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Tuesday, April 6, 2021

पुस्तक अंश: ताऊ जी और मुर्दों की सेना

ताऊ जी और मुर्दों की सेना लेखक राजीव द्वारा लिखा गया एक बाल उपन्यास है। यह ताऊ जी श्रृंखला का बाल उपन्यास है।  ताऊ जी डायमंड कॉमिक बुक्स का एक किरदार है जिसे लेकर उन्होंने कॉमिक बुक्स और बाल उपन्यास दोनों ही प्रकाशित किये हैं। इस श्रृंखला के बाल उपन्यासों और कॉमिक बुक्स में अक्सर ताऊ जी, जो कि वृद्ध जादूगर हैं, बुरे जादूगरों से लड़ते दिखाई देते थे। प्रस्तुत बाल उपन्यास  में भी ताऊ जी सोमाला नाम के जादूगर से भिड़ते हुए दिखाई दिए हैं। 

अब डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित यह बाल उपन्यास आउट ऑफ़ प्रिंट हो चुके हैं। मुझे यह बाल उपन्यास मिला तो इसका एक रोचक अंश आपसे साझा करने का लोभ मैं संवरण नहीं कर पाया। उम्मीद है यह अंश आपको पसंद आएगा। 


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पुस्तक अंश: ताऊ जी और मुर्दों की सेना

 

स अँधेरे में सिर्फ जादूगर सोमाला की दो चमकदार आँखें ही नजर आ रही थीं। 

जादूगर सोमाला ने आँखें बंद कर ली और मन्त्र जाप करने लगा। वह काली शक्ति काले जादू को जगाने के लिए मंत्र जाप कर रहा था। 

करीब एक घंटे तक वह लगातार आँखें बंद किये जाप करता रहा फिर एक घंटे बाद अचानक वहाँ का माहौल बदलने लगा - सोमाला ने मंत्र जाप और तेजी से पढ़ना शुरू कर दिए। 

कुछ देर बाद कमरे में जादूगर सोमाला के सामने पड़ी लाश के बिल्कुल पास एक धमाका हुआ और वहाँ धुआँ उठने लगा। 

सोमाला ने आँखें खोल दीं और उस धुएँ को देखने लगा। 

धीरे धीरे वह धुआँ एक अजीब सी भयानक आकृति में बदल गया। 

सोमाला ने हाथ जोड़कर उस आकृति के आगे सिर झुका दिया, 'काली शक्ति को उसका परम भक्त प्रणाम करता है।'

'बोल भक्त मुझे क्यों बुलाया है?' वहाँ एक अजीब सा खौफनाक स्वर उभरा। 

जादूगर सोमाला कुछ देर खामोश रहा फिर बोला - 'सौ मुर्दों को तो मैं ज़िन्दा कर चुका हूँ... यह एक सौ एकवाँ मुर्दा है। इसे आप जिन्दा करें और मुझे आशीर्वाद दें ताकि मैं कल से अपना विशेष अभियान शुरू कर सकूँ। फिर देखना आपके आशीर्वाद से यह सारी दुनिया मेरी शक्ति के सामने झुक जाएगी। उसके बाद दुनिया वाले मेरी और काली शक्ति की पूजा करेंगे। इस धरती से भगवान का नाम ही मिट जायेगा।'

'तू मेरा सच्चा भक्त है। मेरा आशीर्वाद हमेशा तेरे साथ है।  मैं तो खुद यह चाहता हूँ कि दुनिया वाले भगवान को भूलकर मेरी पूजा करें।'

'ऐसा ही होगा काली शक्ति।' जादूगर सोमाला ने कहा। 

"अच्छा मैं इसे जिंदा करता हूँ।" यह कह उस आकृति ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया। हाथ से एक लाल किरणों की लकीर-सी निकली और लाश के मुँह में समा गई। 

अगले ही पल लाश तड़पने और छटपटाने लगी। कुछ देर तक ऐसा ही होता रहा फिर लाश उठकर बैठ गई।

अब उसे लाश कहना गलत था क्योंकि अब वह फिर से जिन्दा हो चुकी थी - उसकी पलकें हिल रही थीं। होंठ फड़फड़ा रहे थे। वह साँस भी ले रहा था। अब वह एक मुर्दा नहीं बल्कि जिन्दा इनसान था। 

'सोमाला.....।' कमरे में काली शक्ति का स्वर उभरा- 'मेरी काली शक्तियाँ काले बादलों के पीछे तेरे लिए एक भयानक खतरा देख रही हैं।'

'कैसा खतरा..?' जादूगर सोमाला ने चौंककर पूछा। 

'एक इनसान है जो तेरे लिए बहुत बड़ा खतरा साबित होगा।'

'हा...हा... हा।' सोमाला ने खौफनाक कहकहा लगाया- 'एक इनसान और मेरे लिए खतरा साबित होगा।'

'हाँ, तू उसे साधारण इनसान मत समझ। वह तंत्र-मंत्र का बहुत बड़ा ज्ञाता है - उसके पास एक जादुई डंडा है इसके अलावा उसे कई साधुओं और योगियों का वरदान प्राप्त है। तेरी जानकारी के लिए बता दूँ - उसके हाथों तेरी ही तरफ बहुत बड़े-बड़े जादूगर मारे जा चुके हैं। उनमें जादूगर गोला, इब्लीस का मुर्दा और जादूसिंह प्रमुख हैं - अब तू खुद ही सोच ले वह इनसान कितना खतरनाक होगा।'

जादूगर सोमाला के चेहरा पर परेशानी की लकीरें उभर आईं- 'आपने तो मुझे चिंता में डाल दिया। अब आप ही बताइए मैं क्या करूँ।'

'घबड़ाने से काम नहीं चलेगा - हिम्मत से काम ले। तेरे पास मेरी दी हुई शक्तियाँ है तू बहादुर भी है। उससे मुकाबला कर। अगर तूने उस पर विजय प्राप्त कर ली तो समझ ले सारी दुनिया तेरी मुट्ठी में होगी।'

'ठीक है पहले उससे निपट लूँ फिर अपना अभियान शुरू करूँगा। उस इनसान का नाम क्या है?'

'उसका नाम ताऊजी है।'

'ताऊ जी।' जादूगर सोमाला दाँत पीसता हुआ बड़बड़ाया - 'मरने के लिए तैयार हो जा। तेरी ज़िन्दगी के दिन पूरे हो गये हैं।'

'अच्छा अब मैं जाता हूँ।' अदृश्य स्वर उभरा - 'घबराना मत। समय-समय पर मैं तेरी सहायता करता रहूँगा।'

यह कहकर वह भयानक आकृति धुएँ का रूप धारण करने लगी और फिर देखते ही देखते कमरे से गायब हो गई।

उस आकृति के जाने के बाद जादूगर सोमाला का ध्यान दोबारा जिंदा हो चुके मुर्दे की ओर गया। उसके होंठों पर शैतानी मुस्कराहट उभर आई।

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क्या आपने ताऊ जी श्रृंखला के बाल-उपन्यास या कॉमिक बुक्स पढ़े हैं? अगर हाँ तो इस श्रृंखला के अपने पसंदीदा बाल-उपन्यासों या कॉमिक बुक्स के नाम मुझसे जरूर साझा कीजियेगा। 

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©विकास नैनवाल 'अंजान'

4 comments:

  1. वाह सारांश तो काफी रोचक थी। मैं इसे ज़रूर पढ़ना चाहूंगा।।।

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  2. बहुत सार्थक और सुन्दर समीक्षा।

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