Friday, January 10, 2020

गढ़ी के खंडहर - राजनारायण बोहरे


गढ़ी के खंडहर - राजनारायण बोहरे
गढ़ी के खंडहर - राजनारायण बोहरे

गढ़ी का खंडहर राजनारायण बोहरे जी का एक बाल उपन्यास है। उपन्यास रोचक है और रोमांचक है। कुछ कमिया इसमें हैं जिन पर ध्यान देते तो उपन्यास और बेहतर हो सकता था।

फिलहाल हिन्दी में रोमांचक बाल उपन्यासों की भारी कमी है। यह उपन्यास उस कमी को थोड़ा  पूरा करता  है तो आपको इसे एक बार आजमाना चाहिए।

उपन्यास के प्रति विस्तृत राय आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं:
गढ़ी के खंडहर

नोट: ऊपर दिया गया लिंक मेरे दूसरे ब्लॉग का है जिसमें मैं केवल बाल साहित्य से जुड़ी पोस्ट डालता हूँ। मुझे बाल साहित्य पढ़ना पसंद है। अगर आपकी भी उसमें रूचि है तो आपको उधर काफी रचनाओं के विषय में पढ़ने को मिल जायेगा। 

कुछ प्रश्न:
प्रश्न १: क्या आप बचपन में साहित्य पढ़ते थे? बचपन में पढ़े गए कुछ बाल उपन्यासों के नाम क्या आप साझा कर सकते हैं?
प्रश्न २: बचपन में आपको किस तरह का बाल साहित्य पढ़ना पसंद था? आप अपने बच्चों को किस प्रकार का बाल साहित्य देना चाहेंगे?  


©विकास नैनवाल 'अंजान'

2 comments:

  1. पहले प्रश्न की बात करे तो,
    मेरे अभिभावको को यह सब बेकार ही लगता था, इसलिए बचपन मे कभी कुछ पढ़ नही पाया।
    पर यह तो मध्यवर्गीय मानसिकता थी, जो सभी मध्यवर्गीय घरों मे होती है।
    यही कारण था कि मैं पुस्तको और उपन्यासों को बोरिंग मानने लगा था।

    फिर करीब 9वी हमे अंग्रेज़ी पाठ्यपुस्तक हमे रस्किन बॉन्ड की कहानी मिली थी। शायद वही कुछ बल साहित्य वाली कहानियाँ थी हमे पाठ्यपुस्तक मे, वह भी अंग्रेज़ी मे। हिंदी और मराठी मे तो शायद थे ही नही।

    मेरे विद्यालय मे 7वी से लेकर 9वी तक हमे विद्यालय के पुस्तकालय से प्रति सोमवार एक पुस्तक मिला करती थी। उन पुस्तको को 1 सप्ताह के भीतर ही पढ़कर अगले सोमवार को वापस करना होता था।

    पर उस समय समझ नही थी और पढ़ाई भी इतनी थी की एक सप्ताह के भीतर पूरी पुस्तक पढ़ना मुश्किल ही था। इसलिए मैने पुस्तकालय से मिली अधिकतर पुस्तके कभी खोल कर भी नही देखी थी।

    10वी मे क्योंकि बोर्ड्स होता था, इसलिए 10वी यह सुविधा भी समाप्त हो गई थी।
    पर मेरी बहन, जो मुझसे 1 वर्ष छोटी थी और उस समय 9वी कक्षा मे थी, उसे एक पुस्तक मिली, जिसने मेरी दुनिया ही बदल दी।

    वह पुस्तक थी Roald Dahl की Danny, the Champion of the World।

    मेरी बहन को उसमे कोई दिलचस्पी नही थी। वही बोर्ड्स के कारण हर कोई राह चलता आकर मुझे डराकर जा रहा था कि बोर्ड बहुत कठिन है वगैरा-वगैरा।

    अपनी टेंशन दूर करने के लिए मैने यह पुस्तक पढ़ने की सोची, क्योंकि मेरी बहन इसे पढ़ने नही वाली थी और मैने Roald Dahl का नाम सुन रखा था।

