Monday, January 26, 2015

कुबड़ा - वेद प्रकाश शर्मा

रेटिंग :३.५/५
उपन्यास ख़त्म करने की दिनाँक:२६ जनवरी २०१५

संस्करण विवरण :
फॉर्मेट :पेपरबैक
पृष्ठ संख्या :३०२
प्रकाशक : तुलसी पेपर बुक्स
संसकरण : संशोधित


पहला वाक्य :
लाल मारुती वेन गांडीव से निकले तीर की मानिंद विपरीत दिशा में उडी चली जा रही थी। 

कुबड़ा की कहानी वेद प्रकाश जी के उपन्यास 'जुर्म की माँ' के आगे की कहानी है। ये वेद प्रकाश जी का पहला उपन्यास जो की मैंने पढ़ा। इससे पहले मैं केशव पंडित सीरीज का उपन्यास 'शादी करूँगी यमराज से' पढ़ा। लेकिन क्यूँकी वो एक सीरीज का उपन्यास है और उसमे अब वेद प्रकाश जी का नाम नहीं आता इसलिए उसे मैं उनके उपन्यास में नहीं गिनता हूँ। लेकिन अगर अब इन दोनों उपन्यासों को पढेंगे तो इनमे कई समानता दिखेंगी जिससे आप को अंदेशा हो सकता है कि दोनों का लेखक एक ही व्यक्ति है। बहरहाल जैसे मैंने कहा 'कुबड़ा' का कथानक उस बिंदु से आगे बढ़ता है जहाँ 'जुर्म की माँ' खत्म होता है। लेकिन अगर आपने 'जुर्म की माँ' नहीं पढ़ा तो भी आप कुबड़ा को पढ़ सकते हैं और यकीन मानिये आपको कोई कमी नहीं दिखेगी।

धर्म,चामुण्डा,गोपाल,पल्लवी और सोफिया कभी रुद्रपुर के पाँच जिस्म एक जान हुआ करते थे। वे रुद्रपुर में धामू ,चण्डू,पल्ली ,गुल्लू और सोफी हुआ करते थे। लेकिन वक़्त और हालात के चलते उनके रास्ते अलग अलग हो गये। फिर एक कुबड़ा नामक व्यक्ति उनकी ज़िन्दगी में आया जिसने उन पाँचों पर अलग अलग एहसान किये और सभी से ये वादा लिया कि वो समय आने पर उसकी मदद करेंगे। फिर हालात ऐसे हुए कि धर्म, गोपाल,चामुण्डा और सोफिया जेल में चले गये। इन लोगों ने जेल से फरार होने का प्लान बनाया जिसमें कुबड़ा ने उनकी भरपूर मदद की। लेकिन अब कुबड़ा अपने एहसानों का बदला चाहता है। कौन है ये कुबड़ा? वो इनसे क्या कराना चाहता है? क्या ये पाँचो उसकी मदद करने को तैयार होंगे? जानने के लिए पढ़िए वेद जी का एक सनसनीखेज उपन्यास कुबड़ा।

अगर अपनी बात कहूँ तो मुझे कुबड़ा उपन्यास काफी पसंद आया। उपन्यास शुरुआत से लेकर अंत तक रोचक था। कथानक जलेबी की तरह टेढ़ा था और ये पता लगा पाना मुश्किल था कि आगे क्या होने वाला है। कहानी को इस तरह घुमाया गया था कि मैं हर पल सोच रहा था कि इसमें क्या नया मोड़ आएगा। लेकिन एक बात है कई चीजें इसमें थी जिन्हें मुझे उपन्यास का मज़ा लेने के लिए नज़रन्दाज़ करनी पढ़ी। मसलन पल्लवी एक ऐसी मिमिक थी जो औरतों के साथ मर्दों की भी अच्छी मिमिक्री भी कर देती थी। दूसरी बात कथानक में अफगानिस्तान का ज़िक्र है लेकिन उपन्यास को पढ़ते समय मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं अफगानिस्तान में था। अगर ऐसा होता तो और भी मज़ा आता। मुझे लगता है कि लेखक अगर किसी जगह के विषय में लिख रहा है और पाठक अपने को उस जगह में महसूस नहीं करता तो ये लेखनी की ही दिक्कत होती है। बाकि उपन्यास में इस्तेमाल किये जुमले बेहतरीन थे जिन्हें पढने में मज़ा आया।

हाँ, एक बात मैं इस उपन्यास के कवर पेज के विषय में कहना चाहूँगा। इस उपन्यास का कवर पेज मुझे एक दम घटिया लगा। प्रकाशक ने हॉलीवुड के किरदारों का कोलाज बना कर कवर तैयार किया है जो इस पुस्तक के स्तर को गिराता है। कवर पेज का कहानी से कोई लेना देना नहीं है और एक बार तो मैंने सोचा कि इस पुस्तक को लेना ही बेकार है। अगर कवर कहानी से जुड़ा हुआ और ओरिजिनल होता तो बेहतर होता। जैसे एक बार मैं ही इस उपन्यास को नहीं खरीदने वाला था वैसे ही कई और लोग रहे होंगे जिन्होंने इस उपन्यास को देखा तो होगा लेकिन खरीदा नहीं होगा।

