November 2020 Reads

दिसम्बर का महीना आ चुका है। ठंड बढ़ गयी है और यह साल भी समाप्ति की ओर अग्रसर है। मेरा  किताबें पढ़ने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस पोस्ट में मैं नवम्बर के महीने में पढ़ी गयी रचनाओं के विषय में बात करूँगा।

नवम्बर का महीना पढ़ने के लिहाज से अच्छा रहा। इस बार बारह रचनाओं को पढ़ने का अवसर मुझे मिला। इस बार ख़ास बात यह रही कि पेपरबैक और ई बुक रचनाओं को पढ़ने का अनुपात बराबर ही रहा। जी हाँ, इस बार 12 रचनाओं में से छः रचनाएँ ई-बुक ही थी। ई बुक की बात करूँ तो दो रचनाएँ मोबाइल में डेली हंट के एप्लीकेशन में पढ़ीं और बाकी चार रचनाएँ किंडल में ही पढ़ीं।

नवम्बर के महीने में ही मैंने किंडल अनलिमिटेड का स्बस्क्रिपशन भी ले लिया है। इससे अब काफी सारी पुस्तकों तक मेरे पहुँच हो चुकी है। अब मैं यह उम्मीद कर सकता हूँ कि आने वाले महीने में मैं जिन पुस्तकों को पढूँगा उनमें ई बुक की संख्या अधिक होने वाली है। यह मैंने इलसिए भी किया है क्योंकि मेरे पास पेपरबैक की संख्या काफी ज्यादा हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें रखने के लिए जगह मुश्किल से ही बन पा रही है। अब किंडल अनलिमिटेड का सब्सक्राईबर होने से जगह की दिक्कत तो नहीं ही होगी। ऐसा नहीं है कि मैं पेपरबैक नहीं लूँगा लेकिन अब उन्हीं का लूँगा जिन्हें एक से बार पढ़ने का मन करेगा। वरना ई बुक तो है ही।

अगर फॉर्मेट से इतर बात करूँ तो कई तरह से नवम्बर में पढ़ी गयी रचनाओं को मैं बाँट सकता हूँ।

अगर भाषा के तौर पर बाँटें तो नवम्बर में तीन अँग्रेजी की रचनाओं और नौ हिन्दी की रचनाओं को मैंने पढ़ा। वहीं  इन बारह रचनाओं में एक कहानी संग्रह, चार उपन्यास, दो बाल उपन्यास, तीन कॉमिक बुक्स, एक कहानी और एक उपन्यासिका शामिल है।

चलिए अब नवम्बर में पढ़ी गयी रचनाओं  को देखते हैं:

November 2020 Reads
नवम्बर 2020 में पढ़ी गयी किताबें
ऊपर नवम्बर में पढ़ी गयी रचनाओं के आवरण चित्रों का एक  कोलाज आपने देख ही लिया है। अब नीचे मैं इन रचनाओं  के विषय में संक्षिप्त रूप से  आपको बताऊँगा।

अनदेखा खतरा - संतोष पाठक
अनदेखा खतरा विक्रांत गोखले श्रृंखला का उपन्यास है। विक्रांत गोखले अपनी सेक्रेटरी शीला वर्मा के कहने सीतापुर पहुँचता है तो एक रहस्यमय मामले से उलझ जाता है। सीतापुर की लाल हवेली, जहाँ शीला अपनी दूर की रिश्तेदार के साथ रह रही है, पर भूतों का साया है और अब शीला चाहती है कि विक्रांत उसकी इस रिशेदार की मुसीबतों से उसका पीछा छुड़ाए। लेकिन यह सब करना इतना आसान नहीं है।

मुझे यह उपन्यास पसंद आया। संतोष पाठक साहब का यह दूसरा उपन्यास है जो मैंने पढ़ा है। उपन्यास तेज रफ्तार है और शुरुआत के कुछ हिस्से को छोड़ दें तो यह रफ्तार अंत तक बनी रहती है। पल पल नये रहस्य उद्घटित होते हैं और उस हिसाब से कथानक में मोड़ आते रहते हैं। अगर आपने नहीं पढ़ा तो एक बार इसे आपको पढ़ना चाहिए।

किताब पर विस्तृत विचार: अनदेखा खतरा
किताब लिंक: किंडल | पेपरबैक

फेमस फाइव और ख़ुफ़िया रास्ता 
फेमस फाइव और ख़ुफ़िया रास्ता एनिड ब्लाइटन की फेमस फाइव श्रृंखला का बाल उपन्यास है। इस उपन्यास को भी डॉक्टर सुधीर दीक्षित और रजनी दीक्षित ने हिन्दी में अनूदित किया है।
 