    हर ही समय निकालकर पढ़ता गया, पर फिर 1 सप्ताह भी समाप्त हो गया और पुस्तक मैं मुश्किल से 20% ही पढ़ पाया था तब। लेकिन शायद ईश्वर मेरे साथ थे और कुछ अलग-अलग कारणों से पुस्तकालय करीब 1 माह तक बंद रहा, जिस कारण मैं उस पुताक को समाप्त कर पाया।

    Danny पढ़कर मुझे काफी सुकून मिला और एहसास हुआ कि मैने अपनी ज़िन्दगी लगभग वेस्ट ही की, क्योंकि तब तक मैं पुस्तको से दूर था। मुझे एहसास हुआ कि वह कितने अनमोल है।

    बस फिर कुछ वरः बाद मैने अपनी सबसे पहली पुस्तक खरीदी, जो danny ही थी। इत्तेफाक से उस वर्ष Roald Dahl की 100वी पुण्यतिथि भी थी।

    रही बात दूसरे प्रश्न की, तो बचपन मे मुझे केवल कॉमेडी ही पसंद था और आज भी है।

    उस समय एक्शन, थ्रिलर, रहस्य, फंतासी और scifi आदि सब मुझे बोरिंग लगते थे। यह तो अब जाकर इनमे दिलचस्पी जागी है।

    वही यदि मैने शादी की और संतान हुई कभी, तो मैं अपने बच्चो पर ही छोड़ दूँगा कि उन्हें क्या पढ़ना है।

    आज कल के अधिकतर अभिभावक अपने बच्चो को केवल नॉन फिक्शन ही पढ़ने को देते है, क्योंकि फिक्शन उन्हें बेकार लगता है।

    पर मैं यही कोशिश करूँगा कि मेरे बच्चे सभी कुछ पढ़े। केवल नॉन फिक्शन पढ़ाना मुझे उनकी कल्पना और सोच के दायरे को सीमित करने जैसा लगता है।

    साहित्य के केवल एक शैली की तरफदारी करना छोटी सोच की निशानी लगती है मुझे।

    मेरे पिता ने भी मुझे कुछ सेल्फ हेल्प बुक्स लाकर दी थी। उन्हें पढ़कर मुझे एक ही बात पता चली कि यह सब पैसे कमाने का धंदा है। उन पुस्तको मे कई प्रसिद्ध और कामियाब व्यक्तियों की कहानियाँ थी, पर वह सभी कामियाब व्यक्ति खुदके दम पर कामियाब हुए थे और उनमे से किसी ने भी सेल्फ हेल्प बुक्स का सहारा नही लिया।

    तो मैं अपने बच्चो को सब पढ़ने दूँगा और सभी भाषाओ मे, सिवाय सेल्फ हेल्प बूक के।

    लेकिन क्योंकि शुरुआत बाल साहित्य से ही होती है तो शायद मैं उन्हें रहस्य और रोमांच वाले बाल साहित्य दूँगा, क्योंकि मुझे रहस्य बेहद पसंद है। रस्किन बॉन्ड और Roald Dahl के भी।

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    1. जी, मेरी कहानी भी ऐसी ही कुछ है। घर वाले किताबों से अलग चीजों को पढ़ने को वक्त की बर्बादी मानते थे इसलिए पहला उपन्यास 10 में अनीता देसाई का विलेज बाय  द सी पढ़ा। यह भी इसलिए पढ़ा क्योंकि ये कोर्स में थी।

       
      जी सेल्फ हेल्प किताबों के विषय में भी आपकी राय से सहमति रखता हूँ। मुझे भी ऐसा लगता है कि सेल्फ हेल्प वाली किताबों में बताई गयी चीजें हमे पहले से ही पता होता था। 
      हाँ, बचपन में मुझे कॉमिक्स पढ़ने का शौक था और रोमांचक उपन्यासों का तो मैं यह भी वैसे ही उपन्यास या कहानियाँ पढ़ने को मिलना चाहिए। बाकि सबकी अलग पसंद तो होती ही है। किताबें खुद पाठकों को अपने तरफ खींचती हैं।

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