रह गया वो खाली हाथ…

झूठ, फरेब, लालच और किस्मत की टेढ़ी चाल से भरी एक उलझी हुई कहानी

सुप्रसिद्ध क्राइम लेखक जेम्स हेडली चेइज़ के उपन्यास ‘जस्ट अनदर सकर’ का जितेन्द्र नाथ द्वारा किया बेहतरीन हिन्दी अनुवाद। 

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तो यह हैं सूरज पॉकेट बुक्स के नये सेट के उपन्यास। उम्मीद है यह उपन्यास पाठकों का भरपूर प्यार पाएंगे।

सभी किताबें उनकी वेबसाइट पर जाकर प्राप्त की जा सकती हैं।

वेबसाइट लिंक: सूरज पॉकेट बुक्स 

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