एक बुक जर्नल: साँपों के शिकारी - इब्ने सफ़ी

Saturday, February 7, 2015

साँपों के शिकारी - इब्ने सफ़ी

रेटिंग:३/५
उपन्यास ख़त्म करने की तारीक:४ जनवरी २०१५
संस्करण विवरण :
फॉर्मेट: पेपरबैक
पृष्ठ संख्या : १२६
प्रकाशक : हार्पर हिंदी
अनुवादक : चौधरी ज़िया इमाम
संपादक : नीलाभ
सीरीज : इमरान  #७


पहला वाक्य :
तैमूर ऐण्ड बार्टले का दफ्तर पूरी इमारत में फैला हुआ था।

'साँपों के शिकारी'  इब्ने सफ़ी द्वारा रचित इमरान सीरीज का ७वाँ उपन्यास है। तैमूर और बार्टले नामक फर्म का काम साँपों की खालों का व्यापार करना है। लेकिन अली इमरान को यकीन है कि वो साँपों के काम के आड़ में कोई गैर कानूनी व्यापार कर रहे हैं। क्या इमरान का शक़ सही है ?
वहीं शहर में इरशाद नाम का एक करोड़पति व्यक्ति संदिग्ध हालत में गायब हो जाता है। उसके बिस्तर पर खून पाया गया पर उसकी लाश नहीं मिली। उसकी पोती राज़िया कि माने तो कुछ दिन पहले उसके वैनिटी बैग में कुछ दिन पहले साँप निकला था जिसे शायद उसके दादा जी को मारने के लिए रखा था। कौन कर रहा है इरशाद के साथ साजिश ? क्या इरशाद का पता लग पायेगा ?



अली इमरान एक जासूस है जो की अक्सर इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट के सुपरिन्टेन्डेन्ट फ़याज़ के लिए भी केस पर काम करता है। फ़याज़ इरशाद के केस पर काम कर रहा है।  क्या वो दोनों इन राज़ों का पर्दा फाश कर पायेंगे?

उपन्यास मुझे रोचक लगा। एक बार पढ़ना शुरू किया तो ख़त्म करके ही उठा। उपन्यास में कहीं बोरियत का एहसास नहीं हुआ। इमरान और फयाज़ के आपसी संवादों को पढ़कर भी मज़ा आया। मैं तो इस सीरीज के बाकि उपन्यासों को भी पढ़ूँगा।
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