अंत में इतना की कहूँगा कि उपन्यास को पढ़कर मज़ा आया। मुझे कहीं भी ये एहसास नहीं हुआ कि मैं किसी उपन्यास का दूसरा भाग पढ़ रहा हूँ। अंत तक मेरी रुचि उपन्यास में रही और मैं पन्ने पलटता रहा जो कि मेरे हिस्साब से एक अच्छे उपन्यास की पहचान होती है।  अगर आप वेद जी जो पढ़ते हैं तो इस उपन्यास को ज़रूर पढ़िएगा। और अगर आप हिन्दी पल्प साहित्य में रुचि रखते हैं तो भी इस उपन्यास को पढ़ सकते हैं।


अगर उपन्यास को आपने पढ़ा है तो आप अपनी राय देना न भूलियेगा।

26 comments:

  1. विकास जी, आपने वेद जी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में से एक को पढ़ा है । मैंने 'जुर्म की माँ' और 'कुबड़ा' के मूल संस्करण पढ़े थे जो कि 1989-1990 में प्रकाशित हुए थे । उन दिनों मैं कलकत्ता में रहकर सी॰ए॰ की पढ़ाई कर रहा था । वेद जी की अपनी फ़र्म 'तुलसी पॉकेट बुक्स' से प्रकाशित हुए उन लुगदी संस्करणों के आवरण भी आकर्षक थे और कथानक भी पूरे थे (बाद में अनावश्यक रूप से कुछ दृश्य हटाए गए जिससे उपन्यासों की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव ही पड़ा) । अगर आपने 'जुर्म की माँ' नहीं पढ़ा है तो मेरा आपको परामर्श है कि उसे अवश्य पढ़ें । 'जुर्म की माँ' मनोरंजन से भरपूर है और उसे पढ़ने के उपरांत आप 'कुबड़ा' को भी फिर से पढ़कर उसका और भी अधिक आनंद उठा पाएंगे । आपका विश्लेषण और मूल्यांकन सटीक है ।

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    1. जी, जीतेन्द्र जी। जुर्म की माँ पढ़ने की कोशिश करूँगा। फिर कुबड़ा दोबारा पढ़कर एक पोस्ट और लिखूँगा।

      पोस्ट पढ़ने के लिए और अपने बहुमूल्य सुझाव देने के लिए शुक्रिया।आते रहिएगा।

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    2. Hello mai Sanjeev Sahu....Mai Panjab se Hoon Yaha Mere ko Kubda Nahi mela koi mujhe De Sakta hai paise bhi le le...70872233330mera contect number pls

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  2. विकास जी, लगता है आपने वेद जी के काफी कम उपन्यास पढ़े हैं. शायद इसीलिए मैं आपके ब्लॉग में उनके ज्यादातर बेहतरीन उपन्यासों का रिव्यु न पा सका.

    मेरी इल्तज़ा है कि अगर आप अपने दिमाग को चकरघिन्नी की तरह नचाना चाहते हैं और वाकई में अपने दिमाग को ख़ुराक देना चाहते हैं तो वेद जी के ये उपन्यास पढ़िए जो मैं बता रहा हूँ. सब ऑनलाइन अमेज़न और राज कॉमिक्स के पोर्टल पे उपलब्ध हैं:-

    १:- खलीफा
    २:- असली खिलाड़ी
    ३:- सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री

    आपके रिव्यु का इंतज़ार रहेगा. सादर, चन्दन कुमार.

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    1. जी चन्दर जी। वाकई मैंने काफी कम उपन्यास पढ़े हैं। आपके सुझाये उपन्यासों को जल्दी ही पढ़ने की कोशिश करूँगा और उनके विषयय में अपने विचार इधर प्रकट करूँगा।

      ब्लॉग पर आने के लिए और टिपण्णी करने के लिए वक्त निकालने के लिए शुक्रिया। आते रहिएगा और अपने विचारों से अवगत कराते रहिएगा।

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  3. 'कुबङा' और 'जुर्म की माँ' दोनों उपन्यास बहुत पहले पढे थे दोनों ही रोचक लगे।

    ' शादी करुंगी यमराज से' उपन्यास का वेदप्रकाश शर्मा से किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है।
    वेदप्रकाश शर्मा का एक प्रसिद्ध पात्र केशव पण्डित था जो की एक छद्म लेखक केशव पण्डित से पूर्णतः अलग है।

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    1. जी उनके किरदार को ही बाद में लेखक का नाम दिया गया। जैसे रीमा भारती एक किरदार है। यह सब भूतलेखन की महिमा है।

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  4. वेद प्रकाश शर्मा जी एक महान उपन्यासकार थे विजय विकास सीरीज के मैं इनके सभी उपन्यास पढ़ चुका हूँ वास्तव मे मेरी नजर मे थ्रिलर उपन्यासो के बेताज वादशाह है वेद जी
    उनको मेरा शत् शत् नमन .........