उपन्यास शुरुआत से ही पाठक पर पकड़ बनाकर चलता  है। उपन्यास सत्रह अध्यायों में विभाजित है और सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता रहता है कि आप आगे पढ़ते चले जाते हैं। 

अगर आपने इस नहीं पढ़ा है तो एक बार पढ़कर देखिये। घर में बच्चे हैं तो उन्हें यह किताब जरूर दीजिये। मुझे यकीन है उन्हें फेमस फाइव से मिलना अच्छा लगेगा।

किताब पर विस्तृत विचार: फेमस फाइव और ख़ुफ़िया खजाना

बाँकेलाल और चींटाघाटी, बाँकेलाल और बकासुर, सुनहरी मृग
बांकेलाल के उपरोक्त तीनों कॉमिक बुक बाँकेलाल डाइजेस्ट 11 में मौजूद है। बाँकेलाल के कॉमिक बुक्स अगर आप पढ़ते हैं तो आपको पता होगा कि इसके कॉमिक एक ही लीक पर चलते हैं। बाँकेलाल किसी न किसी के प्रति अपनी कुटिल बुद्धि का इस्तेमाल करता है और श्राप के कारण उसकी चाल हमेशा उलटी पड़ जाती है। इन तीनों कॉमिक बुक्स में भी कुछ ऐसा ही होता है। विशालकाय चींटे, राक्षस और क्रूर राजाओं से बाँकेलाल कैसे निपटता है यह इधर देखने को मिलता है। इन तीनों कॉमिक बुक में हास्य प्रचुर मात्रा में मौजूद है और अगर आप बाँकेलाल के प्रशंसक हैं तो आपको यह कॉमिक बुक पसंद आयेंगे। 


एक्सीडेंट एक रहस्यकथा - अनुराग कुमार 'जीनियस'
एक्सीडेंट एक रहस्य कथा अनुराग कुमार 'जीनियस' का लिखा गया उपन्यास है। भानुप्रताप राजनगर के प्रतिष्ठित व्यापारी हैं जिनके पैरों से जमीन तब खिसक जाती है जब उन्हें पता लगता है कि उनके छोटे बेटे ऋषभ की एक दुर्घटना में मौत हो गयी। ऋषभ की लाश भी मिली और उसका अंतिम संस्कार भी हुआ लेकिन फिर करिश्मा हो गया। ऋषभ लौट आया। अब भानुप्रताप खुश थे कि उनका प्यारा बेटा लौट आया था लेकिन उनके मन में एक खटका भी था कि क्या वाकई में लौटने वाला उनका ही बेटा है।

उपन्यास का सब्जेक्ट अच्छा है। उपन्यास के अंत में लाये गये ट्विस्टस भी अच्छे हैं लेकिन यह उपन्यास अभी जैसा है उससे बहुत बेहतर बन सकता था।

किताब पर विस्तृत विचार: एक्सीडेंट एक रहस्य कथा 
किताब लिंक: किंडल | पेपरबैक

अनुपमा का प्रेम - शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय

अनुपमा का प्रेम शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की कहानियों का संग्रह है। इस संग्रह में शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय की तीन कहानियाँ मौजूद हैं। यह कहानियाँ निम्न हैं:

देवघर की स्मृतियाँ
अनुपमा का प्रेम
अँधकार में आलोक

यह कहानी संग्रह मुझे पसंद आया। संग्रह में मौजूद तीनों ही कहानियाँ पठनीय हैं। इन कहानियों के केंद्र में प्रेम ही है और उसके अलग अलग स्वरूप आपको देखने को मिलते हैं। यह संग्रह एक बार पढ़ा जा सकता है।

कहानी संग्रह पर विस्तृत विचार: अनुपमा का प्रेम
पुस्तक लिंक: हार्डबैक

द एडवेंचर ऑफ़ क्रिसमस पुडिंग - अगाथा क्रिस्टी
द एडवेंचर ऑफ़ क्रिसमस पुडिंग हरक्यूल पोइरो श्रृंखला की एक कहानी है। हरक्यूल के पास एक मामला आता है जिसके कारण उसे क्रिसमस के दौरान इंग्लैंड के एक गाँव में एक परिवार के साथ समय बिताना पड़ता है। वहीं एक उसे एक रहस्यमय चिट्ठी आती है जिसके मुताबिक उसे क्रिसमस पुडिंग से दूर रहना चाहिए। यह चिट्ठी उसे क्यों दी गयी है? वह क्या करने इस गाँव में आया है? 
यही सब बातें कहानी पढ़कर ही आपको मालूम हो सकेंगी। 
कहानी मुझे ठीक लगी है। इसमें रहस्य के तत्व तो उतने मजबूत नहीं है लेकिन दूसरे तत्व उसकी भरपाई कर देते हैं। कहानी आप शुरू करेंगे तो पढ़कर ही उसे खत्म करेंगे। अगर कहानी आपने नहीं पढ़ी है तो एक बार तो इसे पढ़कर देखिएगा।

