Saturday, October 28, 2017

राजन की शादी - शुभानन्द

रेटिंग : 3.75/5
किताब २६ अक्टूबर २०१७ से २७ अक्टूबर २०१७ के बीच पढ़ी गयी

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट : पेपरबैक
पृष्ठ संख्या : ६४
प्रकाशक : सूरज पॉकेट बुक्स
श्रृंखला : राजन इकबाल रिबॉर्न #3
मूल्य : 52  रूपये(पेपरबैक)/ 30 रूपये(kindle) (अमेज़न -28/10/2017),
राजन की शादी

पहला वाक्य:
शोभा क्या कर रही हो?

राजन इकबाल को एक मिशन के तहत वापस चंदननगर यानी अपने शहर आना पड़ा। अमेरिकी एजेंसी एफ़बीआई सी मिली जानकारी के अनुसार मिशन इम्पोस्सिबल फाॅर्स का एजेंट इथन हंट आजकल  भारत के चन्दननगर शहर  में था। और एफबीआई के लिए वो एक फरार मुजरिम था। अब राजन इकबाल को उसे पकड़कर एफबीआई को सौंपने की जिम्मेदारी दी गयी थी।

राजन इकबाल जानते थे कि इथन हंट दुनिया के सबसे बेहतरीन एजेंट्स में से एक था। आखिर उसके पीछे एफबीआई क्यों पड़ी थी और उसका  भारत के चंदननगर में आने का क्या उद्देश्य क्या  था? इस बात का पता भी चंदननगर पहुँच कर दोनों को लगाना था।

लेकिन चंदननगर पहुँचते ही हालत कुछ अजीब होने लगे। फिर खबरे आने लगी कि राजन चंदन नगर के एमएलए वैभव सिंह की बेटी के साथ शादी कर रहा है?

क्या उसके और शोभा के बीच के सम्बन्ध में कुछ खटास आ गयी थी? आखिर राजन ने अचानक शादी का क्यों फैसला किया?

इथन हंट का क्या हुआ? क्या राजन इकबाल उसे पकड़ पाए?

सवाल तो कई हैं और जवाब किताब पढने के पश्चात ही आपको मिल पायेंगे। तो देर किस बात की है? जाइए पढ़िए।



मुख्य किरदार :
राजन - सीक्रेट सर्विस का एजेंट
शोभा - सीक्रेट सर्विस की एजेंट और राजन की गर्ल फ्रेंड
इकबाल - सीक्रेट सर्विस का एजेंट और राजन का दोस्त
सलमा - सीक्रेट सर्विस की और इकबाल की गर्ल फ्रेंड
इथन हंट - अमेरिकी मिशन इम्पॉसिबल फाॅर्स का एक एजेंट
कार्लोस - भारत में इथन का साथी
भोलू - चंदन नगर में राजन का नौकर
बलबीर सिंह - चन्दन नगर के एसपी और राजन इकबाल के पुराने जानकार जिनके साथ राजन इकबाल ने कई केस सोल्व किये हैं
वैभव सिंह - चन्दन नगर के एमएलए
तान्या सिंह - वैभव सिंह की एक लौती पुत्री
प्रणय खन्ना - चन्दननगर के निकट एटॉमिक पॉवर प्लांट में कार्यरत एक वैज्ञानिक
रमाकांत - एटॉमिक पावर प्लांट का मेनेजर
फिन्ग्ही - एक चीनी खलनायक जिससे राजन इकबाल काफी बार टकरा चुके हैं और जो विश्व विजय का सपना पाले हुए है
नार्मन - फिन्ग्ही का दायाँ हाथ


'राजन की शादी' राजन इक़बाल रिबॉर्न श्रृंखला का तीसरा उपन्यास है। उपन्यास शुभानन्द जी ने लिखा है। मैंने अभी तक राजन इकबाल रिबॉर्न सीरीज को नहीं पढ़ा था तो ये इस सीरीज से जुड़ा मेरा पहला उपन्यास है। उपन्यास ६४ पृष्ठों का है जिसे एक ही बैठक में पढ़ा जा सकता है।

उपन्यास का कथानक तेज रफ़्तार से भागता है। एक्शन भरपूर है और एक के बाद एक घटनाएं ऐसी होती है कि पाठक पृष्ठों को पलटने पर मजबूर हो जाता है। उपन्यास  में कई जगह हँसी मज़ाक भी चलती है जिसे पढ़कर मज़ा आ जाता है। उपन्यास में जावेद अमर जॉन श्रृंखला के जासूस जावेद और अमर के इलावा भी कई जासूसों की एंट्री है। इससे एक उम्मीद बनती है कि उन जासूसों के जीवन से जुड़े रोमांचक किससे भी थ्रिलर के रूप में पाठकों को भविष्य में पढने को मिलेंगे।

किताब के कथानक में कहीं भी कोई कमी नहीं दिखी। लेकिन  मैंने जितने भी राजन इकबाल श्रृंखला के उपन्यास पढ़े हैं उनमे सलमा इक्को की नोक झोंक और इकबाल की झख(जो कि बेढंगी सी कविता होती है) अपना महत्व रखती है। इधर थोड़ी बहुत नौक झोंक तो थी लेकिन उतने से मन नहीं  भरा। और झख तो गायब ही थी। अंत में इकबाल की झख भी हो जाती तो मज़ा आ जाता।

किताब में एक दो जगह प्रूफ रीडिंग की मिस्टेक है(उदाहरण पृष्ठ ३९ में 'जलती हुई वैन' की जगह 'जलती हुई विन' लिखा है,पृष्ठ ४९ में 'सभी उन्हें बधाई दे रहे थे' कि जगह 'सभी उन्हें बढ़ाई दे रहे थे', 'एक से एक महंगे लहंगे' की जगह 'एक से एक मेहेंगे लेहेंगे' लिखा है। ऐसे ही दो तीन जगह और है लेकिन मैंने उन्हें नोट नही किया।)।

इसके इलावा किताब में एक दो जगह पुराने उपन्यासों का जिक्र है। उस जिक्र को करते हुए सम्बंधित उपन्यासों के विषय में बता दिया गया है जो कि अच्छी बात है। बस कमी ये है कि ये बात उसी फॉन्ट और उसी स्टाइल में दर्ज है जिस स्टाइल में उपन्यास का बाकी का टेक्स्ट है। ऐसे में  उपन्यास पढते हुए  तो पाठक इसे एक बार पढ़ देगा लेकिन बाद में देखना चाहे तो थोड़ा मुश्किल हो सकती है। ऐसी जानकारी अगर फुट नोट में दें। '*' या अंक  लगाकर दें जैसा कि अक्सर प्रकाशक देते हैं तो ज्यादा बेहतर होगा। ऐसे में बाद में पाठक को खाली फुटनोट ही चेक करना होगा।

किताब पेपरबैक संस्करण है और इसकी लम्बाई चौड़ाई आम पॉकेट बुक्स से बड़ी है। अगर ये किताब आम  पॉकेट बुक्स के आकार की होती तो पृष्ठ संख्या शायद ६३ से ८३ हो जाती। इसके इलावा इसका फॉन्ट का आकार मुझे थोड़ा कम लगा। इससे कई लोगों को पढने में दिककत हो सकती है। अगर फॉन्ट का आकर बढ़ा होता  तो ज्यादा बेहतर होता। हाँ, उनके दो लाइन्स के बीच का स्पेस ठीक है लेकिन फॉन्ट बढाने से अगर उस स्पेस को कम भी करना पड़े तो इतना नुकसान नहीं  होगा। नीचे की तस्वीर से तुलना कीजिये।

बाएँ तरफ इस उपन्यास का टेक्स्ट है और दायीं तरफ आम पॉकेट बुक्स का टेक्स्ट। आम वाला फॉन्ट साइज़ हो और अगर लाइन के बीच में जगह कम भी हो तो पढने में आसानी रहती है। 
किताब का कवर भी मुझे इतना अच्छा नहीं लगा। सूरज के हालिया प्रकाशित किताबों के कवर काफी अच्छे हैं। अगर इस किताब का नया संस्करण निकलता है तो कवर भी नया रखें। एक कवर का किताब के पसंद आने न आने में बहुत ज्यादा योगदान होता है। तभी तो बकायदा हिदायत देनी होती है कि किताब की गुणवत्ता उसके आवरण से न आंकियें। अगर एक किताब की सामग्री अच्छी है तो एक अच्छा कवर पाठको को उसकी तरफ आकर्षित करेगा ही। और ये आकर्षण ही नये पाठकों को उस किताब के नजदीक लाता है। फिर पाठक अगली किताब पर जाता है या नहीं ये तो उस किताब की सामग्री पर निर्भर करता है। जैसे मेरे मामले में तो मेरे पास इस श्रृंखला के पाँच और उपन्यास हैं और वो मैं जल्द ही पढूँगा।

अंत में खाली ये ही कहूँगा कि उपन्यास एक्शन से भरपूर है जो शुरु से लेकर आखिर तक पाठक का मनोरंजन करता है। अगर राजन इकबाल को आपने पढ़ा है तो इसे जरूर पढ़िए। अगर नहीं पढ़ा है तो एक बार इसे पढ़ कर देखिये।

अगर आपने उपन्यास पढ़ा है तो आपको ये कैसा लगा? कमेंट बॉक्स में अपनी टिपण्णी देकर अवगत जरूर करवाईयेगा।  अगर उपन्यास नहीं पढ़ा है और पढना चाहते हैं तो निम्न लिंक से इसे मंगवाया जा सकता है:

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