दौलत और खून - सुरेन्द्र मोहन पाठक

रेटिंग : 4/5
उपन्यास 24 मार्च से  25 मार्च के बीच पढ़ा गया

संस्करण विवरण:
फॉर्मेट : पेपरबैक
पृष्ठ संख्या: 167
प्रकाशक : राजा पॉकेट बुक्स
सीरीज: विमल #2

पहला वाक्य:
आपका नाम वीरप्पा है?

सेंट्रल जैल से भागकर सरदार सुरेन्द्र सिंह सौहेल जब मुम्बई पहुँचा तो उसकी माली हालत बहुत बदतर हो चुकी थी।वो उस दिन को कोसता था जिस दिन औरों की देखा देखी उसने जेल से भागने का फैसला किया था।
फिर उसके ज़िन्दगी में ऐसी घटनायें हुई जिनके तहत उसे मुम्बई से कूच करना पड़ा। वो विमल जिसे खाने के लिए चोरी करने से भी गुरेज था,वह विमल  मुम्बई से कातिल बनकर निकला।
मुम्बई से भागकर वो पहुंचा मद्रास।उसके पास एक बहुमूल्य हार था जिसे बेचकर वो नए सिरे से ज़िन्दगी बिताना चाहता था।लेकिन उधर कुछ ऐसा होता कि विमल को एक रॉक शो में चोरी करने के लिये हामी भरनी पड़ती है।
आखिर क्यों विमल को इस चोरी के लिए हामी भरनी पड़ी? क्या वो चोरी में सफल हो पायेगा? क्या गुनाह के दलदल में धँसते उसके कदम रुकेंगे या वो इस दलदल में धँसता चला जायेगा?


दौलत और खून विमल सीरीज का दूसरा उपन्यास है। पहला उपन्यास मौत का खेल है जिसके विषय में आप इधर पढ़ सकते  हैं।
मौत का खेल
दौलत और खून घटनाक्रम वहाँ  से शुरू होता  है जहाँ मौत के खेल का घटनाक्रम समाप्त हुआ था।
विमल का ये किस्सा मुझे बेहद पसंद आया। उपन्यास एक थ्रिलर जिसने शुरू से लेकर अंत तक मनोरंजन किया।इसमें डकैती है, धोखा है,बदला है यानी की हर वो चीज़ है जो एक उपन्यास को एक ही बैठक में पठनीय बनाता है। और इसके इलावा इसमें विमल की वो झलक देखने को मिलती है जो आगे जाकर उसे न भूतो न भविष्यति की उपाधि से नवाजे जाने को सार्थक करेगी।
अगर आपने इस उपन्यास को नहीं पढ़ा है तो आपको इसे ज़रूर पढ़ना चाहिए।अगर आपने उपन्यास पढ़ा है तो आपको ये उपन्यास कैसा लगा ये कमेंट बॉक्स में बताना न भूलियेगा।और अगर आपने ये उपन्यास नहीं पढ़ा तो आप निम्न लिंक से इसे मँगवा सकते हैं:
Doordeals
आप इस उपन्यास को ईबुक के रूप में भी पढ़ सकते हैं। इसके लिये आपके एंड्राइड फ़ोन में डेली हंट नामक एप्प होना चाहिए।
डेली हंट
FTC Disclosure: इस पोस्ट में एफिलिएट लिंक्स मौजूद हैं। अगर आप इन लिंक्स के माध्यम से खरीददारी करते हैं तो एक बुक जर्नल को उसके एवज में छोटा सा कमीशन मिलता है। आपको इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। ये पैसा साइट के रखरखाव में काम आता है। This post may contain affiliate links. If you buy from these links Ek Book Journal receives a small percentage of your purchase as a commission. You are not charged extra for your purchase. This money is used in maintainence of the website.

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad