समीक्षा: अमोघ - अनुराग कुमार सिंह


अनुराग कुमार सिंह जी की लिखी कहानियाँ वर्षो से राज कॉमिक्स में पढ़ते आ रहा हूँ। उनकी लिखी यह कहानियाँ  मेरी पसंदीदा भी रही है। अनुराग जी ने कुछ समय पहले उपन्यास जगत में "मुखौटे का रहस्य" नामक उपन्यास से कदम रखा। यह एक बाल उपन्यास था जो मुझे बेहद पसंद आया था। "अमोघ" इनका दूसरा उपन्यास है और एक सुपरहीरो उपन्यास है। 

कहानी में तीन सुपरहीरो हैं। धनुष श्रीनगर का क्राइम फाइटर है जिसने  "ओम दल" के नाम से एक संगठन बना रखा है जो आपराधिक तत्वों से लड़ती हैं। आग्नेय और वेदिका दिल्ली के क्राइम फाइटर है और इनका मार्गदर्शन पुरोहित नामक व्यक्ति करता है। 

कहानी एक धर्मगुरु द्वारा षड्यंत्र करके आसुरी शक्तियों को जागृत करने की है। जिनको रोकने के लिए धनुष , आग्नेय और वेदिका प्रतिबद्ध है। इस मिशन के चक्कर में इनकी टक्कर कई अलग अलग सुपर विलेन से होती है। इन तीनों युवाओं को आसुरी शक्तियों को रोकने के लिए "अमोघ चक्र" को जागृत करना होगा और इसके लिए चाहिए श्रीकृष्ण  के 'मोरपंख' और 'पाञ्चजन्य शंख' , जो छिपे है समुद्र में विलुप्त द्वारिका में। 

क्या धनुष, आग्नेय और वेदिका मोरपंख और पाञ्चजन्य शंख हासिल कर पाये? 

इस टीम ने असुरों को कैसे रोका? 

इन तीनों को इस लड़ाई में किन किन बाधाओं और सुपर विलेन्स का सामना करना पड़ा? 

इन्ही प्रश्नों के लिए यह उपन्यास पढ़ना पड़ेगा।

फ्लाईड्रीम्स पब्लिकेशन कुछ हटके किताबे ला रहा है। जिन विधा में बाकी पब्लिकेशन कतराते है उनमे फ्लाईड्रीम्स एक से बढ़कर एक किताब ला रहा है जो सहारनीय कार्य है। "अमोघ"  श्रृंखला की पहली बुक जरूर है पर इनका कारनामा पहला नही है। कहानी पढ़ने से पता चलता है कि तीनो सुपरहीरो नए नही है और पहले भी कई कारनामें दिखा चुके है। यह इनकी ओरिजिन स्टोरी नही है जैसे कि उम्मीद की थी।

कहानी की बात करूँ तो यह अच्छी है पर कुछ जगह पर प्रिडिक्टेबल है। आपको पता रहता है कि कहानी में क्या होने वाला है। अनुराग जी ने शुरुआत में बताया है कि इस कहानी का तानाबाना उन्होंने दूसरे सुपरहीरोज के लिए बुना था फिर बदल कर तीन नए सुपरहीरोज बनाये। इसका इम्पेक्ट कहानी पर साफ नजर आता है। कॉमिक्स रीडर तुरंत इस बात को पकड़ लेंगे की वह कौनसे सुपरहीरो थे। एक पाठक के तौर पर मुझे लगता है कहानी और बेहतर हो सकती थी। बुक पढ़ते समय कॉमिक्स पढ़ने जैसी फीलिंग आती है न कि उपन्यास की। "मुखौटे के रहस्य" मुझे पसंद आई थी पर "अमोघ" से मैं थोड़ा निराश हुआ हूँ। 

अमोघ की एक विशेष बात यह भी है कि इस उपन्यास के दो कवर बनाये गए है एक कवर सुशांत पंडा और बसंत पंडा ने जो किंडल वर्शन के लिए था और दूसरा कवर बनाया है नवनीत सिंह जी ने जो एक अच्छे आर्टिस्ट के साथ अच्छे कॉमिक्स फैन भी है। इनका आर्ट स्टाइल अलग हटके है। इनका बनाया कवर पेपरबैक के लिए था जो बहुत अच्छा बना है। मैं नवनीत जी के कॉमिक स्ट्रिप्स का हमेशा कायल रहा हूँ।

जिन्हें कॉमिक्स और बाल उपन्यास पसंद है यह बुक उन्हें जरूर पसंद आएगी। एक बार पढ़ सकते है। अनुराग जी के आगामी उपन्यासों का इंतज़ार रहेगा।

राकेश वर्मा


किताब: अमोघ | लेखक: अनुराग कुमार सिंह | किताब लिंक: अमेज़न , किंडल

राकेश वर्मा - परिचय

राकेश वर्मा - परिचय
राकेश वर्मा

राकेश वर्मा राजस्थान के जयपुर शहर के निवासी हैं। वह बी कॉम से स्नातक हैं। बचपन से उन्हें कॉमिक्स और कहानियाँ पढ़ने का शौक रहा है। 2015 से उन्होंने उपन्यास पढ़ने शुरू किये और अब उपन्यासों से उन्हें विशेष लगाव हो चुका है। पौराणिक-ऐतिहासिक गल्प और फंतासी श्रेणी के उपन्यास उनकी पहली पंसद रहती है।

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