कहानी पर विस्तृत विचार: The Adventure of Christmas Pudding
पुस्तक लिंक: Kindle 

लकड़ी का रहस्य - एस सी बेदी 
लकड़ी का रहस्य राजन इकबाल श्रृंखला का लघु-उपन्यास है। शहर में हो रहे कत्लों से जब पुलिसवाले परेशान हो जाते हैं तो राजन और इकबाल इन कत्लों के पीछे के कारण का पता लगाने की कोशिश करते हैं। राजन इकबाल का यह उपन्यास एक बार पढ़ा जा सकता है। मुझे यह औसत लगा। इक़बाल और नफीस के सीन आपका मनोरंजन तो करते हैं लेकिन कथानक जिस तरह बुना गया है वह पाठक के रूप में आपको असंतुष्ट करता है। 

पुस्तक पर विस्तृत विचार: लकड़ी का रहस्य


द फर्स्ट वैम्पायर - विक्रम ई दीवान 

द फर्स्ट वैम्पायर विक्रम ई दीवान का उपन्यास है। इस उपन्यास का घटनाक्रम 1818 के भारत में घटित होता है। भारत इस दौरान अंग्रेजों के शासन के आधीन है। ऐसे में आज के मध्य प्रदेश में जब भारतीय गाँव वालों को कोई अज्ञात शक्ति अपना शिकार बनाने लगती है तो वह अपने जीवन की रक्षा के लिए ब्रिटिश अफसरों के पास जाते हैं। 

इन अफसरों के उस अज्ञात ताकत से टकराने की कहानी ही इस उपन्यास का कथानक बनती है। उपन्यास रोचक है और मुझे पसंद आया। हाँ, इसके ई बुक संस्करण में काफी प्रूफ की गलतियाँ थी जिन्होंने पढ़ने का मजा किरकिरा किया। वहीं मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगता है कि उपन्यास का शीर्षक भ्रामक है। शीर्षक बेहतर हो सकता था।

उपन्यास एक बार पढ़ा जा सकता है।

पुस्तक लिंक: Kindle

आशा - सुरेन्द्र मोहन पाठक 
सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा लिखा गया उपन्यास आशा एक सामाजिक उपन्यास है। यह उपन्यास प्रथम बार 1968 में प्रकाशित हुआ था। आशा आशा नाम की लड़की की कहानी है। आशा एक फिल्म वितरक कम्पनी में सेक्रेटरी है और इस कारण फ़िल्मी दुनिया के किरदारों और उधर की संस्कृति को भी उपन्यास में दर्शाया गया है।

उपन्यास पठनीय है और इसकी रोचकता अंत तक बरकरार रहती है। आशा आखिर में क्या फैसला करेगी यह देखने के लिए आप उपन्यास अंत तक जरूर पढ़ना चाहेंगे।

किताब के विषय में विस्तृत विचार: आशा 
किताब लिंक: किंडल

आफ्टर आर्स - आर पी मैकब्रेन्नन
आफ्टर आर्स एक हॉरर उपन्यासिका है। यह लेस्ली की कहानी है जो कि एक सॉफ्टवेयर कम्पनी में कार्य करती है। वह अपने काम के बोज से दबी हुई है। वह कार्य को समाप्त करने की जितनी कोशिश करती है उतना ही वह पाती है कि उसका काम बढ़ता चला जा रहा है। उसका लैपटॉप ही उसकी जिंदगी है। लेकिन फिर उसके साथ अजीब चीजें होने लगती हैं। आफ्टर आर्स के माध्यम से लेखक ने आज कल के कार्य संस्कृति को बाखूबी दर्शाया है। काम का बोझ लोगों को पर इतना है कि वह कई बार इसे झेल नहीं पाते हैं। इसी चीज को लेखक ने इस उपन्यासिका के माध्यम से दर्शाया है। उपन्यासिका मुझे पसंद आई।

किताब के विषय में विस्तृत विचार: After Hours
किताब लिंक: Kindle


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तो यह थी वो किताबें जो मैंने नवम्बर के महीने में पढ़ीं हैं। आपने नवम्बर में क्या क्या पढ़ा? अपने विचारों से मुझे जरूर अवगत करवाईयेगा। हो सकता है मुझे कुछ रोचक किताबें पढ़ने को मिल जायें।


© विकास नैनवाल 'अंजान'
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2 Comments
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  1. शानदार विकास भाई. सभी किताबें रोचक लग रहीं हैं. जल्द ही समय निकालकर मैं भी इन्हें पढ़ूंगा.

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    1. जी आभार। पढ़ने के बाद अपने विचारों से हमें जरूर अवगत करवाईयेगा।

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