एक बुक जर्नल: धप्पा

Wednesday, January 28, 2015

धप्पा

रेटिंग : २.५/५
कहानी : २.५/५
आर्टवर्क : २.५/५

संस्करण विवरण :
फॉर्मेट :पेपरबैक
पृष्ठ संख्या : ४८
प्रकाशक :राज कॉमिक्स
लेखक : तरुण कुमार वाही
पेन्सिलर : आदिल खान
इंकर :  राकेश, जगदीश कुमार
कलरिस्ट : अभिषेक गौतम, बिश्वज्य घोस




धप्पा राज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित थ्रिल हॉरर सीरीज का एक कॉमिक है। ये कॉमिक 'लुक छुप जाना' का आगे का भाग है। जहाँ पर लुक छुप जाना की कहानी ख़त्म होती है उधर से ही धप्पा की कहानी शुरू होती है। अगर आपने 'लुक छुप जाना' नहीं पढ़ी है तो मेरा आग्रह है कि आप उसे इस कॉमिक को पढने से पहले पढियेगा। अनसुलझी नामक नाटक को बनाने वाले दस नौजवान काल किले का रहस्य जानने के लिए उसमे प्रवेश करते हैं। और वे ना चाहते हुए भी लुक्का छुप्पी के खूनी खेल में शामिल हो जाते हैं। धप्पा तक आते आते १० में से चार लोगों को चुड़ैल मार चुकी होती है। क्या ये छः लोग अपनी मौत को धप्पा दे पायेंगे ? आखिर क्यों चुड़ैल इनके पीछे पड़ी है? इस सारे सवालों के जवाब आपको इस कॉमिक को पढ़ कर मिल जायेंगे।

कॉमिक अच्छा था। आर्ट वर्क पहले जैसा ही है। लेकिन राजा के समय के लोग कुछ हद तक भारतीय लगते हैं। कॉमिक पढ़ते समय मज़ा आया लेकिन कहानी में थोड़ा सी कमी लगी। मुझे ये समझ में नहीं आया कि वो अपने बेटे के लॉकेट से क्यों डरती है? खैर इसके विषय में ज्यादा कहना कहानी को उजागर करना होगा। एक औसत कहानी है। एक बार इसको पढ़ा जा सकता है।
धप्पा को आप इस लिंक पे जाकर मंगवा सकते हैं :
राज कॉमिक्स


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