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  5. वेद प्रकाश शर्मा जी एक महान उपन्यासकार थे विजय विकास सीरीज के मैं इनके सभी उपन्यास पढ़ चुका हूँ वास्तव मे मेरी नजर मे थ्रिलर उपन्यासो के बेताज वादशाह है वेद जी
    उनको मेरा शत् शत् नमन .........

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    1. रमेश जी वेद जी के कुछ पसंदीदा उपन्यासों के नाम साझा करें। मेरे साथ साथ यहाँ आने वाले दूसरे पाठकों को भी उनके विषय में पता चलेगा।

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    1. आपको वेद जी के कौन से उपन्यास पसंद हैं। कुछ का नाम साझा करें। मैं पढ़ने की कोशिश करूँगा।

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    2. बढ़िया। मिलती है तो पढ़ने की कोशिश करूँगा।

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    1. जी,उस वक्त आपको कौन कौन से उपन्यास पसंद आये थे? हो सके तो नाम साझा करें।नये पाठकों को अच्छे उपन्यासों के नाम जानने को मिलेंगे।

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  8. मैं वेद प्रकाश शर्मा जी का उपन्यास पढना चाहता हूं पर कहां से ? कृपया मार्गदर्शन करें

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    1. मैं अक्सर अमेज़न से खरीद कर पढ़ता हूँ। निम्न लिंक से मँगवा सकते हैं:
      https://amzn.to/2RVqG9b

      इसके अलावा राज कॉमिक्स की साईट से भी आप वेद जी के उपन्यास खरीद कर पढ़ सकते हैं। लिंक निम्न है:
      https://www.rajcomics.com/index.php/300201/hindi-novels/ved-prakash-sharma

      इन दो साइट्स के अलावा वेद जी के उपन्यास dailyhunt के ई बुक एप्प पर भी उपलब्ध हैं। इन विकल्पों में से आप किसी भी विकल्प को चुन सकते हैं।

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  9. Ved is one of the best thriller writer that I read in Hindi. In my early childhood, I almost read everything by this writer. The writing is not great, and there would be several gaps in the plot if get on a fault finding mission, but some of the plots and twits were almost ahead of its time. While Vijay Vikash series gave him the fame, it was the thriller genre where he shined. Some of the books that you should read: 1. Bibi ka Nasha 2. Dahej Me Revolver and Jadu Bhara Jaal 3. Sabhi Diwane Daulat ke and Lash Kahan Chhupaun, 4. Vardi Wala Gunda 5. Kaidi No 100, 6. Kanoon ka Pandit 7. Dulhan Mange Dahej 8. Aurat Ek Paheli.. In fact, you should read his non-vijay vikas series :)

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  10. Vikas ji kuchh aisi site bataiye jahan se hum free hindi novel padh sake

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    1. जी वैसे तो मैं यही सलाह जी आप निम्न साइट्स पर जाकर पढ़ सकते हैं:
      http://gadyakosh.org/
      https://www.hindisamay.com/
      https://rachanakar.org
      https://www.shabdankan.com/
      ये कुछ चुनिंदा साइट्स हैं जहाँ जाकर आप हिन्दी साहित्य पढ़ सकते हैं। वैसे मेरी निजी राय यही रहेगी जितना हो सके किताबें खरीद कर ही पढ़ें क्योंकि जब तक लेखक को लिखने के पैसे नहीं मिलेंगे वो लिखेगा नहीं। फिर धीरे धीरे करके धंधा कम होते होते खत्म ही हो जायेगा। लुगदी उपन्यास के साथ यही हाल हुआ है।

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  11. किसी को याद है क्या कि वेदप्रकाश शर्मा जी ने एक उपन्यास लिखा था जिसमें टिडडी दल का जिक्र है ।
    किसी को नाम याद है क्या।

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  12. खलीफा, दूर की कौड़ी, दहेज में रिवाल्वर, जादू भरा जाल, लल्लू, हत्या सुहागिन की, कैदी नम्बर 100, 3 पार्ट की कहानी कातिल हो तो ऐसा-1, शाकाहारी खंजर-2, मदारी-3 इन्हें जरूर पढ़ें तब पता लगेगा भैया जी की असली जादू क्या है वेद प्रकाश शर्मा जी का

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    1. जी लल्लू पढ़ा हुआ है। बाकी भी मिलते ही पढ़ने की कोशिश रहेगी। पार्ट्स वाले उपन्यास अक्सर मैं इसलिए भी नहीं पढ़ता हूँ क्योंकि इनका एक पॉर्ट मिलता है और बाकी नहीं मिल पाते। खैर, जो मिलते हैं वो पढ़ने की कोशिश रहेगी। आभार।

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